वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः(यजुर्वेद ९:२३)अर्थात् "हम पुरोहित राष्ट्र को जीवंत ओर जाग्रत बनाए रखेंगे"
पुरोहित वह जो इस पुर का हित करता है,जो राष्ट्र का दूरगामी हित समझकर उसकी प्राप्ति की व्यवस्था करे। जो सही परामर्श दे, चिन्तक और साधक दोनो हो, वही पुरोहित है! @narendramodi
कल शाम जयपुर आवास पर श्री दीपक मीणा व प्रदेश में पन्या सेपट के नाम से विख्यात हास्य कलाकार ने मुलाकात कर जयपुर पुलिस आयुक्तालय के झोटवाड़ा थाने में दर्ज उनके पुत्र गोदीप मीणा की हत्या से जुड़े प्रकरण संख्या 128/26 के संदर्भ में अवगत करवाया,जिस हास्य कलाकार ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के विरोध में अपनी आवाज मुखर की,उसे आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार न्याय नहीं दे पा रही है |
मैंने पुलिस कमिश्नरेट के उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता करके इस हत्याकांड में पीड़ित पक्ष की पूरी बात सुनकर शीघ्रता से निष्पक्ष अनुसंधान करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाने की बात कही |
प्रदेश में संगीन अपराधों से जुड़े मामलों की मुख्यमंत्री स्तर तक गंभीरता से समीक्षा नहीं की जाती है और पीड़ितों को न्याय के लिए दर - दर भटकना पड़ता है |
@PoliceRajasthan@jaipur_police
• 1020–1140, चालुक्य बनाम परमार: कोई जौहर नहीं
• 1100–1200, परमार बनाम चौहान: कोई जौहर नहीं
• 1150–1180, चालुक्य बनाम चौहान: कोई जौहर नहीं
• 1160–1180, चौहान बनाम गहड़वाल: कोई जौहर नहीं
• 1200–1500, सिसोदिया बनाम राठौड़: कोई जौहर नहीं
• 1300–1400, सिसोदिया बनाम परमार: कोई जौहर नहीं
• 1300–1500, सिसोदिया के आंतरिक उत्तराधिकार युद्ध: कोई जौहर नहीं
• 1300–1400, राठौड़ बनाम परमार: कोई जौहर नहीं
• 1350–1500, राठौड़ बनाम भाटी: कोई जौहर नहीं
• 1100–1300, कछवाहा बनाम चौहान: कोई जौहर नहीं
• 1000–1200, चौहान शाखाओं के आंतरिक संघर्ष: कोई जौहर नहीं
• 1100–1300, भाटी बनाम जाडौन: कोई जौहर नहीं
• 1100–1150, तोमर बनाम चौहान: कोई जौहर नहीं
• 1400–1500, राठौड़ बनाम कछवाहा: कोई जौहर नहीं
इन सभी में—दो दर्जन से भी अधिक युद्ध, जिनमें राजपूत आपस में लड़े, और कहीं भी जौहर नहीं हुआ।
एक भी नहीं।
ना भारतीय स्रोतों में, ना विदेशी लेखनों में।
अब यह देखें:
• 712, दाहिर (सिंध) बनाम मुहम्मद बिन क़ासिम: जौहर
• 1232, ग्वालियर बनाम इल्तुतमिश: जौहर
• 1301, रणथंभौर बनाम अलाउद्दीन खिलजी: जौहर
• 1299, जैसलमेर बनाम अलाउद्दीन खिलजी: जौहर
• 1303, चित्तौड़ बनाम अलाउद्दीन खिलजी: पहला जौहर
• 1327, कम्पिली बनाम मुहम्मद बिन तुगलक: जौहर
• 1326, जैसलमेर बनाम गयास-उद-दीन तुगलक: जौहर
• 1486, कुवा बनाम महमूद बेगड़ा: जौहर
• 1528, चंदेरी बनाम बाबर: जौहर
• 1535, चित्तौड़ बनाम बहादुर शाह: दूसरा जौहर
• 1543, रायसेन बनाम हुमायूं: तीन जौहर
• 1568, चित्तौड़ बनाम अकबर: तीसरा जौहर
• 1634, बुंदेलखंड बनाम औरंगज़ेब: जौहर
• 1710, दद्दानाला बनाम मीर फ़ज़लुल्लाह: जौहर
इसी तरह जब अंग्रेज आए—प्लासी, बक्सर, कर्नाटिक युद्ध, मैसूर युद्ध, मराठा युद्ध, गुरखा युद्ध, सिख युद्ध, बर्मा युद्ध, अफगान युद्ध—
कहीं भी जौहर नहीं।
अब जब कोई समीक्षक “हिंदुत्व” को जौहर को “महिमामंडित करने” के लिए कोसता है, मैं उसकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ—
यह एक भयावह प्रथा थी, सभ्य समाज में इसका कोई स्थान नहीं, और सौभाग्य से यह समाप्त हो चुकी है।
लेकिन क्या आपको ऊपर की सूचियों में कुछ पैटर्न दिख रहा है?
क्यों यह वीभत्स परंपरा केवल मुस्लिम आक्रमणों के प्रसंगों में ही दिखाई देती है?
अन्य किसी भी विरोधी के विरुद्ध राज्य गिरने पर महिलाओं ने ऐसा क्यों नहीं किया?
इतना तो कोई भी समझ सकता है।
कोई जौहर का महिमामंडन नहीं करता—यह कोई उत्सव नहीं था। हम इसे सम्मान देते हैं—उस अग्नि को नहीं, बल्कि उस दर्दनाक भावना को जिसने हमारे पूर्वजों को ऐसा करने पर मजबूर किया।
क्योंकि उस भावना को स्मरण रखना आवश्यक है।
पता है क्यों?
क्योंकि वे राक्षस, जिन्होंने हमारे पूर्वजों को ऐसी भयावह स्थिति में धकेला—
वे आज भी हमारे बीच मौजूद हैं।
और उनका स्वभाव आज भी वैसा ही है।
जब कोई मृत्यु को आपकी छाया से बेहतर विकल्प समझ ले—तो सोचिए
आप हैं ही क्या?
🚩🔱🚩
Gen Z Hindu bro calmly warning the Yadav community in Bihar about Christian missionaries.
Composed, logical, and on point —this is the new face of Hindu awareness!
आंकडे निकाल लीजिए ! SC ST एक्ट का सबसे ज्यादा दुरुपयोग SC करते हैं पर बात जब कानून के गलत इस्तेमाल को लेकर नाकारात्मक टिप्पणियों, आलोचना और बदनामी की आती है तो SC के साथ ST भी लपेट लिए जाते हैंl जंगलों पहाड़ों में रहने वाले ज्यादातर आदिवासियों को SC ST एक्ट में प्रावधानों के बारे में पता तक नहीं l आदिवासी सीधे सरल और ईमानदार होते हैं| वे किसी का बुरा नहीं करते | हाँ कुछ अपवाद हो सकते हैं, SC ST एक्ट का दुरूपयोग आदिवासी नेता करते हैं अपने राजनैतिक प्रतिद्वंदी को फंसाने के लिए या फिर फर्जी मुकदमें का डर दिखाने के लिए | SC ST एक्ट को जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना की रोकथाम करने के लिए बनाया गया था पर एक समाज ने इस कानून को हथियार बना लिया है और लगातार गलत इस्तेमाल कर रहे हैं l बदनाम आदिवासी समाज भी हो रहा है|
मेरा सवर्ण समाज के लोगों से निवेदन है कि…
UGC के तहत जेल न जाएँ और बदनामी न सहें।
जाना है तो 302 में जाए।कम से कम गलत करने से पहले सामने वाला 10 बार सोचेगा तो सही।
#NoUGCRollBack_NoVote
एक काम करिए आदरणीय @narendramodi जी हम सवर्णों को देश निकाला दे दीजिए... सबको अरब सागर और हिंद महासागर में ले जाकर डाल दो .....या फिर मजहब के आधार पर तो विभाजन कर दिया है अब जातियों के हिसाब से कर दो सब झंझट खत्म 😑
#UGC_RollBack#UGC_काला_कानून_वापस_लो#GCMaangeEquality