मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन "कुणाल कामरा" एक बार फिर मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं।
दरअसल कल जंतर मंतर पर CJP के प्रोटेस्ट में कुणाल कामरा ने कहा था कि,
"मौजूदा सरकार सीता के पति का नाम लेकर नीता के पति के लिए काम कर रही है और सिर्फ उन्हें ही फायदा पहुंचा रही है"
यह लाइन सुनकर मौजूद लोगों ने तालियां बजाई लेकिन कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई जिससे कुछ लोग इनपर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अन्दर तक हिला कर रख दिया इस विडियो ने 😳
"मैं BJP नेता का बेटा हूँ लेकिन बच्चों की मौत पर ख़ामोश नहीं रहूँगा।"
घर छोड़कर जंतर-मंतर पहुँचे युवक का भावुक बयान "अगर 30 बच्चों की मौत तुम्हें नहीं झकझोरती, तो 31वाँ मेरा नाम समझ लेना।"
एक ब्यान जिसने राजनीति से ज़्यादा इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए।
Sonakshi Sinha:
“मैंने पहले कभी कोई बयान नहीं दिया, लेकिन अब मैं चुप नहीं रह सकती। सोनम जैसी जानी-मानी हस्ती छात्रों के लिए 18 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और सब चुप हैं।
अब मैं आवाज़ उठाऊंगी; अगर हम बोलते हैं तो हम देश-विरोधी नहीं हो जाते, हमारी भी आवाज़ सुनी जानी चाहिए। मैं डरती नहीं हूं, जो होगा देखा जाएगा।
सरकार को सोनम सर से बात करनी चाहिए।”
"If This Man Is going to Die today ,, Mujhe Iss Desh me Nahi Rehna...."
💥🙏
Gen Z isn't Angry without a Reason They're worried about the Future of our Great Nation 💥
When an entire Generation starts Losing Hope, it's Time to Listen 💥😑
Health Update on Day 19 of the Hunger Strike
Dr. Tilopa, a practicing MBBS and MD from Delhi, addresses concerns about health as the hunger strike continues.
19 दिनों से एक शिक्षाविद् अनशन पर है, और सरकार पूरी तरह मौन है। वांगचुक जी बिल्कुल सही कह रहे हैं जब जवाबदेही (Accountability) की कोई शुरुआत ही नहीं होगी, तो पर्चे तो लीक होंगे ही और बेईमानी का बाज़ार भी सजेगा।
छात्रों के भविष्य से लेकर देश की ईमानदारी तक, आज सब कुछ नीलाम हो रहा है।
वे समझदार लोग थे जो चुप रहे : वीरेन भाटिया
वे समझदार लोग थे
जो चुप रहे
वे
समझदार लोग थे
जो चुप रहे
वे वर्तमान के कुछ बड़े चुप्पों को जानते थे
चुप के उनके गणित को जानते थे
जानते थे उनके हासिल
जो चुप्पियों का इनाम थे
जो चुप रहे
वे समझदार लोग थे
हासिल के जमा-घटा के प्रवीण लोग थे वे
उन्होंने अपने बच��चे देखे
उनके सुख देखे
उनकी तरक्की देखी
उनके लिये सुरक्षित भविष्य चाहा
उन्होंने सुविधा देखी
भौतिक सुखों का पहाड़ खरीदा
उसके ऊपर बैठ खुश होते रहे
उनकी चुप्पी
वर्तमान का गणित थी
और सुरक्षित भविष्य की चाहना थी
भविष्य में उतरते जीवन मे मगर
वे सुखों के पहाड़ के नीचे
दबे पाए गए
उनके बच्चे दुनिया के कायर बच्चे साबित हुए
संवेदनाओं की जब सबसे अधिक जरूरत थी चुप्पों को
तब उनके इर्द गिर्द भीड़ ��ो थी
संवेदना नही थी
वे भीड़ में घिरे अकेले लोग थे
वे समझदार लोग थे
जो चुप रहे
उन्होंने बोलने वालों को मूर्ख कहा
लड़ने वालों को आतंकी, उपद्रवी,
विद्रोही, देशद्रोही कहा
अंतिम समयों में मगर
वे बोलने वालों को पढ़ रहे थे
लड़ने वालों से सीख रहे थे खड़ा रहना
अपने मायूस दिनों में अकेलेपन में घिरे वे
बोलना चाहते थे
आवाज लेकिन
गले मे द���ी रही
और वे
बिना अभिव्यक्त हुए
दुनिया से रुखसत हुए
चुप लोगों का खुद को अभिव्यक्त न कर पाना
उनका सबसे बड़ा दुख था
वे अंतिम समय मे जान पाए
कि जिसे वे समझदारी का गणित कहते थे
दरअसल वह कायरता थी ।
~~वीरेंदर भाटिया
आवाज ~~ राजेन्द्र गुप्ता
#SonamWangchuk ♥️♥️🙏🙏🇮🇳🇮🇳
बॉलीवुड अभिनेत्री आकांशा सिंह उतरी सोनम वांगचूक के समर्थन मे..🔥
लेकिन अभी तक सोनम वांगचूक के नाम पर करोड़ों पैसे छापने बनाने वाली "थ्री इडियट" स्टारकास्ट अभी तक चुप क्यों है सिवाय चतुर के