हमारी रहनी सांसारिक है, आत्मिक नहीं। हम स्वयं को शरीर, मन व व्यवसाय से पहचानते हैं, आत्मा से नहीं। यही हमारे तनाव, दुख व बेचैनी का कारण है।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
निराकार में जीना अध्यात्म है,आकार में जीना संसार है। निराकार में जीना अभी और यहीं में जीना है।
आकार में जीना समय में जीना है। निराकार में जीना साक्षी में जीना है,आकार में जीना मूर्छा में जीना है,
बेहोशी में जीना है। निराकार में जियो। यही ज्ञान है। यही भक्ति है।
-Samarthguru 🏵
आत्मभाव आत्मज्ञान के बाद ही होता है। सदगुरु शिल्पकार की भांति होता है। वह तराश-तराश कर तुम्हारे भीतर छुपी आत्मा, असली बुद्ध को बाहर लाता है। अपनी आत्मा को खोजो।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
एकांत में दूसरे मिट जाते हैं। मौन में शब्द मिट जाते हैं। ध्यान में विचार मिट जाते हैं। समाधि में स्वयं का मिटना हो जाता है, शून्य हो जाता है।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
साक्षी का अर्थ है निराकार के तल पर,आत्मा के तल पर जीना-सब्जेक्टिव लिविंग। संसार हो या परमात्मा, दोनों के प्रति जागरण निराकार के तल पर ही संभव है।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
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संसार समंदर जैसा है
उससे न प्यास बुझ पाएगी
है संत एक कूप जैसा
तृप्ति उससे मिल जाएगी
गुरु के पीछे गोविंद खड़ा
बाकी सब धरम-करम पचड़ा
अथ सद्गुरु शरणं गच्छामि
गोविंदं शरणं गच्छामि
सद्गुरु की दयालुता,उदारता,करुणा का क्या कहना,अपने शिष्य के लिए सदा उपलब्ध है। जबसे तुमने शिष्यत्व लिया है,उसके बाद जो भी तुम्हारा जीवन है,सद्गुरु दिशानिर्देश करता है,कभी तुमको पता चलता है,कभी वह नही भी पता चलता है,लेकिन सद्गुरु हमेशा भाव से तुम्हें निर्देशित करता है।
-Samarthguru