आज सतुआन भी है। इस दिन हम जौ-चने का सत्तू, कच्चे आम और हरी मिर्च की चटनी, भरे लाल मिर्च का अंचार और प्याज खाते हैं। आज भी घर में हमारा और गीता जी का दोपहर का भोजन यही स�� मिलाकर था। पूरी गर्मी सत्तू किसी न किसी बहाने हमारे भोज्य पदार्थ में शामिल रहेगा।
भगत सिंह की फाँसी रोकने के लिए चिट्ठियाँ लिखीं गांधीजी ने।
फाँसी के बाद श्रद्धांजलि दी गांधीजी, नेहरू, अम्बेडकर, पेरियार, सुभाष आदि ने।
गोलवलकर, हेडगेवार, मु��जे, सावरकर मुखर्जी सहित किसी संघी/महासभाई ने न अपील की न श्रद्धांजलि दी।
बताओ ग़द्दार कौन?
नीतीश जी ने 2007 से बिहार के गाँव-गाँव तक देशी/विदेशी शराब पहुँचाया और फिर एक दिन महिलाओं के कहने पर शराबबंदी लागू कर दी। इसका मतलब है क़ि इस विषय पर सरकार की अपनी कोई अध्ययन/जानकारी शून्य थी। इसलिए शराबबंदी धरातल पर फेल है। @RJDforIndia
Sanskrit Effect
MRI scans show that memorizing ancient mantras increases the size of brain regions associated with cognitive function.
I think it is not merely the chanting of Sanskrit but also the content of the chants that opens the mind.
https://t.co/NjDSIFTK4L via @sciam
जिस क़ानून को पारित करते वक्त संसद का हवाला दिया गया, सांसदों का हवाला दिया गया, लोकतंत्र का हवाला दिया गया, उसे एक व्यक्ति ने TV पर आकर खत्म कर दिया।
भाजपा के सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को समझ जाना चाहिए कि उनकी हैसियत क्या है।
��ांसद रबर स्टैंप है, संसद महज़ एक मज़ाक़।
अब भक्तों और ढिंढोरचियों को समझाना ह��गा कि आपको कृषि और किसानों की नहीं, यूपी, पंजाब सहित पांच विधानसभा चुनावों में भाजपा की खस्ता हालत की चिंता है। हिमाचल ने बानगी दिखा दी है! इस सबके बावजूद आपको बधाई और बधाई उस किसान संघर्ष को भी जिसने आपको नासमझी का एहसास कराया।
आज़ादी का नेतृत्व गांधीजी ने किया। गांधीजी की हत्या के षड्यंत्र में सावरकर व उनकी मंडली को दोषी ठहराया गया। आज सावरकर को स्वातंत्र्य वीर समझाया जा रहा है। हिंदी का बिगुल गांधीजी ने बजाया। सावरकर ने अंगरेज़ी में माफ़ियाँ माँगीं। उन्हें आज हिंदी प्रेमी बताया जा रहा है। बेशर्म लोग।
चमक उठी सन इक्कीस में
वह बत्तीसी किसकी थी?
सिंहासन किसका डोला-
किसकी सत्ता खिसकी थी?
पूछेंगी नस्लें आनेवाली
हाथ कगना को आरसी क्या
निरक्षर को फारसी क्या?
खूब लाठी भांजी उसने
जो फ़िल्मों वाली रानी थी !
Vinod Rai —- Anna Hazare —-Arvind Kejriwal destroyed the Congress.
The Congress’s problem was that none of its three leaders at the top ( Dr MMS, SG, RG) took on the battle head-on. They barely spoke.
BJP got a cakewalk. The rest is history.
सावरकर का माफ़ीनामा इतनी बड़ी बात नहीं थी, उनके कुछ लिखने या बोलने से तब कोई सत्ता परिवर्तन नहीं होने जा रहा था।
पूर्व CAG विनोद राय का माफीनामा बड़ी बात है-2G केस में मनमोहन को लेकर उन्होंने झूठा दावा किया था।
@sanjaynirupam माफ भी कर दें तो देश कैसे माफ करेगा?
#VinodRai
So happy to see that bit by bit, the judiciary, esp the higher judiciary is beginning to play it's Constitutional role as the guardian of the Constitution & fundamental rights; and assert it's independence over the executive. Hope this trend continues in these perilous times
विनोद राय एक फ़्रॉड है। जिस आदमी ने अपनी किताब बेचने के लिए संजय निरुपम का नाम ले कर झूठ बोला और आज माफ़ी माँगनी पड़ी, सोचिए उसने किताब में और अपनी सी॰ए॰जी॰ रिपोर्ट्स में कितने झूठ लिखे होंगे।