आज लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आज़ाद समाज पार्टी के विभिन्न पदों पर रहे फ़ौजी भारत भूषण संववार (पूर्व जिला अध्यक्ष, अ०स०प० – कानपुर ग्रामीण), प्रदीप संववार (पूर्व जिला अध्यक्ष, अ०स०प० – कानपुर देहात), सुनील कोरी (पूर्व महानगर अध्यक्ष, अ०स०प० – कानपुर महानगर) एवं राम शंकर अम्बेडकर (पूर्व जिला प्रभारी, अ०स०प० – कानपुर ग्रामीण) सहित आज़ाद समाज पार्टी के 25 पदाधिकारियों एवं सैकड़ों समर्थकों ने कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास जताते हुए कांग्रेस परिवार की सदस्यता ग्रहण की।
साथ ही भारतीय जनता पार्टी के 4 युवा कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा।
सभी साथियों का कांग्रेस परिवार में हार्दिक स्वागत एवं उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
सामाजिक न्याय, संविधान और जनहित की इस लड़ाई को मिलकर और अधिक मज़बूत करेंगे।
सत्य और किसानों के हक़ की बुलंद आवाज़, किसान नेता रहे सत्यपाल मलिक जी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा..!
किसान सम्मान दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
📍 कार्यक्रम स्थल: गन्ना क्रेशर स्थल (गन्ना पिराई स्थल), हिसावदा गांव, जनपद बागपत (उत्तर प्रदेश)
🕙 समय: सुबह 10:00 बजे
आइए, सत्य, संघर्ष और किसानों के सम्मान के इस संकल्प में सहभागी बनें।
आज उत्तर प्रदेश के रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के भ्रमण के उपरांत समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान जी की धर्मपत्नी एवं पूर्व विधायिका तंजीन फातिमा जी से उनके रामपुर स्थित आवास पर आत्मीय मुलाकात की।
इस दौरान डॉ. तंजीन फातिमा जी के स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
मेरे युवा और Gen Z साथियों,
अपने सपनों के लिए मेहनत करना आपकी ज़िम्मेदारी है, आपका साथ देना आपके माता-पिता की। मगर...
...उन सपनों को पूरा करना इस देश के education system की ज़िम्मेदारी है - और यही ज़िम्मेदारी आज का टूटा system निभा नहीं पा रहा।
अब इस system को बदलने के लिए शिक्षा Revolution लाने की ज़िम्मेदारी हम सबकी है।
17 जुलाई | देहरादून
#ChhatronKiGoonj से जुड़िए।
नेता विपक्ष : श्री @RahulGandhi जी
"योगी जी डर गए हैं। उनका आत्मविश्वास टूट चुका है। सत्ता खोने का डर उन्हें सता रहा है। लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन और विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश इसी घबराहट का प्रमाण है। जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।"
- श्री राजेंद्र पाल गौतम (@AdvRajendraPal) जी, प्रभारी, उत्तर प्रदेश कांग्रेस
@AdvRajendraPal Great Sir, definitely you will create a remarkable history in revolution to getting India Independence again especially from manuwad, slavery, exploitation etc. & Make India democratic again free from every aspects.
Namo Buddhay Jai Bheem Jai sanvidhan Jai Bharat
@IndianOilcl I was 15 min before closing to get 2nd cylinder added They misbehaved said they are late tried send me back After insisting they did it all at 17:21 showing they granted me a favour It was all like insulting Said pickup cylinder from ownself Akash Gas
ID 7241337775
ये भ्रम ख़ास प्रोपोगंडा के तहत भाजपा के लोगों ने फैलाया है कि वक़्फ़ बोर्ड ही वक़्फ़ ट्रिब्यूनल का मालिक है और उसके ख़िलाफ़ किसी दूसरी कोर्ट में नहीं जा सकते। ये पूरी तरह झूठ है।
ट्रिब्यूनल दरअसल एक तरह से कोर्ट्स ही होते हैं, अलग अलग क्षेत्रों जैसे रेलवे टैक्स, एडमिनिस्ट्रेशन आदि में ट्रिब्यूनल बनाए जाते हैं, ताकि- इन मामलों की जल्दी सुनवाई हो सके, और हाई-कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट पर कम से कम बर्डन पड़े, ट्रिब्यूनल बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण उस क्षेत्र की टेक्निकल नॉलेज है, नार्मल जजेस को बहुत से क्षेत्र की नॉलेज नहीं होती, इसलिए सरकार की तरफ़ से ट्रिब्युअल बनाये जाते हैं। जैसे- Industrial Tribunal, Customs, Excise and Service Tax Appellate Tribunal, Armed Forces Tribunal, National Green Tribunal, Railway tribunal.
उसी तरह ही सरकार ने वक़्फ़ ट्रिब्यूनल बनाए हैं। वक़्फ़ एक्ट 1995 के Section 83 के अनुसार- वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में- एक सदस्य- State Judicial Service का होगा, मतलब सरकारी जज होगा जो District, Sessions or Civil Judge, Class I लेवल से कम रैंक का नहीं होगा, यही आदमी वक़्फ़ ट्रिब्यूनल का चेयरमैन होगा, एक सदस्य- State Civil Services से होगा, मतलब पीसीएस से आएगा जो ADM लेवल से कम रैंक का नहीं होगा। और एक सदस्य ऐसा होगा जिसे Muslim law and jurisprudence(ज्यूरिसप्रूडेंस) की नॉलेज हो।
साफ़ है ये वक़्फ़ बोर्ड का वक़्फ़ ट्रिब्यूनल से कोई नाता नहीं है, वक़्फ़ ट्रिब्यूनल सरकारी होता है। पूरी तरह ग़ैर मज़हबी और निष्पक्ष। इसका मुस्लिमों से कोई नाता नहीं है। जैसे कस्टम के केस कस्टम ट्रिब्यूनल में जाते हैं, उनकी टेक्नीकलिटी की वजह से, वैसे ही वक़्फ़ प्रॉपर्टी की टेक्नीकलिटी के वजह से वक़्फ़ प्रॉपर्टी के केस वक़्फ़ ट्रिब्यूनल में जाते हैं।
दूसरा भ्रम ये फैलाया जाता है कि वक़्फ़ बोर्ड या वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फ़ैसले के ख़िलाफ़ किसी दूसरे कोर्ट में नहीं जाया जा सकता। ये पूरी तरह झूठ है।
Wakf Act,1995 के सेक्शन 83(9) (last para) के अनुसार- हाईकोर्ट, वक़्फ़ से जुड़े वक़्फ़ ट्रिब्यूनल द्वारा सुने गये मामले के रिकॉर्ड्स को एक्सामिन कर सकती है, जाँच सकती है। ये देखने के लिए कि सब लीगली तरीक़े से हो रहा है या नहीं। अगर हाइकोर्ट को कुछ ग़लत लगता है तो ट्रिब्यूनल के फ़ैसले बदल भी सकती है, संसोधित कर सकती है, हाईकोर्ट जो चाहे वो कर सकता है वक़्फ़ ट्रिब्यूनल के फ़ैसले के ख़िलाफ़.
वक़्फ़ बोर्ड के मामले को समझने के लिए मेरी वीडियो देख सकते हैं। वीडियो का लिंक- https://t.co/89ICsFciOy
मनुवादियों को जलन तो होगी ही, कल को इनके सामने जमीन पर बैठने वाले लोग आजकल कुर्सी पर बैठ कर फैसला जो सुनाने लगे हैं।
बाड़मेर की नई जिला कलेक्टर बनने पर टीना डाबी जी को बधाई।
#TinaDabi