हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहां हर चीज को आंकड़ों में बदल दिया जाता है. जिंदगी कितनी है, मौत कितनी हुई और कितनी उम्मीद बची है, सब कुछ संख्याओं में सिमट गया है. एक ऐसा दौर है जहां इंसान की पहचान भी कभी-कभी सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है. इन आंकड़ों के बीच इंसान का दर्द, उसकी कहानी और उसकी आवाज अक्सर कहीं खो जाती है. इसी दौर में एक कवि ने ऐसी रचनाएं लिखीं जो हमें सोचने पर मजबूर करती हैं और हमारी संवेदनाओं को झकझोर देती हैं. वे थे कुंवर नारायण. आज साहित्य तक पर Poetry On Loop के इस एपिसोड में सुनिए कुंवर नारायण की कविता ‘आंकड़ों की बीमारी’. यह कविता हमें याद दिलाती है कि हम आंकड़ों नहीं, इंसान हैं.
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जातिगत भेदभाव सिर्फ एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि हमारे देश की एक कड़वी हकीकत रही है. एक ऐसा समय भी था जब केवल किसी एक समुदाय में जन्म लेने भर से इनसान बड़ा-छोटा, छूत-अछूत हो जाता था. उस जमाने में जिन्हें कथित तौर पर नीची जाति कहा जाता था, उनमें जन्म लेने वाले लोगों के लिए जिंदगी न तो आसान थी और न ही सम्मानजनक. उसी दौर में एक कवि ने कुछ ऐसी रचनाएं लिखीं जो दिल को तोड़ देने वाली होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी हैं. वे थे अदम गोंडवी, एक अद्भुत कवि. आज साहित्य तक पर Poetry On Loop के इस एपिसोड में सुनिए अदम गोंडवी की कविता ‘चमारों की गली’. यह कविता जाति प्रथा का कड़वा सच सामने लाती है, एक ऐसा सच जिससे हम अक्सर नजरें चुरा लेते हैं.
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हे @TataCompanies आप क्या केवल @bigbasket_com में मालिकाना हक रखते हैं या आपको अपने नाम की भी चिंता है? कल कुछ सामान मंगाए, उसमें से एक की डिलिवरी नहीं हुई, पर ऐप पर डिलिवर्ड दिखा रहा. सुबह से चार बार कंप्लेन किया. हर बार 30 मिनट में काल की बात कही गई, पर हुआ कुछ नहीं. शर्मनाक
Some glimpses from the inauguration ceremony of Jashn-e-Hindustan, graced by Prabin Upadhyay, Founder of Kalatmak Foundation; Abhijeet Sinha, Director of Tez Delhi; Vikas Singh Rajpoot; and Dr. Prabhanshu Ojha, Professor of Hansraj College.
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केदारनाथ सिंह कहते हैं "मेरे युग का मुहावरा है
‘फ़र्क़ नहीं पड़ता’।" आज भी ये बात कितनी सटीक बैठती है! लेकिन याद रहे माननीय @AAPDelhi@AtishiAAP@ArvindKejriwal "हक़ों की ये हिफाज़त जानती हैं
नई नस्लें बग़ावत जानती हैं" ~ अक्स समस्तीपुरी
#ReleaseMCMScholarshipNow
पिछले महीने #ReleaseMCMScholarshipNow हैशटैग से काफ़ी ट्वीट देखने को मिलें। बच्चे परेशान हैं लेकिन दिल्ली सरकार को फ़र्क नहीं पड़ता! शायद वो अब भी शिक्षा को अपनी तुच्छ राजनीति से जोड़कर बच्चों के भविष्य के साथ षड्यंत्र रच रही है।
@govinda51140842 मूर्ख हो तुम, राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। इन सब ने भगवान राम की इसीलिए मदद करी क्योंकि वे उनके रूप से अवगत हो चुके थे। पहले राम के चरित्र को जान लो उसके बाद उनके बारे में कुछ कहना, बिना कुछ जाने प्रपंच करना आसान है!
राम जी पवित्र हैं इस वजह से संसार की हर शक्ति ने उनका साथ दिया।