आह्लादित दृश्य है। इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संगम में स्व-देश कल्याण के निमित्त डुबकी लगा रहे हैं और उधर साथ-साथ संगम के घाटों पर पूरा 'देस'। ग्यारह बजकर तीन मिनट से पांच मिनट के बीच उनकी पहली डुबकी लगी। उधर डुबकी इधर जय-जयश्रीराम का जयघोष। महाघोष। पूरा दृश्य आपके सामने।
विश्व को जीवन जीने की कला सिखाने वाले आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर जी के साक्षात्कार का प्रयाग में अवसर मिला। सुदर्शन क्रिया के बाद अब काल दर्शन का गुर श्रीश्री अब अपने भक्तों को बताएंगे। पढ़ें उनसे हमारी बातचीत।
देवदीपावली
मनुष्य मन का अमावस मिटे। घाटों पर आए लोगों की यही तो मंगलकामना है। प्रकाश यानी सत्य के पथ पर उन्मुख होना ही वास्तविक साधना और अध्यात्म है। आज के दिन काशी का विश्व को यही संदेश होता है। असत्य से सत्य की ओर का प्रस्थान बिंदु है यह लोक पर्व देवदीपावली।
ज्ञानवापी : ज्ञान का अर्थ परमतत्व और वापी का अर्थ बावड़ी। मोक्ष प्रदान करने वाला परमतत्व स्वरूप यानी शिवतत्व का ज्ञान कराने वाली यह वापी ही *ज्ञानवापी* के नाम से लोक और ग्रंथ दोनों में समादृत है।
ज्ञानवापी : ज्ञान का अर्थ परमतत्व और वापी का अर्थ बावड़ी। मोक्ष प्रदान करने वाला परमतत्व स्वरूप यानी शिवतत्व का ज्ञान कराने वाली यह वापी ही *ज्ञानवापी* के नाम से लोक और ग्रंथ दोनों में समादृत है।
गोरखपुर वन्दे भारत का कोच अटेंडेंट दुखी होकर कह रहा है कि रेलवे को खाने के साथ स्टील के चम्मच नहीं देने चाहिए क्योंकि यात्री उन्हें चोरी कर लेते हैं।
..और फिर अपनी जेब से चम्मच उस गरीब को खरीदने पड़ते हैं।
..और चोरों में पैसे वाले अधिक होते हैं।