मूल गीत ,
मैंने स्वर्ग का एक टुकड़ा देखा
जो मेरे लिए बड़ी बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था
और मैं बहुत दूर भाग रहा था
क्या मैं किसी दिन इस दुनिया से बाहर भाग जाऊंगा ?
कोई नहीं जानता,
मैं बस बहुत दूर भाग रहा हूं
नाराजगी भी है उनसे और चाहत भी वही है,
इस उलझन को भला कैसे कोई जाने।
जो बीत गया वो तो इक ख्वाब था शायद,
अब ढूंढते हैं हम खुद के खोए ठिकाने।
ये कैसी मोहब्बत कहां के फ़साने ।
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