"आरक्षण दलितों का नुकसान कर रहा है। मर्द हो तो सवर्णों से अधिक योग्य बनकर दिखाओ...।
— पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस "मार्कंडेय काटजू"
Gen Z must see this. 👇🫡
पूरे देश में नौकरी लगभग 25-30 लाख,
SC/St आबादी लगभग 25 करोड़ ।
यदि तुम्हें 100% Reservation भी दे दिया जाये तो....??
1 करोड़ आबादी को भी सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी,,
मोदी क्या किसी भी पार्टी की सरकार नहीं दे सकती ।
गम्भीरता से चिंतन कीजिए,
यह आरक्षण नहीं, मात्र एक "बैसाखी" है जिसके कारण तुम आज तक आगे नहीं बढ पाये ।
पीछे ही घिसटते रहे....!!
योग्य बनो
"मर्द बनो, आरक्षण छोड़ो"
सवर्णों से आगे निकलो ।।
Justice Markandey Katju,
Reservation
#Aarakshan Hatao
#Aarakshan #equality #castism
एक लड़की शाम वाले क्लास को मॉर्निंग में कर दीजिए बोली मुझे दूसरे के यहां बर्तन धोने जाना होता
ओझा सर UPSC का जो तैयारी करती है वह 10th तक पढ़ा सकती है
शुभंकर मिश्रा खान सर ने मासूमियत गरीबी बेचकर पढ़ा दी
विपिन सर कोचिंग पटना में तभी तो उसने कहा शाम वाला class को सुबह कर दीजिए
महार जाति का भीमवादी बोल रहा है:
"हम अपनी जाति की लड़कियां मातंग जाति के भिखारियों को नहीं देते, वो किसी काम के नहीं"
बता दें कि महार दलित हैं, और मातंग भी दलित हैं!
सब देख लीजिए कौन किसके साथ जातिवाद करता है!
धुन्ना जाति के मुस्लिम युवक को तुर्क जाति के मुस्लिमों ने मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका। मुस्लिम युवक ने तुर्क जाति के मुसलमानों की शिकायत सिंघम SP विश्नोई जी से की।
आंख खोलकर देख लो जाति मुसलमानों में भी होती है। लेकिन तुम्हारी तरह गन्दी राजनीति नहीं होती
देश में आरक्षण की शुरुआती व्यवस्था 1902 से ही है, जब कोल्हापुर रियासत में पिछड़े वर्गों के लिए यह व्यवस्था लाई गई।
लेकिन बात करते हैं 1950 से पहले की जब इसकी संवैधानिक व्यवस्था की गई ।
तो जानते हैं की किसने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को सरकारी व्यवस्था से दूर रखा ।
तो आज़ादी से पहले देश की शासन व्यवस्था अंग्रेज़ों के हाथ में थी।
ब्रिटिश भारत में सरकारी नियुक्तियों का अंतिम अधिकार अंग्रेज़ी शासन के पास था। भारतीय समाज के किसी वर्ग को नियुक्तियों पर संवैधानिक नियंत्रण प्राप्त नहीं था।
उससे पहले देश के ज़्यादातर हिस्से पर मुगलों का शासन था।
अब बात करते हैं उससे पहले की इतिहास की ।
उससे पहले ,
राजस्थान के कई क्षेत्रों में मीणा शासक हुआ करते थे एवं उनका काफ़ी प्रभाव था।
वो तो ब्रिटिशर्स थे, जिन्होंने कुछ मीणा समूहों को Criminal Tribes Act के अंतर्गत “क्रिमिनल ट्राइब” घोषित कर दिया।
कई यादव राजवंशों का उल्लेख भी आपको भारतीय इतिहास में मिल जाएगा।
उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में अनेक पासी सरदारों और गढ़ों का उल्लेख इतिहास में है।
गोंड भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक हैं। मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और विदर्भ) में कई गोंड राजवंशों ने सदियों तक शासन किया। गढ़ा-कटंगा, देवगढ़, चांदा और खेड़ला जैसे गोंड राज्यों का इतिहास अच्छी तरह प्रलेखित है।
महाराष्ट्र में महार समुदाय (जिससे बाबा अंबेडकर आते थे) के कई लोग गाँवों के वतनदार और सैन्य अधिकारी थे।
ये तो हो गई इतिहास की बात, जो वर्तमान में मायने नहीं रखती।
अब आते हैं शादी की बात पर तो वो मैं पहले ही लिख चुका हूँ की भारत में शादी को लेकर कई सामाजिक मान्यताएँ हैं, पारंपरिक सामाजिक रीति-रिवाज हैं।
दलित वर्ग में भी शादी को लेकर उपजातियाँ देखी जाती हैं।
ब्राह्मणों में भी एक ही गोत्र में शादी नहीं होती।
और वैसे भी शादी नितांत ही निजी विषय है।
एक वर्ग की शादी अन्य वर्ग में न हो, इसका आरक्षण से कोई सरोकार नहीं है।
जहाँ तक जातिगत टिप्पणी की बात है तो सिर्फ़ दलित ही नहीं, कई बार ब्राह्मण अधिकारी को भी जाति-सूचक टिप्पणी झेलनी पड़ती है।
अगर वाक़ई में आरक्षण को सामाजिक न्याय के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता, तो समय के साथ आरक्षण लेने वालों की संख्या घटती जाती।
लेकिन ये बस राजनीतिक हथियार बनकर रह गया, इसीलिए आरक्षण लेने वालों की संख्या बढ़ती रही।
दिक्कत मात्र ये है कि जो वर्ग आरक्षण का लाभ लेकर ऊपर उठ चुका है, वो आरक्षण छोड़ना नहीं चाहता। और इसके लिए तमाम कुतर्क ढूँढे जाते हैं।
सदियों की कहानियाँ गढ़ी जाती हैं।
वंचितों का हक़ सिर्फ़ वही खा रहे हैं, जो समृद्ध होकर भी वंचित होने का दिखावा कर रहे हैं।
किसी भी इलाज की एक तय सीमा होती है कि वह बीमारी को कितने वक्त में खत्म करेगा।
यहाँ तो 75 साल हो गए, बीमारी साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है।
इस इलाज की समीक्षा की ज़रूरत है।
General Category students are getting lathi-charged for "fair education system," but not fighting against the biggest unfair system - RESERVATION !
This is your biggest opportunity. Don't waste it!
Out of syllabus qoustion...
नीली कबूतरी:हमे प्रॉब्लम है जातिवाद से
महिला रिपोर्टर: फिर आप रिजर्वेशन क्यों चाहते ..?
नीली कबूतरी : अच्छा आप गोदी मीडिया से हो
जब जवाब ना आए तब आरक्षण जीवी 😅
फैजल खान का नया वीडियो
अपने घर से दोगो-तीनगो को महिलाओं को लाओ और टाली पर नचाओ, सरकारी नौकरी से ज्यादा तुम्हारी घर की महिला पैसा कमाएंगी
ई हरामी सब अपने बाप का नहीं है.!
@AnilYadavmedia1 X पर यूँ ही नहीं भैया का नाम चलता है। इनकी लेखनी और इनके कटाक्ष को समझने के लिए बहुत ऊंचा दिमाग चाहिए।अभी इनको इन 2 लाइनों पर पूरा कमेंट बॉक्स ब्राह्मण सिद्ध करने के लिए भर देंगे।
CJP सदस्य: सर, हमारे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक जी का समर्थन कीजिए।
अंकल जी: पहले बताओ, तुमने NEET दिया था?
लड़की: नहीं।
अंकल जी: वो गद्दार है चाइना का साथ देता है पाकिस्तान का साथ देता है।
अंकल जी: फिर CJP का NEET से क्या लेना-देना?
लड़की: अच्छा, सोनम वांगचुक जी का एक रिसर्च बता दीजिए।
अंकल जी: मुझे तो 50 पता हैं… वो जिस कॉलेज में पढ़ाता था वो भी फ़र्ज़ी है उन बच्चों को डिग्रियां भी फ़र्ज़ी है
प्रेमी प्रेमिका ने जान दे दी क्योंकि दोनों का परिवार रिश्ते के खिलाफ था!
और लड़का था यादव (OBC) और लड़की थी चौरसिया (OBC).
अब बताओ, जातिवाद कौन करता है??
और अगर ये ख़ुद जातिवाद करते हैं तो जातिवाद करने वालों को आरक्षण क्यों दिया जाता है??
जो घुसने नहीं देता है वो तो तुम्हारे ही बहुजन यादव भाई हैं, ये कौन बताएगा?
फिर यही ओम सुधा UGC में यादवों के शामिल होने का समर्थन भी करते फिरता है!
ओम सुधा,
एक लाइन पकड़ो-
या तो बहुजन भाई का अत्याचार चुपचाप सहो और बहुजन एकता निभाओ,
या भेदभाव की शिकायत करो!
दोनों थोड़ी चलेगा?
Hello @Nehabhartipro अंबेडकर की पूरी राजनीति ही थी बटाने वाला तुझे इतिहास पढ़ना चाहिए!
अंबेडकर देश की आज़ादी के खिलाफ़ थे तुझे तो यह भी पता नहीं होगा
अंबेडकर को बौद्ध धर्म से कोई लेना नहीं था उसने दलितों को कैसे हिंदू से अलग कर लिया जाए इसलिए बौद्ध धर्म चुना!