आशुतोष रांका और सौरव दास को पाँच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उससे पहले पूरे दिन और पूरी रात उन्हें पुलिस की हिरासत में रखा गया। सरकार के पास लगता है जेल का डर ही आख़िरी डर बच गया है। जंतर मंतर पर तिरंगा फहराने के सांकेतिक प्रदर्शन से दिल्ली की शांति भंग नहीं हुई थी। दिल्ली पूरे दिन जैसी चलनी थी, उसी तरह से चल रही थी। इनकी वजह से कहीं ट्रैफिक जाम नहीं लगा, जहाँ लगना था, पहले से लगता रहा है। इस तरह की गिरफ्तारी का मतलब है कि सरकार अब यह आज़माना चाहती है कि वह जेल भेजेगी, कोई क्या कर लेगा। उमर ख़ालिद की तरह अब जेन ज़ी युवाओं को सबक सिखाया जा रहा है। बिना ट्रायल के छह साल से भी अधिक समय तक जेल में डालने की शुरूआत हो गई है। लेकिन इन युवाओं ने भी हर बार कहा है कि उन्हें जेल का डर नहीं लगता है। लेकिन बात उनके डरने की नहीं है, सरकार को जेल के डर के अलावा कुछ आता नहीं। यह सौरव और आशुतोष की गिरफ्तारी नहीं है, उस जेन ज़ी को डराने की घोषणा है जिसके लिए रात ग्यारह बजे जागने की कोशिश उसी वक्त फेल हो गई थी। सरकार सभी आंदोलनों को एक साथ एक जगह जमा होने का रास्ता बना रही है।
इतना सब करने के बजाए बैक डोर से जल्दी जल्दी वोटर का नाम जोड़ने में लगी सरकार को समझना चाहिए कि वोट चोरी की करतूत पर बजाज का बल्ब जल गया था। बल्ब की रौशनी में रज़ाई के नीचे कहानी पढ़ने वाला बच्चा जेन ज़ी बन गया है। बहुत दुखद है ।
Narendra Modi is the Patriarch-in-Chief of this country. The sexism and misogyny of this regime flow from the very top.
Sanghi men accused of assaulting and molesting students and women walk out on bail, shielded by weak FIRs and the political patronage of the RSS-BJP.
And then we wonder why India has a rape culture.
This is the reality behind Modi’s grandstanding on women’s empowerment.
देश की संवैधानिक संस्थाएं अपनी साख खो चुकी है। सबसे पहले इन तानाशाहों ने जाँच एजेंसियों की विश्वसनीयता को ख़त्म किया और अब चुनाव आयोग तो उनसे भी दस कदम आगे निकल लोकतंत्र का ही हत्यारा बन गया। ज्ञानेश जैसे लोगों ने जनविश्वास और लोक आस्था का क़त्ल किया है।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के इशारे पर ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को कुचलने का काम किया है। ज्ञानेश कुमार ने एक कठपुतली की तरह काम किया है, उसके लिए उसे सजा जरूर मिलेगी। ये लोग बच नहीं पाएंगे।
यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या पार्टी की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और हर नागरिक के अधिकारों की है। INDIA गठबंधन के सभी दल लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट हैं। लोकतंत्र बचाने के लिए हम कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार है।
नेता विपक्ष राहुल गाँधी के एक आह्वान पर दिल्ली हैंग हो गई,
तीन लाख लोग राहुल गाँधी के साथ लोकतंत्र और वोट की रक्षा के लिए राजधानी में कदमताल करते दिखे,
जिन्हें ना पुलिस का डर था ना अराजक गुंडों का खौफ़,
अनुशासन में प्रदर्शन कैसे किया जाता है
ये आज देश ने देखा,
राहुल गाँधी ने आज बता दिया
ना संसद आवारा होगी
ना सड़कें खामोश होंगी,
'वोट चोरी' के खिलाफ आवाज उठाने पर अमित शाह की पुलिस ने @nsui की छात्राओं की बर्बरता से पिटाई की।
हिरासत में लेने के बाद पिटाई करते हुए थाने ले गए और वहां बेल्ट और पट्टों से मारा गया।
इस मामले में दोषी महिला कांस्टेबल पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
और दिल्ली पुलिस याद रखे - हम ये भूलेंगे नहीं. मोदी सरकार के इशारे पर की गई इस बर्बरता का हिसाब होगा।
चतुर्थ चरण के विद्यालय अध्यापक भर्ती परीक्षा (TRE-4.0) के तहत शिक्षा विभाग, बिहार के अन्तर्गत विद्यालय अध्यापक के कुल 33,320 रिक्त पदों पर नियुक्ति से संबंधित अभ्यर्थियों को सूचित किया जाता है कि D.El.Ed प्रशिक्षण सत्र 2024-2026, परीक्षा वर्ष, 2026 के उत्तीर्ण अभ्यर्थी अपने अंक पत्र की Web Copy अपलोड करते हुए अपना ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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If memory serves me correctly. This is also a chowk where you can get cold cucumber with chaat masala and many buses that will scream “Neeoda neeoda neeeoda neeeoda”. Just saying.