प्राइवेट अस्पतालों की लूट का क्या कहना, अभी हमने कुछ दिन पहले बताया था कि हमारे छोटे भाई का बच्चा बिमार है, हमने उसे देहरादून के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया, 15 दिन NICU और 5 दिन वार्ड में रहने के बाद कल ही वह डिस्चार्ज हुआ है, हम भी लगभग दस दिन वही अस्पताल में रहे, आप ये जो बिल में इंजेक्शन देख रहे हैं इस पर 6561 रूपए की MRP है और प्रतिदिन एक इंजेक्शन बच्चे को लग रहा था शुरू में कई दिन हमने इसको अस्पताल की फार्मेसी से ही खरीदा, हमारे हमारे काफी अनुरोध और उसकी ठोड़ी खुजलाने के बाद उसने हमें 10% का डिस्काउंट दिया, और ऊपर से अहसान ऐसा दिखाया जैसे अस्पताल की पूरी फार्मेसी उसने हमारे नाम कर दी हो, एक दिन हमने अस्पताल के बाहर एक फार्मेसी थी उससे पूछा भाई ये इंजेक्शन कितने है, उसने हमें 4 हजार का बताया, अगले दिन हम वहीं से लेने लगे, फिर एक दिन हम घूमते फिरते वही लोकल बाजार में पहुंच गए, एक फार्मेसी दिखाई दी हमने उससे पूछा उसने हमें 2 हजार का बताया, हमारी उत्सुकता और बढ़ फिर हमने और कई फार्मेसी पर ट्राई किया आखिर में सबसे सस्ता 1600 रूपए का इस फार्मेसी ने बताया जिसका बिल आप देख रहे हैं, और थोड़ी उसकी ढोडी खुजलाने के बाद उसने इस पर भी 10% का डिस्काउंट दिया, अब सरकार बताए की इस 1600 रूपए के इंजेक्शन पर 6561 रूपए MRP डाली गई है किस नियम से डाली गई, और इस लूट की इजाज़त किसने दे रखी है?
Devastated to see this video. Parents of 34 year of Sarthak Mattoo who was killed by a speeding Thar while he was driving his bike in Delhi’s Vasant Kunj. Hope justice prevails. On His Way To Work, Gurugram Rider Dies As Thar Rams Him In Delhi https://t.co/mSiFVOwIQU
पहले इन दोनों की तस्वीर देखिए। जो चेहरे से ही क्रूर नजर आ रहे।
मुजफ्फरनगर में 13 मजदूरों के साथ करीब डेढ़ साल तक बर्बरता करने वाले यही थे। टूटे हाथ वाला फैक्ट्री का सुपरवाइजर शिवा त्यागी है, बगल खड़ा प्रमोद बालियान। इसका बेटा अंकित बालियान अभी फरार है। ये रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के बाहर से मजदूरों को लाते थे।
ऐसा नहीं कि प्रमोद बालियान गरीब-गुरबा है। परिवार में 90 बीघा खेत है। बड़ा घर है। इसकी मां गांव की प्रधान रह चुकी हैं। लेकिन इसने क्रूरता की सारी हदें पार की। मजदूरों को एक रुपया नहीं दिया। रोज मारता। कभी पेंचकस से तो कभी भाले से।
ये मजदूरों के हाथ और पैर पर नहीं मारते थे, क्योंकि ऐसा करने से वह फैक्ट्री में काम नहीं कर पाएगा। इसलिए उसके सिर और कान पर मारते थे। मजदूरों का जब रेस्क्यू किया गया तो पता चला की सबको ही कम सुनाई देता है। सबके सिर पर चोट है।
कई लोग कहते हैं कि ये 13 मजदूर भाग क्यों नहीं पाए? असल में इन मजदूरों को पता ही नहीं था कि इन्हें रखा कहा गया है। मतलब कौन सा जिला। फिर ये जहां थे वहां गेट पर दो पिटबुल के हट्टे-कट्टे कुत्ते रहते थे। दीवारों पर तार लगा था, जिसमें करंट दौड़ाया गया था।
छोटी-छोटी बातों पर जाटों में खाप पंचायत लग जाती है। आदेश आ जाते हैं, लेकिन इस क्रूरतम, विभत्स अपराध पर न कोई पंचायत हुई और न किसी का हुक्का पानी बंद हुआ।
हां, पुलिस ने यहां कमाल का रोल निभाया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में एएसपी संजय वर्मा का गुस्सा नजर आया। मजदूरों को खाना खिलाया। कपड़े दिए। 30-30 हजार रुपए की केंद्र सरकार की बंधुआ मजदूर उन्मूलन योजना के तहत मदद करवाई।
बाकी अभी मुख्य आरोपी अंकित बालियान फरार है। 3 टीम लगी हैं। उम्मीद है कि जल्द ही पकड़ा जाएगा।
@SarkariUmpire Sundar kabhi perform karke nain diya T20 and ODI s men lekin 10 saal se har format ke liye select ho raha hai. bade se bade player andar babar ho ja rhe lekin Sundar never dropped from any format! club cricket ke like bhi nahin hai fir bhi fir bhi har fromat men khel raha.
@Akshatgoel1408 Washington Sundar kiska ristedaar hai!? Har format men team men chuna jata hai, yogdaan iska kuch nahin Hai, thoda impact test cricket men hai bali T20 and ODI 10 saal se khel raha kuch performance karke nahin diya fir bhi har team mein select hota hai!
12 सालों में अगर भ्रष्टाचार नहीं खत्म कर पाए तो क्या कर पाए तुम -
1- थानों में भ्रष्टाचार चरम पर है
2- लेखपाल, डीएम, SP, साइबर क्राइम थाना, सब भ्रष्ट हैं
3- तहसील, कचहरी, कृषि भवन, में भ्रष्टाचार भरा पड़ा है
4- प्रधान, बीडीसी, जिलापंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद, मंत्री , मुख्यमंत्री सब भ्रष्ट हैं।
5- भगवान के मंदिर में आपके नाक के नीचे से चोरी हो गई, ये कैसी चौकीदारी है?
मुझे भी मस्जिदों में पूजा करने और भगवान राम की मूर्ति स्थापित करने की इजाज़त दे दो। ‘वन्स अ मस्जिद, ऑलवेज अ मस्जिद’ कहते हो, फिर मंदिर प्रांगण में नमाज़ क्यों? यह इस्लामिक कानून, हिंदू कानून और ए.एस.आई. एक्ट 1958 की धारा 16 — तीनों का उल्लंघन है।
हरियाणा के जितने नास्तिक जाट , जाट नस्ल वाले जाट, जाट धर्म वाले जाट , जातिवाद से लड़ने वाले जाट , पाखंड से लड़ने वाले जाट क्रांतिकारी हैं। सभी के सभी अंकित बैयानपुरिया के पीड़ा पर चुप हैं या विरोध में बोल रहे हैं।
इस देश में जातिवाद का आरोप तभी सच लगता है जब सामने ब्राह्मण या ठाकुर हो।
बाक़ी सभी जातियों का जातिवाद दूध-भात होता है।
लखनऊ के इस विश्वविद्यालय में सामान्य वर्ग के विद्यार्थी किसी भी बात की शिकायत तक नहीं कर सकते। वह विकल्प ही नहीं है। केवल SC/ST/OBC ही शिकायत कर सकता है।
मोदी जी को ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ भीम्स्तान’ शीघ्र ही दिया जाएगा।
आदरणीया, परम सम्मानीया साक्षी जोशी जी आपके पूर्वजों ने भेदभाव किया होगा, आपके पूर्वजों ने कुकर्म किए होंगे। इसका ये मतलब नहीं कि पूरे सवर्ण समाज के लोग घसीटे जाए
आरक्षण अगर “गरीबी उन्मूलन योजना” नहीं है तो फिर BP यादव ने जब मंडल कमीशन की रिपोर्ट सौंपी तो उसमें अमीर जमींदार जातियों को क्यों रखा? इस पर आप कभी क्यों नहीं बोलती? डर लगता है क्या?
UP-बिहार से लेकर हरियाणा तमिलनाडु तक आर्थिक-राजनीतिक-सामाजिक रूप से संपन्न समाजों के पास जातिगत आरक्षण क्यों है? इस पर बोलने की आपकी हिम्मत क्यों नहीं होती? या फिर सबसे सॉफ्ट टारगेट सिर्फ सवर्ण ही हैं?
मुझे जातिवादी कहने वाले मूर्खों को ये तक समझ नहीं आता कि मैं तो न मायके का न ससुराल का(जो कि दोनों ब्राह्मण परिवार हैं) उनका सरनेम तक नहीं लगाती।कोई मेरे नाम से मेरी जाति नहीं बता सकता।और इसी नाम के साथ पिछले 30 साल से काम कर रही हूं..1-2 साल पहले जब लगा कि हिंदू और ब्राह्मण को लेकर x पर बहुत ज़्यादा ज़हर उगला जा रहा है तब जाकर बायो में लिखा- Indian,Hindu,Brahmin. मूर्खों ने बस आख़िरी वाला पकड़ लिया और पहले वाले दोनों छोड़ दिए क्योंकि एजेंडा चलाना था न 😊🙏 खैर.. The more you attack me for my identity...The stronger it will become. So good luck👍
मैं अपनी जाति छोड़ने के लिए तैयार हूं। आप तैयार हैं???? आप छोड़ दो.. जाति भी और जाति को मिलने वाले सारे फायदे भी...मैं खुद की जाति बताना छोड़ दूंगी... लेकिन हमले करोगे तो बायो में बिलकुल लिखूंगी... कुछ समय पहले भी बेवजह के हमलों की वजह से ही लिखा था... शुरू से नहीं था ये मेरे बायो में... If You push me against the wall... I will definitely fight back!!!!
1. हम तो कहते हैं जातिवाद खत्म करो...
2. सिर्फ आर्थिक आधार पर आरक्षण दो..
3. जो एक बार आरक्षण लेकर अच्छी नौकरी ले चुका हो उसके बच्चे को सामान्य श्रेणी में करो...
4.फिर भी हम जातिवादी? वाह!!! और ये कहते हैं कि हमारे अंदर नफरत भरी है!
5. हमें फांसी लगनी चाहिए? बढ़िया है!
6. हम यहां के मूलनिवासी नहीं हैं? ये आज पता चला 😃🙏
जो कहे जातिवाद खत्म करो वो जातिवादी और जिसे जाति के आधार पर आरक्षण चाहिए वो क्या है???????
झूठ पर झूठ पर झूठ...हद है!!! Doctor IAS Engineer के बच्चे भी जातिगत आरक्षण ले लेते हैं और न जाने कितने गरीब बच्चे वंचित रह जाते हैं...कब तक ये समाज इस सच्चाई से मूंह मोड़ेगा??????
नहीं आता एट्रोसिटी एक्ट में। जब पानी पीने नहीं दिया, और तुम अरब से भी नहीं आए कि कहते तेल पीकर जी रहे थे, मूलनिवासी भी हो, नब्बे प्रतिशत होने का दावा भी है, तो जीवित बच कैसे गए?
किसने पानी नहीं पीने दिया? दूसरे का कुआँ खोद देते थे, अपने में कोढ़ लग जाता था? कोई ‘हजारों वर्ष तक प्रताड़ित’ नहीं था। सब दो कौड़ी की कल्पना सत्तर के दशक में लिखी गई। एक भी समकालीन पुस्तक जो हजार वर्ष भी पुरानी हो, ऐसे किसी भी भेदभाव का वर्णन नहीं करती।
इसलिए प्रिंटआउट ले कर पिछवाड़े में डाल ले ये एट्रोसिटी की बकचोदी।
अब तो बंट गए...
बस कटना बाकि है...
शुक्रिया @dpradhanbjp 🙏
देश का सामान्य वर्ग, मध्यम वर्ग, ईमानदारी से टैक्स देने वाला वर्ग, बिना आरक्षण पढ़ाई करने और नौकरी पाने वाला वर्ग... इसी लायक है कि उसके साथ अभी और नाइंसाफी हो...उसका और शोषण हो...उसको गाली मिले..उसको सड़क पर पीटा जाए...उसे झूठे मामलों में फंसाया जाए...जेल में डाला जाए...और कोई कानून उसका बचाव न कर पाए...इसी लायक है ये वर्ग... बढ़िया काम कर रहे हैं आप 🙏
#ugc
DU में जो रुचि तिवारी के साथ हुआ, वह वामपंथी-अम्बेडकरवादी छात्र पार्टियों के कारण हुआ, ऐसा मानना मूर्खता है। घटना का सतही कारण तो अवश्य ही ऐसी पार्टियों के छात्र नेता हैं, पर जड़ में क्या है?
जड़ में जातिवादी तुष्टिकरण और ब्राह्मण घृणा के नारों का सामान्यीकरण है। मोदी सरकार की उपलब्धि यही है कि अब भीमवादी खुल्ला घूम रहे हैं। कल तक जो दीवारों पर ‘ब्राह्मण बनिया कैम्पस छोड़ो’, ‘देयर विल बी ब्लड’, ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखा करते थे, अब वह ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’ के नारों से होते हुए, अब एक लड़की के कपड़े फाड़ने पर आ चुकी है क्योंकि उसका नाम ‘तिवारी’ है।
वामपंथी पार्टियों को अब हम नहीं कोसते क्योंकि हम जानते हैं उन्हें सशक्त करने वाले लोग सत्ता में हैं, जो ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का नकली नारा रैलियों में लगा कर एकता का स्वांग रचते हैं।
जेएनयू में हाल ही में कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया, जो एक अच्छा उदाहरण है, पर आगे क्या? कैम्पस में एक छात्रा के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।
आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपराध की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?
यह विषाक्त वातावरण नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ही देन है। नाम उसी का लिया जाएगा जो ई-रिक्शा से वंदे भारत तक हर उपलब्धि का क्रेडिट लेता है। यह क्रेडिट भी मोदी जी का ही है।