@talk2anuradha एकदम मोहतरमा, बिल्कुल अपनी मांग पर टिके रहिये।
कब तक बिना मेहनत के, दूसरे के रहमों करम पर टीके रहेंगे।
किसी ऐसी पार्टी को वोट मत करना जो आरक्षण खत्म करने पर राजी ना हो
शिवम दलित समाज से आते है, इनकी बातों को सुनिये। MP से ये जंतर मंतर आये थे। ये 4-5 दिन पुराना वीडियो है मैं आज इसलिए साझा कर रही हूँ क्योंकि आज इनका जन्मदिन है।
जब तक शिवम जैसे न्यायपसंद लोग हमारे समाज में मौजूद है तब तक समता की लड़ाई कमजोर नहीं होगी।
20वां जन्मदिन मुबारक हो
शुभचिंतक होने के नाते बता रहा हूँ PM @narendramodi जी, ये गुंडे जितना बढ़ेंगे,और सरकार इन्हें संरक्षण देगी,आपकी सरकार का इक़बाल उतना कमज़ोर होता चला जाएगा।
Gen-Z बच्चों को आपने Friends बोला,उन्हें आतंकित करने वाला खुला घूम रहा। @DelhiPolice Show some spine‼️
दिल्ली की झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले इरफ़ान की आवाज़ में दर्द है सुनिए इस कला को जो दिल से निकलती है।
इतना सच्चा इतना असरदार बोलने वाला शायद हमने आज तक नहीं सुना होगा।
आप भी सुनिए और सच बताइए किसी नेता की आवाज़ में इतनी सच्चाई सुनी है आपने?
जिसको सुनते सुनते अंदर आत्मा तक रोने लगे!
शायद नहीं, इतनी तो नहीं।
मगर इरफ़ान की आवाज़ में दर्द है पीड़ा है, साथ ही संविधान की प्रस्तावना पर क्या गज़ब मोनोलॉग है।
Thank you @RajatpandeyJF , @TheLallantop for this masterpiece ❤️
SONAM WANGCHUK+CJP +AAP+RSS+ UC(Against UGC Act)
लेकिन 20 जुलाई की घटना ने पूरी बाजी पलट दी, जो पटकथा संघ ने लिखी वो धरी रह गयी।
राहुल गाँधी +अखिलेश +SFI +AISA +युवाओं ने मनसुबों पर पानी फेर दिया।
@rajuparulekar@sanjayuvacha@sandeep_PT
बांसुरी स्वराज जी बता रही हैं कि "दिपके जी" सरकार के वीवीआईपी मेहमान थे जिन्हें आम लोगों और राजनीतिक पार्टियों की तरह धरना प्रदर्शन के लिए परमिशन लेने के दिल्ली पुलिस के किसी आफिस नहीं जाना पड़ा था। "दिपके जी" जैसे ही दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड किए, दिल्ली पुलिस के अधिकारी एयरपोर्ट दौड़े-दौड़े गए और दिपके जी को परमिशन देकर आए कि आइए सर जंतर-मंतर पर मजमा लगाइए। जबकि दिपके जी ने परमिशन मांगी ही नहीं थी। संदेश साफ था कि हे दिपके जी रूपी तारणहार! कुकर में बहुत गैस बन गई है, आप कुकर की सीटी बनकर गैस निकालो। परमिशन शाम 5 बजे तक की थी, परंतु बांसुरी स्वराज बतातीं हैं कि दिपके जी से 21 दिन तक तमाशा कराया गया। पहले दिन जब सरकार ने दिपके जी को जंतर-मंतर पर स्थापित किया तो 100 लोग नहीं जुटे। इसलिए 21 दिन का विशेष एक्सटेंशन दिया गया। तब जाकर दिपके जी नेता बने और अब भस्मासुर बन कर ऑउट ऑफ कंट्रोल हैं। अब भीड़ में कौन-कौन है, किसी को नहीं पता। दिल्ली की सड़कों पर जो अराजकता है उसके लिए और कोई नहीं, मास्टरस्ट्रोक ही जिम्मेदार है।
In 1997, this man was the ABVP National Secretary and was just about to join the Bharatiya Janata Party. There was a paper leak in Odisha and there was a major protest. This man participated in them. He was beaten by the police.
"We staged a protest against the Odisha government, in front of the secretariat. Around 1,500 students joined us there. While the protest was peaceful, the police charged against the activists. He was badly beaten up at that time. He had a few fractures too."
Who is he? Mr Dharmendra Pradhan. Imagine that Dharmendra Pradhan was protesting against paper leaks in 1997 and was beaten!
There is an amazing Indian Express article about him. Linked below. The irony? One of the interviewees says:
"under Pradhan's regime, the students will have more scope for dissent. "It is natural for students to be anti-establishment."