स्वर्गीय लोकेन्द्रसिंह कालवी साहब की आज जयंती है।
जिस दिन कालवी साहब स्वर्ग सिधारे थे उस दिन मैने उनकी श्रद्धांजलि में यह लेख लिखा था -
“इस देश में एक आग का दरिया हुआ करता था “
प्रभु सिंह इंदा ने उन शब्दों को अपनी आवाज के जादू में उतार दिया था। अब ये शब्द बार - बार और हर बार प्रभु सिंह इंदा की आवाज में सुनाई देते हैं। कालवी साहब के समर्थक उनकी प्रत्येक जयंती और पुण्यतिथि पर इस वीडियो को साझा करते हैं। उनके निजी लोग अब भी इसे सुन - सुनकर भावुक हो जाते हैं।
आज फिर एक बार ये शब्द हर जगह सुनाई दे रहे हैं। और आपको जब मालूम चले कि आपका कुछ लिखा हुआ लोक के बीच रच - बस जाए तो मौज ही मौज।
कालवी साहब को नमन
राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता की होड़ मची है, पर बुनियादी सवाल अनसुने हैं। निजी संस्थान एक के बाद एक मान्यता तो हासिल कर रहे हैं, कहीं मेडिकल कॉलेज खुल गए तो प्रॉपर अस्पताल नहीं, कहीं अस्पताल बना भी तो इतने मरीज नहीं कि छात्रों को प्रैक्टिकल अनुभव मिल सके। इन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने के लिए फैकल्टी तक उपलब्ध नहीं है।
और भी दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि प्���देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक में फैकल्टी की भारी कमी है। जब NMC का निरीक्षण होता है तो कहीं और से फैकल्टी बुलाकर मान्यता तो ले ली जाती है, पर इससे पढ़ाई की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। मेडिकल जैसे पेशे में संख्या नहीं, गुणवत्ता चाहिए, क्योंकि हर डिग्री के पीछे मरीज की जान का सवाल है।
यह अकेला राजस्थान का मसला नहीं, देशभर में यही होड़ मची है, इसी की तस्वीर तब सामने आई जब CBI ने निजी मेडिकल कॉ��ेजों क�� मंजूरी देने में रिश्वतखोरी के आरोप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC के अपने अधिकारियों को ही गिरफ्तार किया।
भारत जैसे देश में जहां डॉक्टरों की जरूरत सबसे ज्यादा है, वहां भावी डॉक्टरों की योग्यता पर ही सवाल उठना सबसे चिंताजनक है। केन्द्र सरकार, NMC और राज्य सरकारों को बताना चाहिए कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी और बुनियादी सुविधाएं कागजों पर हैं या हकीकत में।
जब चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र का हाल यह है, तो सवाल उठता है कि भारत की मेडिकल साइंस की साख का क्या होगा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने बड़े संकट पर भी न केंद्र सरकार गंभीर है, न राज्य सरकार, यह चुप्पी सबसे ज्यादा खतरनाक है।
जैसे उस लड़के की नौकरी गयी है इस महिला की नौकरी जानी चाहिए,
Sejal pawar ने तो अपने प्रोफेशनल मॉरल का मज़ाक उड़ाया है, कम से कम दो साल के लिए इनका सर्टिफिकेट रद्द हो @IMAIndiaOrg
EWS आरक्षण सरलीकरण के परिणामस्वरूप राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा-2024 में 255+ अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हेतु चयन संभव हुआ, जिनमें से 125+ अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन हुआ।
आर्थिक पिछड़ा वर्ग के हित में लिए गए इस दूरदर्शी एवं जनहितकारी निर्णय के लिए पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी का हार्दिक आभार।
@ashokgehlot51
पराक्रम-प्रकर्ष महाराणा सांगा की जयंती पर भारतीय युयुत्सा व पौरुष पर बलिहारी प्रत्येक स्वाभिमानी भारतीय को महाराणा के असीम शौर्य जैसी अपार शुभकामनाएँ। इतिहास के शिलालेख पर सदैव के लिए अंकित हो चुकी उनकी अनन्य शौर्य-गाथा सदियों तक वीरता की परिभाषा के रूप में उल्लेखित होती रहेगी💪🏼🇮🇳🙏❤️
जुगनू की कुछ औलादों ने सूरज पर प्रश्न उठाए हैं,
शेरों की मादों के आगे कुछ ग्रामसिंह चिल्लाए हैं।
मेवाड-वंश कुल-कीर्तिकोष जिनके होने से दीपित है,
उन राणा सांगा के घावों पर कुछ भुनगे मँडराए हैं।
उनसे कह दो अब देश शौर्य की मुठ्ठी खूब तानता है,
उनसे कह दो यह देश महाराणा की ज्योति जानता है।
इतिहास तुम्हारी सरकारों का बंधक नहीं रहेगा अब,
उनसे कह दो यह देश लुटेरों को अब नहीं मानता है ॥
उनसे कह दो यह देश ऋण��� है ऐसे पुण्य-प्रवाहों का,
यह देश ऋणी है वीर शिवा के परम प्रतापी छावों का।
उनसे कह दो वे राजनीति का गुणा भाग घर में रक्खें,
यह देश ऋणी है महाराणा सांगा के अस्सी घावों का॥” #MaharanaSanga
राष्ट्र नायक, भारतीय स्वाभिमान व शौर्य के अप्रतिम प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा संग्राम सिंह जी (राणा सांगा) की जन्मजयंती पर कोटि-कोटि नमन।
#RanaSanga#राणा_सांगा
मेजर शैतान सिंह भाटी राजपूत छात्रावास अजमेर में 2 अप्रैल को समाज द्वारा आयोजित हुए मेरे जन्मदिवस कार्यक्रम पर समाज के गरीब तबके के हक की लड़ाई EWS आरक्षण का केंद्र सरकार भी राजस्थान की तर्ज पर सरलीकरण करें, इसकी लडाई लड़ने के संकल्प के साथ समा�� को आव्हान किया।
EWS आरक्षण के केंद्र में सरलीकरण की लड़ाई EWS वर्ग लड़ेगा।
#JusticeForEWS
देशहित और जनहित में किए काम की वजह से हमारे ऊपर आज FIR हुई ,
आप सब जो मुझे पर्सनली नहीं जानते, सबने आज मेरा बहुत साथ दिया , मुझे कई लोगों के मैसेजेस आए , कई लोगों ने फंड देने की बात कही , कई वकील भाइयों और बहनों ने लीगल हेल्प करने के बात कही ,
आप सभी लोगों का हृदय की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद , आज मुझे ऐसा महसूस हुआ कि हमने आप लोगों को कमाया है , हमें किसी प्रकार के फंड की जरूरत नहीं है, जो काम हम कर रहे हैं वो कोई भी एक मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन से कर सकता है,
हमारी FSSAI और उनके अधिकारियों से कहना चाहते हैं कि हम किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार हैं , आप लोगों ने पिछले कई वर्षों में इतनी गलतियां की हैं ,आज देश में बढ़ते कैंसर , डायबिटीज, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के लिए आप लोग जिम्मेदार हैं ,
आप लोगों ने FIR में ये कहीं नहीं लिखा कि आरोप गलत हैं, आप लोगों को चिंता इस बात की है कि डॉक्यूमेंट्स कैसे लीक हो गए , अगर आप लोगों में दम है तो पब्लिक के सामने आकर बताइए कि आरोप गलत हैं,
वरन��� अगले कुछ दिनों में हम स्टेट फूड डिपार्टमेंट और FSSAI की पोल खोलते रहेंगे और मुकदमा लड़ते रहेंगे।जय हिंद जय भारत । BEST OF LUCK FSSAI
जब भी हम भारत के पूर्व राजघरानों के पाग दस्तूर (दस्तारबंदी), होलिका दहन, राजतिलक या शस्त्र पूजन जैसे रिवाज़ टीवी या सोशल मीडिया पर देखते हैं, हम तुरंत उन्हें “feudal mindset” यानी "सामंती रिवायत" कहकर खारिज कर देते हैं, लोकतंत्र का हवाला देते हुए उसकी आलोचना करते हैं। बिना ज़्यादा सोचे-समझे ये मान लेते हैं कि ये सब सिर्फ सामंतवाद, पिछड़ेपन और पुराने ज़म���ने की सोच की निशानी है।
लेकिन ज़रा खुद से पूछिए कि जब शाहरुख खान, सलमान खान या अमिताभ बच्चन अपने घर की बालकनी से “दर्शन” देते हैं, हजारों लोग नीचे इकट्ठा होकर उनका इंतज़ार करते हैं, तो वो क्या है?
इतिहास उठा कर देखें तो अकबर से लेकर शाहजहां तक बादशाह “झरोखा दर्शन” दिया करते थे। बादशाह महल की खिड़की से जनता को दर्शन देते थे, उनकी फरियाद सुनते थे। ये सिर्फ रस्म नहीं थी, ये सत्ता दिखाने और वैधता बनाने का तरीका था। यहाँ तक कि औरंगज़ेब ने भी इसे कुछ समय तक जारी रखा। आज फर्क सिर्फ इतना है कि ताज और गद्दी की जगह "कैमरे" और "फैन-क्लब" आ गए हैं।
सवाल सीधा है : जब यही “दर्शन संस्कृति” फिल्मी सितारे करते हैं तो वो devotion और fandom बन जाता है, लेकिन वही चीज़ अगर कोई असली राजघराना करे, अपने महलों किलों की चारदीवारी में करे, तो भी उसे feudal hangover कहकर क्यों कोसा जाता है? या तो दोनों पर बराबर सवाल उठाए जाएं… या फिर मान लीजिए कि दिक्कत राजाओं और उनकी व्यवस्थाओं में नहीं, आपकी "selective" और पक्षपातपूर्ण सोच में है।
जयपुर के जिला कलेक्टर और लेखक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी की राजस्थानी पुस्तक "भरखमा" के लिए साहित्य अक���दमी पुरस्कार की घोषणा की गई है।
यह राजस्थानी भाषा प्रेमियों के लिए भी हर्ष का विषय है। बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं
@Jksoniias
शेखावाटी संस्थापक राव शेखाजी की मूर्ति शेखावाटी में नहीं लगेगी तो क्या पाकिस्तान में लगेगी
पहाड़ पर मूर्ति क्या समस्या दे रही है इन विशेष समाज के कुछ कंटकों को
सीकर जिले के गांव सामी का मामला ..
I visited the Chittorgarh Fort when I was 10, on a family holiday.
Have never been back.
But I should.
Because when I checked online, it turns out it’s the largest fort in the world!
Approximate Global Ranking:
🥇 Chittorgarh Fort, India ~700 acres (2.8 sq. km)
🥈 Kumbhalgarh Fort, India ~1,100 acres (4.5 sq. km), walls 36 km long
🥉 Nanjing City Wall, China
Yes, Kumbhalgarh is the second largest in the world.
(Chittorgarh and Kumbhalgarh are fort cities, not boundary walls.
They enclosed self-sufficient communities and were built to withstand sieges, not to demarcate empires.)
And yet, they rarely appear on the ‘must-visit’ lists for global travellers.
They’re not even on the extended Rajasthan “Golden Circuit”:
Jaipur → Jodhpur → Jaisalmer → Udaipur.
We need to tell their stories differently.
“A kingdom that refused to yield. A fort that never fell.”
Illustrate these stories through specialised experiences:
sunset drives along the ramparts, private storytelling sessions, and expanded comfortable accommodation.
We already have a Club Mahindra at Kumbhalgarh, and we’re pleased to have helped build its popularity.
Perhaps it’s time for one at Chittorgarh too.
#SundayWanderer
(Aerial view of Chittorgarh Fort courtesy @MayankRighteous )