कल जंतर-मंतर पर एक बार फिर इरफ़ान से मुलाक़ात हुई. वो वैसा ही था जैसा पहली बार मिला. जंतर मंतर के बाहर दरी बिछाए आंदोलन पर बैठा था. 20 जुलाई की लाठीचार्ज में पुलिस ने उसपर भी लाठियां भांजी. इरफान बताते हैं कि पुलिस ने उनका सिर पैर में फंसा कर मारा. कुर्ता फट गया. चप्पल खो गए. इरफान के पांव में चप्पल नहीं थे. उसे चप्पल भिजवा दिए हैं. लेकिन इरफान के चहरे पर वो मुस्कान थी जो उसे बाकियों से उसे अलग बनाती है. हर बार इरफान से मिलकर अपनी परेशानियां भूल जाता हूं. सोचता हूं ये इतना परेशान होकर भी मुस्कुराता है और हमारे हिस्से तो भगवान ने फिर भी बहुत कुछ दिया है.
इरफ़ान की कहानी लाचारी की नहीं हिम्मत की है.
अपने संस्थान @thelallantop का बहुत शुक्रगुज़ार हूं कि वो हमें इरफ़ान जैसी कहानियों तक जाने का मौक़ा देते हैं.
#cjp #jantarmantar #lathicharge
"जब अभिजीत दिपके ने कहा, मुझे पीटो तो हम रोने लगे.. मैंने कहा मुझे भी पिटना चाहिए.. मेरे शरीर की मांसपेशियां मेरी आत्मा से लड़ने लग गईं.. कैसे खड़े हो!! कैसे बैठे हो झुग्गी के अंदर.. चलो यार, पिटाई खाएंगे दिल्ली पुलिस की.. मैं जंतर-मंतर भागा.."
जंतर-मंतर पर युवाओं का आंदोलन भले खत्म हो गया हो लेकिन उसके निशान हमेशा जिंदा रहेंगे..
और दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले मोहम्मद इरफान की ये बातें युवाओं के दिल और दिमाग में हमेशा गूंजती रहेंगी..
मोहम्मद इरफान बता रहा है कि वो स्कूल नहीं गया.. पढ़ाई नहीं की.. जो कुछ सीखा इसी समाज से सीखा है..
इरफान की बातें बड़ी गहरी हैं.. भीतर तक चोट करती हैं.. सोचने को मजबूर करती हैं..
इरफान कह रहा है, नये-नवेले कमिश्नर आए हैं.. बड़े जोश में हैं.. बहुत बड़ी व्यवस्था और ताकत और धन बल है, मारेंगे.. चलो मार खाएंगे.. ये लोकतंत्र का रास्ता नहीं है.. लोकतंत्र में संवाद होना चाहिए.. कोई आपसे सहमत हो या न हो!! दोनों के लिए.. चलिए बात करते हैं.. कुछ गलतफहमी है तो उसे दूर करते हैं.. इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन किसी को अपमानित करना!! आये, उठाया, कपड़ा ढका.. ले गए.. और मीडिया ने खबर चला दी, वांगचुक को उठा लिया.. आतंकवादी था!! बदमाश था!! गुंडा था!! बदमाश था!! क्या था?? इस देश का महान पर्यावरण एक्टिविस्ट था.. शिक्षाविद था.. सम्मानित नागरिक था.. कितने आविष्कार किया भारतीय सेना के लिए, देश के लिए, महान साइंटिस्ट था.. उठा लिया.. उठा लिया.. उठा लिया.. जिस आंदोलन से, तमाम आंदोलन से हमारी आत्मा जुड़ जाती है.. हम जन संघर्ष से पैदा हुए लोग हैं.. स्कूल और किताबों का ज्ञान नहीं है हमारे पास.. जो बोल रहे हैं, वो जीवन से जुड़ा हुआ है.. आत्मा रो पड़ी जब हम उस लाइन को पढ़ते हैं.. पीपल आफ इंडिया.. हम भारत के लोग.. भारत को संपन्न, प्रभुत्वसंपन्न समाज, धर्मनिरपेक्ष राज्य बनाने के लिए सदा.........
इरफान की बातें काफी लंबी हैं लेकिन इतना जरूर है जंतर-मंतर पर युवाओं के प्रोटेस्ट ने देश को जेनज़ी की खुली सोच से रूबरू कराया है..
"When Abhijeet Dipke said, 'Beat me,' I started crying. I said, 'I should be beaten too.' My muscles started fighting my soul. How are you standing? How are you sitting inside this slum? Come on, friend, let the Delhi Police beat you up. I ran to Jantar Mantar."
The youth protest at Jantar Mantar may have ended, but its scars will live on forever.
And these words of Mohammad Irfan, a Delhi slum dweller, will forever resonate in the hearts and minds of the youth.
Mohammad Irfan is telling that he did not go to school, did not study, whatever he learned, he learned from this society.
Irfan's words are very deep, they hurt deeply, they force one to think.
Irfan is saying, the new commissioner has come.. he is very enthusiastic.. he has a huge system and power and financial strength, they will kill.. let's get killed.. this is not the way of democracy.. there should be dialogue in democracy.. whether someone agrees with you or not!! for both.. let's talk.. if there is some misunderstanding then let's clear it.. there is nothing wrong in it but insulting someone!! they came, picked him up, covered him with a cloth.. took him away.. and the media ran the news, Wangchuk was picked up.. he was a terrorist!! he was a scoundrel!! he was a goon!! he was a scoundrel!! what was he??
He was a great environmental activist of this country.. he was an educationist.. he was a respected citizen.. he made so many inventions for the Indian Army, for the country, he was a great scientist.. he took it up.. he took it up.. he took it up.. our soul gets connected to the movement, to all the movements.. we are people born out of the people's struggle.. we do not have the knowledge of school and books.. what he is saying is connected to life.. the soul cried when we read that line.. People of India.. we the people of India.. always to make India a prosperous, sovereign society, a secular state.........
Irfan's words are quite long but it is certain that the youth protest at Jantar Mantar has introduced the country to the open-mindedness of Jenzi.
#JantarMantar #Delhi #Protest #Youth #Slums #Irfan #Talent
इसे सुना जाना चाहिए और हर किसी के साथ शेयर भी किया जाना चाहिए ,
हमारे देश का युवा बांग्लादेश और नेपाल की तरह तो बिल्कुल भी नहीं है ,
रही इस देश की बात तो ये देश भगत सिंह और गांधी का है कोई एक बाल बांका भी नहीं कर सकता।
सभी पूछ रहे हैं ये कौन हैं?
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं। साफ़गोई के साथ अपनी बात रख रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना ऐसे सुना रहे हैं जैसे किसी गीत की तरह याद कर रखा हो। लोकतंत्र में व्यक्ति ही गरिमा की अहमियत बता रहे हैं। सोनम वांगचुक के साथ बदसलूकी पर ख़फ़ा हैं
This young man is an uncut diamond that deserves a future.
The Cockroach Janata Party should enlist diamonds like him as members if they really want to go far with their movement and change India’s destiny.
If not, some rich NGO or a corporate CSR department should rehabilitate him by providing an interest-free loan and helping him set up a small business.
His name is Mohammad Irfan. He lives in a broken 12 sq yd 1-room slum (with tarpaulin roof) with his parents and two sisters in Delhi’s Laxmi Nagar.
For his livelihood, along with his father, he sells ice slabs as a roadside vendor.
He cannot write, he never went to school, and all his education is acquired by asking questions to Google several hours a day.
From the Preamble to the Indian Constitution (Hindi version) to Urdu Shayar Ahmed Faraz and Kavi Gopal Das Neeraj’s poetry to legal rights of workers and minimum wage & hour laws in India, his knowledge is 10x more than the average brainwashed WhatsApp University uncles of India.
In the video, Irfan emphasizes on “garima” (dignity). The Preamble to the Constitution explicitly states: “assuring the dignity of the individual,” irrespective of their caste, religion, education, or economic status.
Irfan was discovered by The Lallantop’s brilliant journalist Rajat Pandey @RajatpandeyJF during recent student protests at Jantar Mantar. That’s real journalism India needs instead of the shameless mainstream media that is digging India’s grave.
Rajat can provide the phone number and address of Irfan to anyone interested in supporting him.
Spare 20 minutes of your time this Sunday to watch this YouTube video:
https://t.co/fDFk8umLMb
इरफान से मिलना मुझे हमेशा याद रहेगा. मैं उसके बारे में बहुत कुछ तो नहीं जा पाया लेकिन जो जाना शायद वो भी बहुत था. वो एक छोटे से कमरे में रहता है. जिसमें छत नहीं है. तिरपाल है जो बारिश में उड़ जाता है. घर में पानी भरने लगता. वो पिता के साथ इसी कमरे के बाहर बर्फ बेचता है. कोई ख़ास कमाई नहीं होती. पढ़ा-लिखा नहीं है. लेकिन बोलने का शौक़ है. यूट्यूब और गूगल ही उसकी जिज्ञासा को शांत करने का टूल है. वो गूगल से सवाल पूछता. गूगल जवाब देता. यूट्यूब पर कवियों को सुनता है. उनकी रचनाओं को याद कर लेता. उसकी 2 बहने हैं. जिनकी शादी अभी होनी है. कहता है भैया लड़के वाले दहेज मांगते हैं. बताइए कैसे दे दें. इरफान ने ख़ुद शादी नहीं की. तमाम परेशानियों से जूझ रहा है. फिर भी मुस्कुराता है. उसकी मुस्कान मानो सत्ताधीशों पर तंज कस रही. वो आंदोलनों में जाता है. श्रमिकों के मुद्दे उठाता है. बेबाक़ी के अपनी बात रखता है. और कहता है ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पर यक़ीन कर. इरफान उम्मीद की बात करता है. उसके स्लम के लोग नशे से जूझ रहे हैं. कई परिवारों के बच्चे नशे की भेंट चढ़ गए. कैमरे की अपनी सीमाएं हैं. लेकिन आंखों ने जो देखा वो हमेशा के लिए रह जाएगा.
दिल करे तो रिपोर्ट देखिएगा-
https://t.co/GlXlTL4l9k
सराकर! हमारे देश के बच्चे सड़क पर सो रहे हैं 💔
मार देख लिया, Meme देख लिया। ये भी देखिए हमारे देश के बच्चे सड़कों पर सो रहे हैं। डिवाइडर पर एक करवट कुल्हा टिकाए नौजवान सिर्फ इसलिए लेटे हैं क्योंकि एजुकेशन सिस्टम को सीधा खड़ा कर सकें।
हमने बिना कंसर्न के तस्वीरें खींचीं,अपराधबोध है। इनके माँ बाप देखेंगे तो पीड़ा होगी। मगर सच दिखाना ज़रूरी है
TV Media इस बात का जश्न मना रहा है कि PM Modi की Reel पर 300M Views हैं, इन बच्चों की पीड़ा नहीं दिख रही है? हम रात-रात जग कर ये तस्वीरें इसलिए दिखा रहे हैं ताकि सरकार को इनकी तकलीफ समझ आ जाए। गरीब परिवार के इन बच्चों के पास रहने का ठिकाना नहीं है,मगर ज़िद है कि शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफ़े के बिना जाना नहीं है। हिंदुस्तान का भविष्य सड़क पर सो रहा है,क्या वर्तमान की सरकार जाग रही है?
Pic- @Abhinav_Pan
पुलिस की मार देख ली,Meme देख लिया। ये भी देखिए हमारे देश के बच्चे सड़कों पर सो रहे हैं। डिवाइडर पर एक करवट कुल्हा टिकाए नौजवान सिर्फ इसलिए लेटे हैं क्योंकि एजुकेशन सिस्टम को सीधा खड़ा कर सकें। TV Media इस बात का जश्न मना रहा है कि PM Modi की Reel पर 300M Views हैं, इन बच्चों की पीड़ा नहीं दिख रही है? हम रात-रात जग कर ये तस्वीरें इसलिए दिखा रहे हैं ताकि सरकार को इनकी तकलीफ समझ आ जाए। गरीब परिवार के इन Gen-Z बच्चों के पास रहने का ठिकाना नहीं है,मगर ज़िद है कि शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफ़े के बिना जाना नहीं है। हिंदुस्तान का भविष्य सड़क पर सो रहा है,क्या वर्तमान की सरकार जाग रही है? @narendramodi
@TheNewspinch@grok इस पर विस्तार से बताओ -
1.शंकराचार्य कौन है?
2.हिन्दू धर्म के धार्मिक गुरुओं और संतों मे उनका क्या स्थान एवं मह्त्व है?
3.उनका चुनाव किस प्रकार और किस योग्यता के तहत किया जाता है?
4.वर्तमान मे जो 4 शंकराचार्य है वे कौन है? उनका चुनाव कब हुआ?
जूनियर अकाउंटेंट, सूचना सहायक 2024, LDC 2024, राजस्थान पुलिस कांस्टेबल, लाइब्रेरियन भर्ती 2024, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती 2025, पटवार व VDO 2024 इन भर्तियों में भी OMR का खेला हुआ है।
इनकी कट ऑफ तुरंत अचानक बड़ी इन परीक्षा से जस्ट पहले की परीक्षाओं के पेपर लीक थे तब कट ऑफ कम जाती थी।
◾Note : फाइनल में चयनित अभ्यर्थियों की OMR की Forensic जांच से यह खुलासा आराम से हो सकता है।
कैसी होती है तरुणाई
युवावस्था का प्रकाश - पुरुषार्थ
युवक का स्थाई भाव - महत्वाकांक्षा
तरुण के जीवन संगीत का सबसे ऊंचा स्वर- निर्भयता
युवावस्था की आत्मा - अभिमान
यौवन का अलंकार - उदारता
~मृत्युंजय
#yauvan#youth