भारत की प्रथम ��ागरिक है। संसद के दोनों सदनों की प्रमुख है। भारत की तीनों सेनाओं की प्रमुख है। देश के सबसे पुराने बाशिंदे वाले आदिवासी समाज से है। नारीशक्ति है। महामहिम राष्ट्रपति जी, से नवनिर्मित संसद भवन का उद्घाटन ना करवाना मुर्मु जी का, आदिवासी समाज का और राष्ट्र का अपमान है।
देश का प्रथम नागरिक राष्ट्रपति होता है।
देश में राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
देश में तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति होता है।
इतना सब होने के बाद भी हमारे संसद भवन का उद्घाटन मोदी जी करेंगे। अ��र ऐसा होता है तो ये राष्ट्रपति के पद का घनघोर अपमान होगा।
ये दो व्यक्ति, एक है योगेंद्र यादव जी एक है स्वामी प्रसाद मौर्या जी
पिछड़ा वर्ग से आने वाले इन दो महानुभावों ने पाखण्ड और जाति आधारित दुकानों का धंधा चौपट कर रखा है।
दोनों 2-3% आबादी वा���ों के निशाने पर हैं, क्योंकि तर्क-वितर्क में इनसे कोई जीत नहीं पा रहा... @SwamiPMaurya
मैं योगेंद्र यादव हूं, समाजसेव��� की खाल ओढ़े जातिवाद विशेषज्ञ बनने की कोशिश करता हूं. मैं ये कभी नहीं बताउंगा की बिहार में किस जाति के कैबिनेट मंत्री सबसे ज्यादा हैं, मैं ये कभी नहीं बताऊंगा की राजनीति में जातीय नफरत के बीज बोकर किसने अपने बच्चों/बहुओं को सांसद मंत्री बनाया, मैं ये भी कभी नहीं बताऊंगा की जरूरतमंद OBC जातियों का हक कौन से संपन्न लोग खा रहे हैं, मैं ये भी कभी नहीं बताऊंगा बिहार में पिछले 30 वर्षों से कौन से 0.1 भी कम ��ंससंख्या वाले परिवार 99% से अधिक आबादी पर राज कर रहे हैं, मैं ये भी नहीं बताऊंगा कि अरविंद केजरीवाल ने मेरी इसी सोच के कारण मुझे भगाया था. मैं सिर्फ ब्राह्मणों के खिलाफ वही 3% प्रोपोगंडा वाला रटा रटाया ज्ञान दूंगा. क्योंकि ब्राह्मण सहनशील है कुछ नहीं बोलेगा, विरोध भी नहीं करेगा, जातीय नफरत के आधार पर सत्ता पाने के लिए किसी पूरी जाति को सार्वजनिक टारगेट ��रना तो उन्होंने कभी सीखा ही नहीं. उनके खिलाफ नफरत फैलाने के बावजूद वो मुझसे ये नहीं पूछेगा की आपकी जाति कितने % है. लेकिन मैं ये भूल गया था कि आज का ब्राह्मण भी पूरी जाति को तो टारगेट नहीं ही करेगा लेकिन अगर मैं उनके खिलाफ बेफिजूल की बातें करूंगा तो वो बिना मेरी पूरी जाति को टारगेट किए मुझ जैसे जातिवाद करने वाले सभी लोगों को व्यक्तिगत तौर पर करारा जवाब जरूर देगा. क्योंकि ब्राह्मण को यह पता है कि मुझ जैसे जातिवाद पर टिप्पणी करने वाले का बयान पूरे समाज का नहीं है तो पूरे समाज को क्यों घसीटना. मैंने आंदोलनजीवी बनकर देख लिया मुझे कोई विशेष सफलता हाथ नहीं लगी. अभी मैं किसी गांव का प्रधान भी नहीं हूं, लड़ूंगा तो शायद हार जाऊंगा. इसलिए जरूरी है कि अब मैं M को साधकर आगे का कुछ प्लान करूं. हालांकि मुझे ये जरूर नहीं समझ आता कि मैं न किसी पार्टी का प्रवक्ता हूं, न किसी गांव का प्रधान फिर ये TV वाले मुझ��� डिबेट म���ं क्यों बुलाते हैं? ज्यादा बताऊंगा तो सार्वजनिक रूप से बहुत बदनामी होगी. इसलिए अभी फिलहाल इतना ही.
21वीं शताब्दी में प्रवेश करते भारत को सुनिश्चित, सबल और आधुनिक दिशा देने वाले भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री #राजीव_गाँधी जी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।
उत्तर भारत में ब्राह्म���ों के प्रभुत्व को यादवों ने चुनौती दी है। पहले ब्राह्मण कहते थे कि बबूल के पेड़ के नीचे आम मिला है तो सब जातियाँ इसे चमत्कार मान लेती थीं मगर अब समीकरण बदल रहे हैं। अब सभी जातियाँ विवेकवान हुईं हैं।
ये सामाजिक परिवर्तन ही उनकी पीड़ा की असली वजह है।
अगर आप SC ST OBC हो और आपके पास पत्रकारिता की डिग्री/डिप्लोमा नहीं है तो आप मीडिया कंपनी में सिर्फ़ चपरासी या सिक्योरिटी गार्ड बन सकते हो। यदि आप सवर्ण हो और आपके पास डिग्री/डिप्लोमा नहीं है तो आप चित्रा त्रिपाठी भी बन सकते हो।
मीडिया में डिग्री नहीं जाति चलती है।
खेल समझिये!
2000 के नोट बंद करने के पीछे क्या झोल है?
कर्नाटक चुनाव हार चुके है, 2024 का लोकसभा चुनाव आने वाला है, पूरा दक्षिण भारत भाजपा साफ है
बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में लगभग भाजपा खत्म है
सब जानते है कि चुनाव ��ें बड़ी मात्रा में धन बल यूज होता है ऐसे में ये नोटबंदी लाकर विपक्ष को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहते है क्योकि भाजपा व इनके लोगो ने तो पहले ही नोट बदल लिये होगे
ठीक उसी तरह जिस तरह इनको उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतना था, चुनाव 2017 में था और इन्होने नवंबर 2016 में नोटबंदी कर दी
विपक्ष बिल्कुल कंगाल कर दिया जबकि इनलोगो ने पहले ही नोट बदल लिये थे और बाद मे भी साठगांठ से नोट बदले
इस बार भी 2000 का नोट बंद करना 2024 लोकसभा की तैयारी के लिए किया गया हथकंडा है कुछ और नही
मोदी शाह और भाजपा को देश व देश की जनता से कोई लेना देना नही ये लोग कॉर्पोरेट ऐजेंट है बस