युवा मोदी के खिलाफ है।
किसान मोदी के खिलाफ है।
दलित मोदी के खिलाफ है।
आदिवासी मोदी के खिलाफ है।
ओबीसी मोदी के खिलाफ है।
अल्पसंख्यक मोदी के खिलाफ है।
फिर मोदी को वोट दे कौन रहा है?
राज सिंह का यह बयान ‘अगर सीबीआई नहीं आती, तो मेरा एनकाउंटर हो जाता’ मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की एनकाउंटर नीति की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। जब किसी व्यक्ति का बिना जांच के एनकाउंटर कर दिया जाता है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे कानून-व्यवस्था तंत्र की विश्वसनीयता का है।
आज उत्तर प्रदेश में कानून नहीं, बल्कि “पहले गोली, बाद में जांच” की मानसिकता को बढ़ावा दिया गया है। बुलडोजर और एनकाउंटर को न्याय का विकल्प बनाकर संविधान और न्यायपालिका दोनों को कमजोर किया गया है।
इसीलिए उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार आने पर पिछले 8 वर्षों में हुए सभी एनकाउंटरों और बुलडोजर की कार्रवाइयों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘विशेष आयोग’ का गठन किया जाएगा।
#ASP_K_Mission2027
प्रोफेसर लक्ष्मण यादव यादव ने कहां है कि “ तालाब से पानी पीने से रोकने वाला न कोई मुसलमान था, न कोई अंग्रेज़, वह वही हिंदू था, जिसे आज हिंदू राष्ट्र चाहिए.”
अगर UGC कानून सरकार वापस लेती है तो देश के 90 प्रतिशत बहुसंख्यक समाज की हार होगी.
फिर ये साबित हो जाएगा कि देश में सिस्टम सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों ही हाथों में है..
जिस UGC के नए प्रावधान का विरोध सवर्ण कर रहे हैं, दरअसल उसका विरोध तो OBC-SC-ST को करना चाहिए। क्योंकि यह नया प्रावधान तात्कालिक रूप से OBC-SC-ST को कोई लाभ पहुँचाने वाला नहीं है। बल्कि अभी तो इसे और अधिक दुरुस्त और सख़्त किए जाने की ज़रूरत है। आइए समझते हैं—क्यों?
@AmanChopra_ Ugc इतना ही तो कह रहा कोई किसी के साथ गलत नहीं करेगा। क्या अगड़ो को खुद पर भरोसा नहीं की वो कुछ गलत नहीं करेंगे ? अगड़े इतना क्यों डर रहे है ?
यूपी के फतेहपुर में वकीलों ने मोर्चा संभाल लिया है
UGC बिल के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं
ये बहुजनों की नीली क्रांति है यदि ये पूरे देश में फैली तो बहुजन एकता स्थापित हो सकती है।
और इसका फायदा बहुजन समाज को जरूर होगा।
प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार (प्राथमिक विद्यालय सुरहूरपुर, सिरकोनी, जौनपुर) परिवार सर्वे के दौरान एक घर पहुंचे।
उसी घर के व्यक्ति ने खुद गर्मी में प्यास लगने पर गिलास में पानी दिया, दिलीप कुमार ने पी लिया।
लेकिन जैसे ही जाति पता चली, वही 'पंडित जी' भड़क उठे: "तुमने हमारा गिलास कैसे छुआ? पानी पीने की हिम्मत कैसे हुई?"
खुद पानी पिलाया, फिर जाति जानकर अपमान!
ये घिनौनी मनुवादी सोच आज भी जिंदा है – शिक्षक को भी 'अछूत' समझते हैं ऐसे लोग।
ये पुराना वीडियो अब UGC के नए कानूनों के बीच फिर वायरल!