बताइए! जो व्यक्ति झारखंड को लूटकर अपने वकीलों की फीस भर रहा हो, वह चंदा कर के इन्साफ मांगने वाले गरीब छात्रों का मज़ाक बना रहा है। हेमंत सोरेन जी अपने गिरेबां में झांकिए और यदि हिम्मत है तो बताइए कि भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने से बचने के लिए आपने रांची से लेकर दिल्ली तक वकीलों की फौज खड़ा करने में कितने करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
हेमंत सोरेन जी, गरीब छात्र आपकी तरह सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए, इसलिए वे चंदा और QR कोड का सहारा ले रहे हैं।
और हाँ, आपने बिल्कुल सही कहा कि चोर पुलिस से एक कदम आगे भागता है, इसलिए आप भी दिल्ली से चप्पल छोड़कर भाग खड़े हुए थे। आपने यह भी बिल्कुल सही कहा कि चोर तकनीक का दुरुपयोग करने की कोशिश करता है, इसलिए जांच एजेंसी के समक्ष आपने भी अपने फोन की जांच कराने से मना कर दिया था।
यदि आपको नेपाल वाली बात अफवाह लग रही है तो बताइए, क्या JSSC-CGL मामले में हाई कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है? जब गड़बड़ी नहीं हुई तो अभी भी 10 छात्रों का रिजल्ट क्यों लंबित रखा गया है? अदालत ने अभी भी जांच जारी रखने का आदेश क्यों दिया है?
युवाओं को तो देर-सबेर न्याय मिल ही जाएगा, लेकिन जिस अहंकार में आप जी रहे हैं उससे तो यही लगता है कि आपको बाकी समय जेल-बेल, कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने में ही बीताना पड़ेगा।
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