“यह दुस्साहस भाजपा को भारी पड़ेगा। EVM rigging की आशंका से जानबूझकर मैंने इस बार अपना होमटाउन चुना ताकि मेरे पास सबूत रहे। लगा कि यहाँ ये डरेंगे पर जीतने की ज़िद और कॉन्फ़िडेंस में ये भूल गए दरभंगा मेरा होमटाउन है, कंसी पंचायत मेरा ददिहाल, रानीपुर पंचायत मेरा ननिहाल। नाते-रिश्तेदारों के ही घर-घर से 15-20 वोट हैं। सबने झोली भर-भर कर बेटी को वोट किया। पर सारे वोट एक ही पैटर्न से ग़ायब हैं! पूरा शहर छोड़िए, परिवार का पूरा वोट भी शर्तिया हारने वाले भाजपा विधायक को ट्रांसफ़र किया गया।” #EVM
EVM का पोल खुल चुका है मेरे होमटाउन में। हर दिन दरभंगा के अनेक वोटर फ़ोन कर रहे हैं, मिलने आ रहे हैं। मैं ख़ुद हर बूथ पर आपसे मिलने आऊँगी। पर इस बीच दरभंगा के सभी प्रबुद्ध वोटरों से अपील किया है कि वे मुझे संपर्क कर बताएँ कि किस बूथ, वार्ड या पंचायत में उन्होंनें मुझे वोट किया था। एक फॉर्म सारे वोटर को भेजा जा रहा है। न्यायालय और वैधानिक सारे रास्ते अख़्तियार किए जाएँगे पर सबसे बड़ी अदालत तो जनता की ही अदालत है। चलिए दरभंगा को चोरों से मुक्ति दिलाते हैं और देश का लोकतंत्र बचाते हैं।
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बीजेपी की आँधी में भी एकदम ध्रुवीकृत बिस्फी में बीजेपी विधायक की हार हुई। क्या वहाँ महिलाओं के खाते में 10000 भी नहीं पहुँचे? नहीं। क्योंकि इस बार वहां मेरे जैसा तीसरा लोकप्रिय उम्मीदवार नहीं था जिसको मिलने वाला खूब सारा न्यूट्रल हिन्दू-मुसलमान वोट EVM में 2020 की तरह उसके नाम ट्रांसफ़र हो पाता। उस साल राजद की आँधी थी और उसका एक क़द्दावर नेता अपने गढ़ बिस्फी में हार गया। उस साल भी बिस्फी में दरभंगा की तरह ही मेरे स्वजनों के वोट भी बीजेपी कैंडिडेट के खाते में ट्रांसफ़र करा लिये गए थे। मुख्य विपक्षी दल/गठबंधन से इतर किसी एक तीसरे लोकप्रिय उम्मीदवार/दल के अधिकतम वोट को अपने नाम कर लेने की यह रहस्यमयी तकनीक है। तब मैं सबूत रहते हुए भी खून का घूँट पी कर रह गई थी। इस बार इन्होंने मेरे घर में ही वोटों की डकैती की है। दुस्साहस है या बाहरी व्यक्ति में जानकारी का अभाव कि दरभंगा मेरा होमटाउन है जहां मेरे हज़ारों नाते-रिश्तेदार रहते हैं? जो भी हो, इस बार EVM से वोट चुराने का पूरा पोल मैं खोल कर रख दूँगी। इस बार इन लोगों से चूक हो गई है। #EVM
“दरभंगा के किसी भी बूथ पर आज पेपर बैलेट से चुनाव करा लें। यदि उसका वोट EVM पर आए वोट के बराबर रहा या निकट भी रहा तो मैं राजनीति छोड़ दूँगी। EVM में वोट चुराने से पहले नॉन-बिहारी एजेंट को जानकारी नहीं दी गई कि इस शहर में 50 साल से राजनीति कर रहे मेरे परिवार के ही हज़ारों वोट हैं।”
दरभंगा में मुसलमानों ने भी जो हज़ारों वोट मुझे पारिवारिक लगाव और पसंदगी से दिए, उनके बूथों पर भी वे सारे वोट बीजेपी ने बिना देखे-समझे खुद को ट्रांसफ़र करवा लिए! इस बार जिसका हारना तय था वह रिकॉर्ड जीत गया - कभी न मिलने वाले वोटों से! EVM में पूरी डकैती हुई विरोधी वोटों की भी।
EVM rigging में इस बार मेरी माँ, घर व हर मुहल्ले में रिश्तेदारों तक के वोट बीजेपी उम्मीदवार को ट्रांसफ़र। हर बूथ पर सैकड़ों वोट मैनिपुलेशन का साफ़ प्रमाण! वोटर हतप्रभ कि वोट कहाँ गए? जहां सैकड़ों वोट मिले उन बूथों पर भी संख्या 0-2 से 5-7 तक! हर बूथ पर एक-सा पैटर्न! सांख्यिकीय रूप से भी असंभव! शायद जिसे EVM मैनिपुलेट करने का काम दिया गया उसे बताया ही नहीं गया कि इस बार मैं अपने गृहनगर से चुनाव लड़ रही हूँ जहाँ मेरे गिने हुए हज़ारों वोट हैं। इस बार आपलोगों ने बड़ी चूक कर दी है। @BJP4India@narendramodi@AmitShah
प्रिय देशवासियों,
EVM लोकतंत्र के लिए समस्या बना दिया गया है। यह मैं इसलिए नहीं कह रही कि मैं हार गई, या भावुक हो गई या मुझे सदमा लगा है। यह सब ट्रोल की भाषा है। देखिए, मैं विश्वप्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ी हूँ। राजनीति और चुनाव पर बढ़िया रिसर्च किया है, विशिष्टता रही है। राजनीति को क़रीब से देखा है। खूब अनुभव रहा है। परिवार में ही 13 चुनाव देखे हैं।आज भी परिवार में एक व्यक्ति चुनाव जीते हैं। पर मैंने अपनी पार्टी बनाई और दो चुनाव लड़े हैं। मैं अपने पूरे ज्ञान और राजनीतिक अनुभव से पूरी ज़िम्मेदारी से कह रही हूँ कि EVM में वोट मैनिपुलेट हो रहे हैं। साल 2020 में भी मेरे पास बूथवार सबूत थे और आज तो खूब सारे जमा किए हैं। अब चूँकि मतदान-प्रणाली ही गुप्त मतदान पर आधारित है, इसलिए इसे न्यायालय में सिद्ध नहीं किया जा सकता। इसका फ़ैसला राजनीतिक तरीक़े से जनता की अदालत में ही होगा - जैसे भी हो, जब भी हो, जिस रणनीति से हो।
यह EVM मैनिपुलेशन कैसे होता है यह गंभीर शोध का विषय है पर यह होता है इसमें आप कोई संदेह मत रखिए। हाँ, मेरे अनुभव से, तरीक़ा यह है कि मुख्य विपक्षी दल/गठबंधन के उम्मीदवार अर्थात् पेपर पर नंबर दो के वोट को टच नहीं किया जाता। इसका उपयोग किसी नये दल के लोकप्रिय उम्मीदवार पर किया जाता है। और यह एक सीट पर एक उम्मीदवार के साथ ही संभव होता है। इसलिए जहां दो नये लोकप्रिय उम्मीदवार हों वहां एक का ही वोट बुरी तरह प्रभावित होगा। दूसरे का या अन्य निर्दलीय इत्यादि का यथावत रहेगा। इसलिए अन्य सीटों पर या दूसरे राज्यों या अन्य चुनावों में अगर मुख्य विपक्षी जीत रहा है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ख़तरे में सिर्फ तीसरा पक्ष रहेगा। पहले नैरेटिव बनाया जाएगा कि ये सब हवा-हवाई हैं, अप्रासंगिक हैं, बस सोशल मीडिया पर हैं, इत्यादि-इत्यादि ताकि चुपके से उनका वोट चुरा भी लिया जाए तो नैरेटिव यही रहे कि हाँ इनकी ज़मीनी पकड़ तो थी नहीं! या मेरे मामले में कि ये तो लंदन से आई हैं इत्यादि इत्यादि। या ट्रोलों और मीम से आपको डिस्क्रेडिट किया जाए। और इधर अपने वोटरों को लगने लगता है कि हाँ मैंने तो वोट किया पर सामने वालों ने नहीं किया होगा। पर अगर आपने वोट की गिनती की है, हर बूथ पर अंदर और बाहर आपके एजेंट हों तो आपको अच्छे से पता होता है कि 100-200 वोट 2-5 में नहीं बदल सकते। या आपके घर के वोट ग़ायब नहीं हो सकते या धुर-विरोधी बूथ पर सत्ताधारी दल को बंपर वोट कैसे मिले? ये सब आपका वोट होता है।
इसलिए नई राजनीति करने वालों के लिए रास्ता कठिन है। इस दौर की लड़ाई को बहुत धीरज और होशियारी से लड़ना होगा। मैं इसके लिए तैयार हूँ। राजनीति से नैतिकता आदि तो कब का जा चुकी थी, अब फ़्रॉड, ठग और किसी क़ीमत पर जीत लेने की राजनीति है। इससे डटकर दिमाग़ी मजबूती से मुक़ाबला करना होगा, हमें भी और आप सभी जनता को भी।
मैं पराजित हुई हूँ, समाप्त नहीं हुई हूँ। बस अब साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति में रणनीति बदलने की ज़रूरत होगी। मेरे पार्टी समर्थक और कार्यकर्ता हतोत्साहित न हों, हम वापसी करेंगे। आप सबलोग सपरिवार खुश रहें।
- पुष्पम प्रिया चौधरी
दरभंगा में नामांकन के बाद स्थानीय स्तर पर हमें बताया गया कि EVM में महागठबंधन के उमेश सहनी का क्रमांक 6, मेरा अर्थात् पुष्पम प्रिया का 7 और जनसुराज के आर के मिश्रा का 8 नंबर बटन होगा। पर 24 घंटे के अंदर उसे “ऊपर से” बदलकर 5,6,7 कर दिया गया। मशीन में शायद तय किया जा चुका था कि 6 नंबर के वोट नंबर 2 पर संजय सरावगी को ट्रांसफ़र करने हैं। पर महागठबंधन को 6 नंबर पर रखने से भंडाफोड़ हो जाता। यह जल्दबाज़ी में इनकी पहली तकनीकी चूक थी। मशीन में एक बार ट्रांसफ़र का फॉर्मूला तय हुआ तो बेचारा यह गलती सुधार नहीं पाया कि मुझे अपने हज़ारों नाते-रिश्तेदारों वाले होमटाउन दरभंगा में छोटे-छोटे निर्दलीयों से भी कम वोट आना और मुस्लिम वोटरों वाले बूथ पर रिकॉर्ड वोट बीजेपी उम्मीदवार को मिल जाना राजनीतिक व सांख्यिकीय दोनों रूप से असंभव है। मतगणना के दौरान स्वयं बीजेपी उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट हतप्रभ थे कि जहां से कभी वोट नहीं आया वहां वोट कैसे आ रहा है? पर नियति ने इस बार तय कर लिया है कि इनका पर्दाफ़ाश कर ही देना है। इस बार इन्होंने इतनी गलती की है और मेरे पास हर बूथ पर इतने सबूत हैं कि इनका पोल खुलना तय है। #EVM
आम जनता की नेता हैं पुष्पम प्रिया चौधरी जो गांव, गली, मुहल्लों में आम लोगों, महिलाओं, बच्चों सबको एक उम्मीद की किरण दिखती हैं। बाकी घिसे-पिटे नेताओं की तरह जहां ड्रामा कम है पर मानवीय अपनत्व ज़्यादा है। सारे शोर-शराबे के बीच एकमात्र नेता जिसे लोग जीतना देखना चाहते हैं।
वो जो हैं वो दिखती हैं, बाकी चंपू नेताओं की तरह नाटक नहीं करतीं कि चुनाव आने पर साइकिल, रिक्शा और टमटम पर चढ़ जाएँ और बाकी दिन जनता से लूटे पैसे से रेंज रोवर, हेलिकॉप्टर और चार्टर्ड प्लेन लटक लें। और हाँ ये वही सीट है जिससे इस बार डरपोक राहुल गांधी और तेजस्वी यादव भाग खड़े हुए और 20 साल की हारी हुई सीट एक डूबी नैया को दे गए। राजनीति पर टीका-टिप्पणी करके अपने अल्पज्ञान का परिचय न दें। लिट्टी-चोखा, बिहारी धरोहर इत्यादि पर आह-वाह कर पे-आउट लें। हैप्पी दीवाली।
कायर नहीं हूँ मैं। हमारी योद्धा देवी सीता की मिथिला में रघुकुल की रीत निभा दी है मैंने। कहा था चुनाव लड़ूँगी तो लड़ रही। प्राण जाये पर वचन न जाये। जन्मभूमि दरभंगा में 20 साल के दुर्ग को भेदूँगी मैं। शहर का हर घर मेरा घर है, हर परिवार मेरा परिवार है। 🖖
20 साल बाद कह रहे हैं कि अब रफ़्तार पकड़ा है बिहार! तो विकास क्या 100 साल के बाद होगा? जब हमारा जन्म हुआ तब भी सभी राज्यों में हम सबसे नीचे थे, और आज भी 28 राज्यों में 28 वें नंबर पर! बिहार को विकसित देखने के लिए हम बिहारियों को अगला जन्म लेना पड़ेगा? @narendramodi@NitishKumar
दरभंगा - जो देवी सीता के मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी है - यही मेरी मातृभूमि, पितृभूमि, जन्मभूमि और शिक्षाभूमि रही है। अब अपनी कर्मभूमि बिहार की सेवा आजीवन दरभंगा से ही करना मेरे लिए अपने पितृऋण को चुकाने के समान है। यही धर्म, यही ड्यूटी, यही बचपन का प्रेम।
पहले वोटिंग से पहले कैश बांटा जाता था, अब चुनाव के ठीक पहले 10000 रुपये की संस्थागत घूसख़ोरी की गई है। इस सरकार ने देश की संस्थाओं को बर्बाद कर दिया है और बिहार जैसे गरीब राज्य में ग़रीबों के टैक्स के पैसे को ही वोट ख़रीदने में इस्तेमाल करने की कोशिश है। कोई प्रश्न पूछने वाला है?
14 नवंबर को एक भी अपराधी चुनाव जीतकर सदन न पहुँचे, यही बिहार का सबसे बड़ा बदलाव होगा। हमारी पार्टी एक भी अपराधी को टिकट नहीं देगी, यह पूरे बिहार को हमारा वचन है।
देवी का दरभंगा में आगमन हो चुका है। बचपन के बाद पहली बार दरभंगा के दुर्गापूजा पंडालों में घूम रही हूँ। अद्भुत है मिथिला की दुर्गापूजा। सभी मिथिलावासियों, बिहारवासियों और देशवासियों को महानवमी की शुभकामनाएँ। #MahaNavami
दुर्गापूजा में महिषासुर भी तो अपने असली रूप में प्रकट होंगे ही ताकि देवी दुर्गा उनका संहार कर सकें। हम ऐसा लिखेंगे और पिछली बार की तरह फिर अगले सप्ताह माननीय गृह मंत्री ऐसे भस्मासुरों को डिनर पर आमंत्रित कर लेंगे। बिहार में महिलाओं की जय-जयकार इनसे नहीं होगी, देवी दुर्गा ही करें।
दुर्गा की पूजा हमारी संस्कृति में साल के सबसे सुंदर, भावुक, पवित्र दस दिन लेकर आती है तो दुर्गा-सप्तशती हमारी ओर से देवी के जय-जयकार की कृतज्ञता है। यह अंतिम पुस्तक रही जो मेरे पिता ने मुझे ठीक तीन साल पहले दी। वे अब नहीं हैं पर दुर्गा हर साल आती रहेंगी, उनकी जयजयकार होती रहेगी।