PET परीक्षा के लिए गाजीपुर से जौनपुर के लिए कोई ऐसा पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं उपलब्ध है,
जिससे समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचा जा सके।
हालांकि गाजीपुर से जौनपुर की दूरी लम्पसम 100 किमी होगी,
लेकिन रोडवेज के नाम पर कोई बस उपलब्ध नहीं,
और न ही कोई ऐसी ट्रेन उपलब्ध है जो समय से जौनपुर (प्रथम पाली हेतु) पहुंचा सके।
अब छात्र या तो एक दिन पहले वाराणसी पहुंचे, या फिर भाड़े वाली चार चक्का का इंतजाम करें,
3 से 4000 चार चक्का वाला लौटा-फेरी के लेगा, और एक दिन पहले वाराणसी पहुंच के स्टेशन पर भटकना छात्राओं के लिए असहजता वाली स्थिति है।
कोई एक स्पेशल ट्रेन भोर के 4 बजे चलती है जौनपुर के लिए, चूंकि "स्पेशल" ट्रेन है, इसलिए समय से पहुँचाएगी कोई भरोसा नहीं।
ऐसी स्थिति में खासकर छात्राओं के लिए दो स्थिति बचती हैं,
या तो वो PET का परित्याग करें या 3 से 4000 रुपयों का,
कौन सी स्थिति चुनना बेहतर है?
उत्तर वा जौनपुर गमन हेतु सहयोग अपेक्षित।
मुझे लोगों से जुड़ने में कोई भी परेशानी नहीं आती है,चाहे अकाउंट छोटा हो या बड़ा।
लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं,जो फॉलोबैक लेने के बाद अनफॉलो कर देते हैं।
ऐसा करने के बाद पता नहीं कौनसा लाभ प्राप्त होता है इन लोगों को।
PET परीक्षा के लिए गाजीपुर से जौनपुर के लिए कोई ऐसा पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं उपलब्ध है,
जिससे समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंचा जा सके।
हालांकि गाजीपुर से जौनपुर की दूरी लम्पसम 100 किमी होगी,
लेकिन रोडवेज के नाम पर कोई बस उपलब्ध नहीं,
और न ही कोई ऐसी ट्रेन उपलब्ध है जो समय से जौनपुर (प्रथम पाली हेतु) पहुंचा सके।
अब छात्र या तो एक दिन पहले वाराणसी पहुंचे, या फिर भाड़े वाली चार चक्का का इंतजाम करें,
3 से 4000 चार चक्का वाला लौटा-फेरी के लेगा, और एक दिन पहले वाराणसी पहुंच के स्टेशन पर भटकना छात्राओं के लिए असहजता वाली स्थिति है।
कोई एक स्पेशल ट्रेन भोर के 4 बजे चलती है जौनपुर के लिए, चूंकि "स्पेशल" ट्रेन है, इसलिए समय से पहुँचाएगी कोई भरोसा नहीं।
ऐसी स्थिति में खासकर छात्राओं के लिए दो स्थिति बचती हैं,
या तो वो PET का परित्याग करें या 3 से 4000 रुपयों का,
कौन सी स्थिति चुनना बेहतर है?
उत्तर वा जौनपुर गमन हेतु सहयोग अपेक्षित।
बो श्री के, अब लेबर प्रजाति बताएगी हमें?
तुम्हारे शस्त्र से बेहतर है हमारी लाठी, खाए हो की नहीं,
कन्नी, बसुली पर ध्यान दें जिससे घर चल रहा है, नहीं आजकल चौराहों पर लेबर भी नहीं मिल रहे।
लाडले एक शस्त्र की कीमत में तुम्हारा खटाल, घर दुहार सब बिक जायेगा। एक नार्मल शस्त्र में तुम्हारी 8-10 भैसिया आ जायेगी। दूध,दही पर ध्यान दो जिससे तुम्हारा जीविका चल रहा है।
वो महोदय राम कृष्ण को नहीं मानेंगें, ऐसी प्रतिज्ञा तो ले लेते हैं लेकिन अपने बच्चों का ब्याह हिन्दू रीति रिवाज से ही करते हैं। कार्ड छपवाएंगें तो गणेश जी फोटो बनी रहेगी वैदिक मंत्र लिखे रहेंगें।
ये सब दिखावे के लोग हैं एयर अपनी पर आने पर सारा कुछ घर के हिसाब से करते हैं।
बीजेपी छोटे-मोटे मामलों की वजह से समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान साहब को परेशान कर रही है।
और
दूसरी तरफ लखनऊ में 700 करोड़ रुपये की खुद की मूर्तियां बनवाई गईं, लेकिन उन पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब बीजेपी की B टीम नहीं कहेंगे, तो क्या कहेंगे