@indiejohncarter@jeevanyatraa ये एप्लीकेशन थी और उसके बाद जनसुनवाई वाला पुलिस SHO ने अपने साइड से कहानी बना के मामला खत्म कर दिया कि साजिश है मकान मालिक की ही, ऐसा प्रतीत होता है।
और मेरे से बोले SHO साहब अब फिर से जन सुनवाई पर डाला तो तुझे अंदर करूंगा।
मैं एक IPS अधिकारी के हाथों सिर्फ इसलिए थप्पड़ खा चुका हूँ क्योंकि मेरे सवालों ने उनके अहं को ठेस पहुँचा दी थी।
मेरे साथ ₹4 लाख की धोखाधड़ी हुई। मैं न्याय की उम्मीद लेकर गया था, लेकिन मुझे न्याय नहीं मिला। न मेरी बात सुनी गई, न मेरी पीड़ा।
समाज का क्या है?
वह तो रानो का विवाह उसके देवर मंगल से भी करवा देता है, जिसे उसने बचपन में अपनी गोद में खिलाकर बड़ा किया था।
(एक चादर मैली सी - राजिंदर सिंह बेदी - 1965)
और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति पर हमारे पैसे लेकर फरार होने का आरोप है, वह आज भी खुलेआम इंस्टाग्राम चला रहा है।
उस दिन समझ आया कि किताबों में लिखा कानून और ज़मीन पर मिलने वाला न्याय, कई बार एक-दूसरे से बहुत अलग होते हैं।
मेरे साथ ₹4 लाख की धोखाधड़ी हुई थी। न्याय की उम्मीद लेकर पुलिस के पास गया था, लेकिन SHO ने मेरे ही खिलाफ लिख दिया कि "माँ और बेटे की ही साज़िश है।"
उस दिन के बाद हमने कभी पुलिस का दरवाज़ा नहीं खटखटाया।
भटको बेबात कहीं,
लौटोगे अपनी हर यात्रा के बाद यहीं!
जाओ, जितना चाहो संसार देखो। जितने विचार, दर्शन, रिश्ते, उपलब्धियाँ आज़मा लो। लेकिन अंत में तुम, अपने स्वयं के पास ही लौटोगे!
There is no exploitation in the world. There is no problem. There are only delusions. Whatever a person has been conditioned to believe since birth fuels their likes and dislikes.
I'm just an educational entertainer nothing more. No master. No guru. No inspiration. I no longer see problems. Life moves from perfection to perfection. Every being, every object, every event is already complete. Nothing and no one needs to be improved.
Destiny is true, and actions are true too but only in the illusion. The illusion is false. Therefore, everything is attainable, but there is no bliss. Bliss is found only by becoming free from the illusion.
प्लेटो के दर्शन का सार ग्यारह सूत्रों में
1. सत्य Objective है, Relative नहीं।
2. ज्ञान इंद्रियों से नहीं, बुद्धि से मिलता है।
3. भौतिक संसार अपूर्ण प्रतिलिपि है।
4. ज्ञान = सत्य + विश्वास + तर्क।
5. वास्तविकता का सर्वोच्च स्तर Forms हैं।
6. सबसे ऊँचा Form = Form of the Good।
7. मनुष्य की आत्मा तीन भागों की है-Reason, Spirit, Appetite।
8. न्याय = आत्मा का आंतरिक संतुलन।
9. आदर्श राज्य वही है जहाँ दार्शनिक शासन करें।
10. दर्शन का उद्देश्य गुफा (अज्ञान) से बाहर निकलना है।
11. मनुष्य का अंतिम लक्ष्य सत्य, अच्छाई और ज्ञान की ओर उठना है।