जोधपुर
16 अप्रैल को जयपुर बनेगा पत्रकारों की आवाज़ का केंद्र!
जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को ही दबाया जाएगा, तो कलमकार सड़क पर उतरेंगे।
गूंगी-बहरी सरकार को जगाने का समय आ गया है।
#Justice_for_Journalists#पत्रकारों_का_महाआंदोलन
जोधपुर
16 अप्रैल को जयपुर बनेगा पत्रकारों की आवाज़ का केंद्र!
जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को ही दबाया जाएगा, तो कलमकार सड़क पर उतरेंगे।
गूंगी-बहरी सरकार को जगाने का समय आ गया है।
#Justice_for_Journalists#पत्रकारों_का_महाआंदोलन
कलम पर प्रहार अब बर्दाश्त नहीं!
राजस्थान की आवाज़ को दबाने की हर कोशिश का मिलेगा करारा जवाब। कुंभकर्णीय नींद में सोई सरकार को जगाने के लिए 16 अप्रैल को जयपुर बनेगा संघर्ष का केंद्र!
अब आर-पार की लड़ाई तय है।
#Justice_want_Journalists#पत्रकारों_का_महाआंदोलन@BJP4India@INCIndia
आज धरने का पाँचवाँ दिन है— और लोकतंत्र की “सबसे मज़बूत चौथी कड़ी” आज सड़क पर बैठी है, क्योंकि बाकी तीनों कड़ियाँ शायद “मीटिंग में व्यस्त” हैं।
यहाँ न कोई सत्ता पलटने की साजिश है, न कोई जमीन कब्जाने का प्लान, न कोई हिस्सेदारी का झगड़ा— बस पत्रकार बैठे हैं… हाँ, वही पत्रकार जिनसे हर नेता माइक छीनकर कहता है— “देश जानना चाहता है…”
आज वही देश जानना चाहता है कि जब पत्रकार ही पूछ रहे हों—तो जवाब कौन देगा?
कमाल की बात देखिए— जब किसान बैठता है तो राजनीति जाग जाती है, जब छात्र बैठता है तो बहस शुरू हो जाती है, लेकिन जब पत्रकार बैठता है… तो सन्नाटा भी प्रेस रिलीज़ जारी नहीं करता।
शायद इसलिए क्योंकि पत्रकारों के सवालों से बचने की ट्रेनिंग तो सालों से ली गई है, पर पत्रकारों के धरने का सिलेबस अभी तक बना नहीं।
और ये कैसी विडंबना है— जो लोग रोज़ “तथ्य” पर बहस करते हैं, आज उन्हें अपने हक़ के लिए “ध्यान आकर्षित” करना पड़ रहा है।
क्या इतना भी मुश्किल है कि कोई नेता, कोई अधिकारी, कोई जिम्मेदार शख्स अपनी व्यस्त “फोटो-ऑप” वाली दिनचर्या से 10 मिनट निकालकर इनसे मिल ले?
या फिर अब मिलने का भी “ट्रेंड” बनाना पड़ेगा? #JournalistsOnStrike लिखकर?
सच तो ये है— ये धरना सिर्फ पत्रकारों का नहीं है, ये उस सिस्टम के खिलाफ़ मूक आरोप है जो सवाल सुनने से पहले ही “माइक म्यूट” कर देता है।
और ध्यान रहे— जब पत्रकार सड़क पर बैठता है, तो खबरें सिर्फ रुकती नहीं… सच धीरे-धीरे दम तोड़ने लगता है।
जैसलमेर जिला कलेक्टर द्वारा पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए हठधर्मिता से की जा रही कार्रवाई अत्यंत निंदनीय और चिंताजनक है। यह कदम न केवल स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने का प्रयास है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने की दिशा में एक गंभीर और खतरनाक संकेत भी है।
ये नजारा है जोधपुर शहर का जहाँ इंसानो को इस तरह से भरा जा रहा जैसे भेड़ बकरी,अभी चिता की राख़ ठंडी भी नहीं हुई ऊस से पहले ऐसी तशवीर देखना मेरे लिए पीड़ा दायक था पत्रकारिता से जरूरी मनवता एवम सक्रियता जरूरी थी बस वो निभाई और खाली.करवाया पिक जीप मे भरे जावन बच्चों को
*अनिता हत्याकांड में रात को 3:00 बजे पुलिस कमिश्नर राजेन्द्र सिंह व ओसियां विधायक भैराराम सियोल पहुँचे धरना स्थल, सभी मांगो पर बनी सहमति , जिसकी सुबह 10 बजे आधिकारिक तौर पर होंगी घोषणा*