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अखिलेश यादव ��े संसद में बीजेपी के परखच्चे उड़ा दिए...
“यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं छात्र और नौजवानों का है। क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के ��िए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं।"
-अखिलेश यादव जी
चलो थोड़ा खुलकर लिखता हूँ आज, क्योंकि इस मुद्दे पर बार बार नहीं लिखना है मुझे।
● इनकी ख़बर पता चली क्या?
● लो इनकी भी धाकड़ वीडियो आ गयी!
● बहुत शानदार परफार्मेंस दिया है, जिसको link चाहिए कमेंट करें।
●ये दोनों फेमस हो गए हैं, कमेंट करने वालों को link इनबॉक्स किया जाएगा।
● वायरल होने के वीडियो अपलोड कर दिया, कैसे कैसे लोग हैं।
ये ऊपर जो पॉइंट्स दिया हूँ सब के सब कैप्शन में डालकर.. कोई न कोई स्क्रीनशॉट लगाकर लोग नरक मचाये हुए हैं।
तुम्हारे घर के किसी भी मेम्बर का रीयल या फेक वीडियो अगर ऐसे ही आ जाये तो उसे वायरल करोगे? नहीं करोगे क्योंकि तब ईज़्ज़त याद आती है ख़ुद की , तब रीच की चिंता क्यों नहीं करते हो?
कुछ लोग कहते हैं कि उसने ख़ुद ही रिकॉर्ड किया है, और वीडियो असली है तो फिर.. अरे पागल हराम'खोर अगर वीडियो सही है या fake फिर भी तुम्हें हक़ नहीं है ये दब डालने का। अश्लीलता फ़ैलाने के चक्कर में किसी दिन जेल के चक्कर काट लोग तब बुद्धि खुल जाएगी।
और सुनों ये “वो” वाली बेवसाइट या app नहीं है उसके लिये गूगल है अभी भी.. तो इस पर ये सब न डालो प्लीज़। सुधार कर लो , बेवजह पाप न करो।
यक़ीन करो तुम्हारे वायरल पोस्ट के चक्कर में किसी दिन कोई मासूम मर जाएगी देख लेना। जब किसी का fake ai वीडियो वायरल होगा और वो या परिवार के लोग ये सदमा न बर्दाश्त कर पाए तो क्या होगा कभी सोचे हो?
आज से मैं रिपोर्ट और अनफॉलो करना शुरू करूँगा.. अब मुझे थोड़ी बहुत छँटनी करनी ही पड़ेगी। सुधर जाओ नहीं तो दूर हो जाओ हमसे।
बीजेपी सरकार ने 600 से ज्यादा जिलों में दस-दस करोड़ की लागत से फाइव स्टार दफ्तर खड़े कर दिए, लेकिन 5000 सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए।
साफ है, बीजेपी की प्राथमिकता में बच्चों की शिक्षा नहीं, चुनावी मशीनरी है।
गरीब का बच्चा पढ़े या नहीं, इन्हें फर्क नहीं पड़ता। फर्क बस कुर्सी से पड़ता है।
जो सरकार बच्चों से कलम छीन��र खुद के लिए महल बना रही हो, उसे सत्ता में रहने का हक नहीं।
बीजेपी हटाओ, अपने बच्चों का भविष्य बचाओ।
अब नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी।
लिखते रहिए जब तक सरकार अपना फैसला ना बदल ले।
डरपोक सरकार है, विरोध करने के बाद इसने कई फैसले बदले हैं, अगर विरोध हुआ तो ये फैसला भी बदल देगी !
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो
स्कूल के गेट पर रोता बच्चा, उसके माता-पिता की बेबसी और सरकार की बेरुखी...
इन मासूम आंसुओं का एक-एक कतरा बीजेपी सरकार की बर्बादी का इतिहास लिखेगा।
शिक्ष�� बंद, शराब चालू
यही है "डबल इंजन" की असलियत।
उत्तर प्रदेश में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि दारू की दुकान हर गली-चौराहे पर मिल जाएगी, लेकिन एक अच्छा स्कूल ढूंढना मुश्किल हो गया है।
सरकार ने साफ दिखा दिया है कि उसे शिक्ष��� से ज्यादा शराब की चिंता है।
ये कैसा विकास है? शिक्षा नहीं, शराब जरूरी हो गई है सरकार के लिए।
यही है यूपी मॉडल!
2027 के चुनाव नजदीक आते ही सियासत का रुख साफ होता जा रहा है।
अब भाजपा के बड़े नेता भी अखिलेश यादव जी पर बयान देने से बच रहे हैं।
बृजभूषण शरण सिंह जी ने भी साफ कहा – “अखिलेश जी हमारे छोटे भाई हैं, मैं व्यक्तिगत प्रहार नहीं करता।”
ये बयान बहुत कुछ कहता है।
जब विरोधी भी सम्मान से बात करें तो समझ लीजिए जनता का मूड क्या है।
भाजपा के नेता भी जानते हैं कि 2027 में अखिलेश यादव जी की सरकार बनना तय है, इसलिए अब कोई भी उलटा-पुलटा बोलकर मुसीबत क्यों मोल लें?
हवा साफ है – "2027 में अखिलेश यादव!"
भारत की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है।
47% बच्चे तीसरी कक्षा में 10 तक का पहाड़ा नहीं बोल पाते।
58% बच्चे ही ठीक से गुना-भाग कर पाते हैं।
सरकार स्कूलों की संख्या घटा रही है,
शिक्षा बजट में हर साल कटौती हो रही है।
बच्चों के हाथों में किताबें नहीं, मेहनत का बोझ है।
गांव-गांव स्कूल बंद हो रहे हैं, मास्टर कम हो रहे हैं।
क्या ऐसे बनेगा नया भारत?
चलो स्कूल चलें हम — या सपनों से मुंह मोड़ लें हम?