झारखंड सरकार के खिलाफ छात्रों का यह हुजूम नहीं, जनसैलाब है!
JPSC-JSSC पेपर लीक और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आक्रोश अब और एकजुट होकर सड़कों पर उमड़ पड़ा है। छात्रों का साफ संदेश है: उनके भविष्य से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा।
राहुल गांधी और हेमंत सोरेन से चाहिए जवाब! ⬇️
“दिमाग़ी नक्सल” दरअसल हथियार वाले नक्सल से भी ज़्यादा ख़तरनाक हैं क्यूँकि इन्हें पहचानना आसान नहीं।
ये हर जगह घुसे बैठे हैं.. तभी तो सरकार किसी की हो, सिस्टम पर इनका प्रभाव रहता ही है।
मीडिया भी इनसे अछूता नहीं है। मौक़ा मिलते ये अटैक करते हैं।
सरकार को तो इन्हें पहचानना ही होगा, पब्लिक को भी अपना मानसिक रक्षा कवच एक्टिवेट करना होगा। काश ऐसा हो पाये।
डूब मरो
अभिजीत दीपके
सौरव दास
आशुतोष रांका
शिक्षा के नाम पर दुकान चला रहे हो और रांची के छात्रों को अपने हाल पर छोड़ दिया। एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी, रांची ये गए नहीं ऊपर से एक इंटरव्यू में सौरव दास ये दावा कर रहे हैं कि सरकार ने उनकी ज़्यादातर मांगे मान ली हैं. आज तो तब हद हो गई जब अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो को पुलिस ने तिरंगा यात्रा में जाने से रोक दिया. यह तिलचट्टे दिमागी नक्सली हैं। शिक्षा सुधार से इनका कोई लेना देना नहीं, इन्हें तो सिर्फ राजनीति करनी और लोगों को धमकाना है। स्कूल ठीक करो से पहले झारखंड के छात्रों का दर्द तो सुन आओ । वहां नहीं जाओगे क्योंकि वो तुम्हारी राजनीति के लिए मुफीद नहीं है।
नकल से सावधान.
#CJP #AbhijeetDipke #AshutohRanka #Souravdas #schooltheekkaro #naxal #rachi #jharkhand #jharkhandstudentprotest #rachiprotest #cochroachjantaparty #deepakchaurasia #DeepakChaurasia
@abhijeet_dipke@cockroachisback
@sauravaDassss @AshutoshRanka@HemantSorenJMM@JmmJharkhand@CJP_for_India@SethSanjayMP@DevendraNathMa9
I lose my thoughts… अगर मुझे सुनना ही नहीं है, तो मुझे बुलाया क्यों?
This is what being under-confident, nervous and shaky looks like, @ArvindKejriwal.
But don’t worry. अभी तो तुम्हें और ज़लील होना है।
राहुल गांधी और हेमंत सोरेन जी,
आज स्वतंत्रता दिवस अवसर पर कम से कम आम नागरिकों के स्वतंत्रता और अधिकारों का हनन तो मत कीजिए।
देवेंद्र नाथ महतो जी के साथ किया गया यह दुर्व्यवहार कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों के तानाशाही रवैये और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
राष्ट्रगान में एक स्थान पर खड़े नहीं हो सकते, वन्दे मातरम् पूरा सुन नहीं सकते…
जिस राष्ट्रगान और ‘वन्दे मातरम्’ ने करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बाँधा, उस पर भी वोटबैंक हावी हो जाए तो सवाल कांग्रेस से जरूर होगा।
शर्मनाक, बेहद शर्मनाक।
आज स्वतंत्रता दिवस है। झारखंड में स्टूडेंट्स के लिए भूख हड़ताल पर बैठे देवेन्द्र नाथ महतो फिलहाल हॉस्पिटल में हैं। पर आज वो तिरंगा रैली में हिस्सा लेना चाहते थे, पर हॉस्पिटल में झारखंड पुलिस ने उनके साथ क्या किया खुद ही देखिए।
आजाद देश में स्टूडेंट्स का अधिकार मांगने वालों को तिरंगा फहराने का भी अधिकार नहीं है क्या ?
नहीं होगा। 25% क्षमता और 75% आरक्षण के कारण देश 2097 तक भी विकसित नहीं होगा। आपकी आत्मा मरने के बाद आपको कचोटेगी कि मेरे पास सब कुछ था, जनसमर्थन था, संख्या थी, विजन था और मैंने दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत के नाम पर सब बर्बाद किया।
आपके अंबेडकर-फुले प्रेम ने इस देश को बर्बादी की राह पर डाल दिया है।
देश आज़ादी का जश्न मना रहा है और उधर 14 दिन से भूखे प्यासे बैठे व्यक्ति के साथ ये हो रहा है झारखंड में।
ये है आज़ादी?
“हम लेकर रहेंगे आज़ादी” का नारा लगाने वाले कहीं नहीं दिखेंगे अब इसपर छाती पीटते।
कॉकरोच अभी BJP शासित राज्य घूमने में बिजी हैं।
गजबे है
इंदिरा गांधी फिदेल कास्त्रो को गले लगा रही है
भला बताइए यह गले लगाने वाली कोई विदेश नीति होती है :- राहुल गांधी
और हां आज जैसा अश्लील चुटकुला राहुल गांधी ने और संदीप दीक्षित ने मंच से जॉर्जिया मेंलोनी के लिए बोला अगर उसी तरह का अश्लील चुटकुला क्यूबा में इंदिरा गांधी के लिए बोला जाता तो कांग्रेस को कैसा लगता ???
शर्म कर ले राहुल शर्म कर ले
देखिए, राहुल गांधी ने फिर किया राष्ट्रगान का अपमान...⬇️
जिस राष्ट्रगान पर हर भारतीय को गर्व है, जो देश की आन, बान और शान है, उसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
लेकिन राहुल गांधी ने इसे अपमानित कर अपने देश-विरोधी रवैये को एक बार फिर उजागर कर दिया है…
जो ईरान-अमेरिका युद्ध आज भी चल रहा है, खत्म नहीं हुआ है उसमें राहुल गांधी के हिसाब से पाकिस्तान ने मध्यस्थता भी करा दी है और बाज़ी भी मार ली है।
इसी से उनकी विदेश नीति की समझ और गहराई का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
राहुल गांधी की भाषा और राजनीतिक आचरण का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री और इटली की राष्ट्राध्यक्ष जैसी संवैधानिक एवं सम्मानित शख्सियतों के लिए जिस तरह की आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है, वह किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक और राजनीतिक संस्कृति के लिए शर्मनाक है।
राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन अशोभनीय भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणी और संवैधानिक पदों का अपमान राजनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कारों के पतन का प्रमाण है।
यह भारत की महान लोकतांत्रिक परंपरा की भाषा नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति पर सीधा प्रहार है, जिसने हमेशा असहमति के बावजूद मर्यादा और सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया है।
देश की जनता सब देख रही है, शब्द भी, संस्कार भी और सोच भी। यही कारण है कि जनता ने बार-बार राहुल गांधी की राजनीति को नकारा है और आगे भी उनके अहंकार, अमर्यादित भाषा और नकारात्मक राजनीति को करारा जवाब देती रहेगी।
लाठी खाई, FIR झेली… मूसलाधार बारिश में भी लहूलुहान छात्रों का हौसला अडिग!
JPSC-JSSC पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों की आवाज लाठी, FIR और बारिश भी नहीं दबा सकी। मूसलाधार बारिश में भी संघर्ष जारी है।
झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लहूलुहान होने के बाद भी छात्र डटे हैं, क्योंकि उनकी लड़ाई सिर्फ अपने हक की नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शी व्यवस्था की लड़ाई है।
JMM-कांग्रेस सरकार से सिर्फ एक सवाल है- न्याय कब मिलेगा?
🚨 बड़ी खबर 🚨
Ex ACP दिल्ली का बड़ा खुलासा – CJP मुश्किल में!
“CJP ने जंतर मंतर के लिए 6 official अंडरटेकिंग पर साइन किए थे।
उसमें बाइंडिंग क्लॉज था – ‘मैं अपने फॉलोअर्स को कंट्रोल में रखूंगा’।
उन्होंने यह भी साइन किया था कि प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही होगा।” 😳
CJP की पूरी लीडरशिप जल्दी ही तिहाड़ में मिलेगी
छात्रों के कल के विधानसभा घेराव को रोकने के लिए हेमंत सरकार की पूरी तैयारी।
अब कहाँ हैं राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और उनके तिलचट्टे?
जो लोग दूसरे राज्यों में छात्रों के हर प्रदर्शन पर राजनीति चमकाने पहुँच जाते हैं, वे झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन पर चुप क्यों हैं?
क्या छात्रों का गुस्सा तभी “लोकतांत्रिक विरोध” होता है जब उससे BJP को घेरा जा सके?
झारखंड में छात्रों के सवालों पर भी वही पैमाना लागू होना चाहिए, जो विपक्ष BJP-शासित राज्यों में मांगता है।
चयनात्मक लोकतंत्र और सुविधानुसार छात्र राजनीति, अब जनता सब देख रही है।