"69 हज़ार शिक्षक भर्ती 2019 में संवैधानिक आरक्षण मिलना चाहिए 27 परसेंट, मिला है 3.86 परसेंट, जो लूट हुई है वो है 23.14 परसेंट।"
• माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
''हम दलित-पिछड़े समाज से हैं, हमारी कोई सुनने वाला नहीं है''
- लखनऊ में शिक्षक भर्ती घोटाले से निराश युवा सड़क पर रेंगते हुए अपना हक मांग रहे हैं
दरअसल यूपी की BJP सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण का घोटाला किया, जिसने दलित-पिछड़े वर्ग के युवाओं के सपनों को रौंद दिया है।
ये युवा बीते 4 साल से संघर्ष कर रहे हैं, नौकरी के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
यही BJP सरकार का दलित-पिछड़ा विरोधी चेहरा है, जो नहीं चाहती कि दलित-पिछड़े वर्ग के युवाओं को नौकरी मिले, उचित हिस्सेदारी और भागीदारी मिले।
लेकिन...
कांग्रेस पार्टी इन युवाओं के साथ खड़ी है और उनकी मांग का पूरा समर्थन करती है। BJP सरकार को तत्काल इस पर संज्ञान लेते हुए युवाओं की मांग पूरी करनी चाहिए।
69000 शिक्षक भर्ती के OBC अभ्यर्थियों के इस दर्द को देखिए।
वे सड़क पर घिसट-घिसटकर के प्रदर्शन कर रहे हैं।
पिछले पाँच सालों से अपने हक की भीख माँग रहे हैं।
मगर उनका वोट लेकर राज कर रही सत्ता अट्टहास कर रही है।
किसी की 5 साल की पीड़ा,
किसी के पाँच साल का मनोरंजन बन चुकी है!!
चिलचिलाती गर्मी में सड़कों पर बैठे #69000_शिक्षक_भर्ती_आरक्षण_घोटाला के अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकार की मांग कर रहे हैं।
लेकिन योगी सरकार दलित-पिछड़े युवाओं को उनका हक देने के बजाय लगातार दमन का रास्ता अपना रही है। कभी इन पर लाठियाँ बरसाई जाती हैं, तो कभी इन्हें 'डिटेन' कराया जाता है।
यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था की रक्षा का सवाल है।
दलित-पिछड़ों का हक़ लूटोगे, तो सड़कें सवाल पूछेंगी।
योगी सरकार बार-बार “सब ठीक है” का प्रचार करती रही, लेकिन 69000 शिक्षक भर्ती का आरक्षण घोटाला उसकी सबसे बड़ी सच्चाई बन चुका है।
6800 दलित-पिछड़े अभ्यर्थियों का हक़ छीनकर सत्ता आखिर किसका भविष्य बना रही है? ये युवा भीख नहीं, संविधान से मिला अधिकार मांग रहे हैं।
लखनऊ की सड़कों पर गूंजती आवाज़ पूछ रही है - जब भर्ती पूरी हुई, तो 6800 नियुक्तियाँ अब तक गायब क्यों हैं?
सामाजिक न्याय पर चुप्पी अब नहीं चलेगी।
#69000_शिक्षक_भर्ती_आरक्षण_घोटाला
संविधान द्वारा दिये गये आरक्षण के अधिकार को मारनेवाली भाजपा का अंहकार आज अंदर-ही-अंदर बहुत ख़ुश होगा कि सदियों से वंचित, शोषित, पीड़ित समाज आज भी उनके वर्चस्व के आगे दंडवत होकर याचना कर रहा है लेकिन अपने प्रभुत्व के घमंड में चूर भाजपाई और उनके संगी-साथी ये भी याद रखें कि जब आग्रह हार जाता है, तब इंसान सीमाएं लांघ जाता है।
@myogioffice@CMOfficeUP@UPGovt आदरणीय मुख्यमंत्री जी जूनियर ऐडेड भर्ती 2021 के प्रधानाध्यापक अभ्यर्थी पॉच वर्ष से मानसिक अवसाद में हैं। आपसे करबद्ध निवेदन है कि प्रबन्धन स्तर के अनुभव प्रमाणपत्र को मान्य कर नियुक्ति प्रक्रिया को संज्ञान में लेकर शीघ्र पूर्ण कराने की कृपा करें।
69000 भर्ती में पीडीए समाज के साथ हुए अन्याय की लड़ाई में जो हमारे साथ नहीं है, अब उन सबके ऊपर से अभ्यर्थियों का विश्वास पूरी तरह से उठ गया है। आंदोलित युवा शक्ति को अब इस संवेदनहीन और हृदयहीन भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। न उनसे जो ‘मुख्य’ होकर भी मुख नहीं खोल रहे हैं और न उनसे जो ‘उप’ हैं पर चुप हैं।
भाजपा के एजेंडे में नौकरी है ही नहीं।
भाजपा जाए तो नौकरी आए!
इटावा के बकेवर इलाके के दान्दरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान कथावाचक और उनके सहायकों की जाति पूछने पर पीडीए की एक जाति बताने पर, कुछ वर्चस्ववादी और प्रभुत्ववादी लोगों ने साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनके बाल कटवाए, नाक रगड़वाई और इलाके की शुद्धि कराई।
हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की अनुमति नहीं देता है, ये व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा से जीवन जीने के मौलिक अधिकार के विरुध्द किया गया अपराध है। सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ़्तारी हो और यथोचित धाराओं में मुक़दमा दर्ज़ किया जाए।
अगर आगामी 3 दिनों में कड़ी कार्रवाई नही हुई तो हम ‘पीडीए के मान-सम्मान की रक्षा’ के एक बड़े आंदोलन का आह्वान कर देंगे।
पीडीए के मान से बढ़कर कुछ नहीं!
प्रयागराज में शिक्षा चयन बोर्ड के सामने बेसिक शिक्षक के अभ्यर्थियों और लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेश भर के शिक्षामित्रों के ‘2 जून को 2 जून की रोटी के संघर्ष’ का प्रदर्शन सच में चिंतनीय है क्योंकि एक तरफ 7 सालों से शिक्षा चयन बोर्ड की बेसिक शिक्षकों की वैकेंसी नहीं आई है और दूसरी तरफ़ शिक्षा मित्रों को मात्र 11 महीने ही वेतन मिलता है और वो भी केवल 10 हज़ार प्रति माह।
शिक्षामित्र जानते हैं कि रोटी को थाली की तरह बजाने से आवाज़ नहीं आती है, इसीलिए वो ‘सोती सरकार’ को जगाने के लिए गुहार-पुकार का भी सहारा ले रहे हैं।
केवल परिवारवाले ही ये जानते हैं कि चंद पैसों में परिवार चलाना कितना मुश्किल होता है। हम हर शिक्षामित्र और उनके परिवार के साथ हैं।
शिक्षक कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
भाजपा को लग रहा है कि हर धरने-महाधरने के पीछे हम हैं, तो इसका मतलब इस तरह समझा जाए कि हर बेरोज़गार और हर पीड़ित, दुखी व अपमानित ‘पीडीए’ के रूप में हमारे साथ है और हम उनके साथ हैं।
जब तक विज्ञापन नहीं, तब तक समापन नहीं!
जो पीड़ित, वो पीडीए!
#97000
#97000_प्राथमिक_शिक्षक_भर्ती
#डीएलएड
#डीएलएड_शिक्षक_भर्ती