अंग्रेज़ी बाँध नहीं, पुल है।
अंग्रेज़ी शर्म नहीं, शक्ति है।
अंग्रेज़ी ज़ंजीर नहीं - ज़ंजीरें तोड़ने का औज़ार है।
BJP-RSS नहीं चाहते कि भारत का ग़रीब बच्चा अ���ग्रेज़ी सीखे - क्योंकि वो नहीं चाहते कि आप सवाल पूछें, आगे बढ़ें, बराबरी करें।
आज की दुनिया में, अंग्रेज़ी उतनी ही ज़रूरी है जितनी आपकी मातृभाषा - क्योंकि यही रोज़गार दिलाएगी, आत्मविश्वास बढ़ाएगी।
भारत की हर भाषा में आत्मा है, संस्कृति है, ज्ञान है। हमें उन्हें संजोना है - और साथ ही हर बच्चे को अंग्रेज़ी सिखानी है।
यही रास्ता है एक ऐस�� भारत का, जो दुनिया से मुकाबला करे, जो हर बच्चे को बराबरी का मौका दे।
The US President threatens us. With his absurd rhetoric, he demands that the Iranian people surrender to him.
They should make threats against those who are afraid of being threatened. The Iranian nation isn’t frightened by such threats.
देश की अर्थव्यवस्था चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में GDP वृद्धि दर 6.5% रही। कोरोना काल के बाद यह सबसे सुस्त रफ्तार है।
भाजपा सरकार आर्थिक मोर्चे पर लगातार असफल हो रही है। देश भर में उद्योग-धंधे सिमट रहे हैं। औद्योगिक उत्पादन आठ मही��े के निचले स्तर पर है।
पूरे देश में भयंकर बेरोजगारी है। नई नौकरियां पैदा नहीं हो रहीं। लोगों की आय घट रही है, आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ रही है, इसलिए मांग और खपत भी घट रही है।
तेज आर्थिक प्रगति के बगैर विकसित भारत की बातें हवा-हवाई हैं।
आगरा के एक अस्पताल में महात्मा बुद्ध और बाबासाहेब अंबेडकर जी चित्रित टाइल्स को फर्श पर लगाना एक ऐसा अपमानजनक कुकृत्य है जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। कभी बाबासाहेब निर्मित संविधान बदलने की साज़िश, कभी मप्र में कोर्ट परिसर में उनकी मूर्ति लगाने का विरोध और कभी ज़मीनी टाइल्स पर उनका चित्रण एक सोची-समझी चाल है, जिसके पीछे प्रभुत्ववादियों का कौन सा ग���ट काम कर रहा है कहने की आवश्यकता नहीं है।
जैसे-जैसे पीडीए की चेतना बढ़ रही है, वैसे-वैसे पीडीए के प्रेरणास्रोत प्रतीकों व महापुरुषों पर और साथ ही पीडीए समाज पर वर्चस्ववादियों के शारीरिक-मानसिक प्रहार भी बढ़ रहे हैं। ऐसे सुनियोजित अपमान करके जिनको लग रहा है कि पीडीए का मनोबल टूटेगा वो ऐतिहासिक भूल कर रहे हैं। प्रताड़ना का प्रतिकार शक्ति बन कर उभरता है। उत्पीड़न की भी एक सीमा होती और उत्पीड़क की भी। अब भाजपा वो सीमा लाँघ चुकी है और अपने पतन को देखते हुए ऐसे कुत्सित-कृत्यों से पीडीए की हिम्मत और एकजुटता को तोड़ने का अंतिम प्रयास कर रही है, जिसमें अब वो कभी सफल नहीं होगी।
मोदी जी, खोखले भाषण देना बंद कीजिए।
सिर्फ इतना बताइए:
1. आतंकवाद पर आपने पाकिस्तान की बात पर भरोसा क्यों किया?
2. ट्रंप के सामने झुककर आपने भारत के हितों की कुर्बानी क्यों दी?
3. आपका ख़ून सिर्फ़ कैमरों के सामने ही क्यों गरम होता है?
आपने भारत के सम्मान से समझौता कर लिया!
लगता है सिंधिया जी के उसूलों पर आंच आ गई है, तभी मप्��� की भाजपा सरकार को "भ्रष्टाचार" का प्रमाण पत्र दे रहे हैं!
ये वीडियो गौर से सुनिए,
@DrMohanYadav51 जी.
@JM_Scindia | @narendramodi
मुख्यमंत्री जी,
आज इंदौर में आपकी कैबिनेट मीटिंग हो रही है! इंदौर का नागरिक होने के नाते मैं आपका स्वागत करता हूं! मैं इंदौर की जनता के तरफ से कुछ सवाल भी पूछ रहा हूं! इस विश्वास के साथ की नैतिक रूप से भी आप इनका जवाब जरूर देंगे!
📍इंदौर
√ कैबिनेट मीटिंग
√ @DrMohanYadav51
EAM Jaishankar’s silence isn’t just telling — it’s damning.
So I’ll ask again: How many Indian aircraft did we lose because Pakistan knew?
This wasn’t a lapse. It was a crime. And the nation deserves the truth.
मैं 'चंद्रशेखर आजाद' आज ये संकल्प लेता हूं,जब तक 'बाबा साहब अंबेड़कर' के अपमान का सूत समेत बदला नहीं ले लेता तब तक चैन से नहीं बैठूंगा।
-नगीना सांसद,चंद्रशेखर आजाद।
#BhimArmyChief
राजवाड़ा जैसे भीड़भाड़ वाले व्यापारिक इलाके में कैबिनेट बैठक करना और उसके लिए पूरे इलाके को सील कर देना, दुकानें बंद करवा देना, क्या यही है जनता के हित में फैसला लेने का तरी��ा?
जहां रोज़ाना हज़ारों लोग रोज़ी-रोटी कमाते हैं, वहां सरकार ने एक बैठक के लिए सबकुछ बंद करवा दिया।
ये कैसी सरकार जो जनता की रोजी रोटी बंद करवाकर बैठक कर रही है?
क्या भाजपा सिर्फ अपने इवेंट मैनेजमेंट को प्राथमिकता दे रही है?
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#जनविरोधीसरकार #Indore #indorecity #MadhyaPradesh
@IndoreCollector @comindore @DrMohanYadav51 @KailashOnline
कर्नाटक में चुनाव के वक्त हमने 5 गारंटी दी थीं, लेकिन आज 6 पूरी की हैं। एक लाख से ज़्यादा परिवारों को उनकी ज़मीन का मालिकाना हक़ दिया गया है।
यह कर्नाटक के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण गारंटी है, जिस��े करोड़ों परिवारों को, खासकर गरीबों, दलितों और आदिवासियों को, सीधा फायदा होगा।
हम चाहते हैं कि जिसके पास भी ज़मीन हो, उसे उसका मालिकाना हक़ मिले, क्योंकि यह हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है।
मोदी जी तो लगातार फ़िल्मों को प्रमोट करते हैं
घटिया, नफ़रती फ़िल्मों के बारे में ट्वीट करते हैं, लोगों से पिक्चर देखने की अपील करते हैं
लेकिन इतने बड़े समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जी के जीवन, उनके संघर्षों और आदर्श पर बनी फ़िल्म ‘फुले’ के बारे में एक शब्द नहीं बोले
शायद शिक्षा, और सामाजिक न्याय उनके लिए रोचक विषय नहीं हैं
वहीं, राहुल गांधी जी ने बिहार मे�� इस फ़िल्म को सामाजिक न्याय इन्फ्लुएंसर्स के साथ देखा - क्योंकि उनके लिए शिक्षा, समता जैसे मुद्दे ज़रूरी हैं - वो इन्हीं मुद्दों की लड़ाई लड़ रहे हैं