समांतर रेखाएं कभी नहीं मिलती समानता चाहिए तो एक निश्चित दूरी को अपनाना ही पड़ेगा और अगर साथ चाहिए तो किसी को तो हल्का सा झुकना(मुड़ना) ही पड़ेगा। साथ और सहारे में यही अंतर होता है।
ध्यान से पढ़ना... यही जीवन का सार है...
ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि समय के साथ बहुत सी चीज़ें अपनी अहमियत खो देती हैं :-
चालीस की उम्र तक आते-आते पढ़ाई - लिखाई का फर्क कम हो जाता है,डिग्रियाँ दिखाने का दौर पीछे छूट जाता है।
पचास के बाद सुंदरता और साधारण रूप में ज़्यादा अंतर नहीं रह जाता,उम्र अपने निशान दिखा ही देती है।
साठ की उम्र में ऊँचे-नीचे पद का महत्व कम हो जाता है,रिटायरमेंट के बाद सब एक जैसे हो जाते हैं।
सत्तर की उम्र में बड़े-छोटे घर का फर्क मिटने लगता है,इंसान सीमित जगह में ही सुकून ढूँढ लेता है।
अस्सी की उम्र में धन की मात्रा उतनी मायने नहीं रखती,खर्च करने की इच्छ�� और क्षमता दोनों कम हो जाती हैं।
नब्बे की उम्र में जागना और सोना भी लगभग एक जैसा लगता है,समय का एहसास ही बदल जाता है।
इसलिए जीवन को सरलता से जीना सीखिए। हर चीज़ में उलझने के बजाय उसे स्वीकार करना ही असली समझदारी है।
आखिर में हर किसी को इसी राह से गुजरना है,यही जीवन का सच है।
सुकून के लिए बहुत ज़्यादा नहीं चाहिए, थो��़ा सा खाना और पहनने को कपड़े काफी हैं, लेकिन अगर मन अशांत हो, तो चाहे कितनी भी दौलत और सुविधाएँ हों, कभी संतोष नहीं मिलेगा।
यही है जीवन की असली सच्चाई।
@Radhemahwa
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कोहबर की उस शर्त पर न्योछार हो जाऊं ,
तुम बनो चौबेछपरा मैं बलिहार हो जाऊं।
सोन नदी के पानी सा मन हिलोरे मारे ,
बूढ़े बरगद जैसा प्रेम भीतर जड़ें पसारे।
दीपासत्ती चौरे पर जाकर शीश नवाऊँ ,
नदिया के उस पार संग तुम्हारे जाऊ���।
१/२ ...
वेदनाओं के अश्रुजल से हमनें सींची प्रेम की क्यारियां ,
जिन��े चैत्र में चटके सिंदूरी पलाश।
दो अलग गोलार्द्धों पर रहकर की हमनें एक साथ प्रार्थनाएँ ;
ईश्वर हमें मिलाएंगे किसी समय की मानक रेखा पर।
प्रेम का भूगोल स्वयं ईश्वर गढ़ते हैं।
🕊️♥️
तुम्हारे हिस्से का
जब वसंत आएगा
एक बार में ले जाएगा
जीवन के सारे पतझड़
दुःख इस बात का है
उसके आने तक
शाय़द न बचे
मुझमें मेरा हिस्सा
और वसंत का मोह.
- कविराज
मेरे प्रिय!
तुम्हारा प्रेम कितना अलग है
मेरी आँख खुली तो मैंने पाया
अभी तुम बस यहीं थे,
मेरे करीब
तुमने हल्के से मुस्कराकर
मेरे माथे पर अपने होंठ रखे
मेरे गालों को अपनी हथेली में पकड़ा
���र पूछा,"अब कैसे हो?"
जवाब में,
बस तुम्हारे सीने में सिमट गई मैं
और फिर जरा सी दिन की आहट से
मेरी नजरों से ओझल हो गए।
और इसी तरह दिन में
कोई एक दो हजार बार आते,जाते रहते हो तुम
तुम्हारा प्रेम यक़ीनन पार्थिव नहीं है
"दैवीय है "
तुमने मुझे सिखाया कि प्रेम में प्रतीक्षा नहीं होती
प्रेम तो सिर्फ जिया ��ाता है
श्वास की तरह
महसूस किया जाता है,सीने में आती - जाती लय के साथ
तुमने सिखाया है कि बिना देह के प्रेम मुमकिन है
तुम्हारे चुंबन, देह पर नहीं
आत्मा पर महसूस होते हैं
तुम्हारे प्रेम में प्रतीक्षा नहीं है।
तुम्हारे प्रेम में, शब्द नहीं हैं।
तुम्हारे प्रेम में आकुलता नहीं है
तुम्हारे प्रेम में शोर नहीं है
तुम्हारे प्रेम में जीवन है
तुम्हारे प्रेम में खुशी है
तुम्हारे प्रेम में ठराव है
तुम्हारे प्रेम में प्राण हैं
सदैव के लिए सिर्फ तुम्हारी
#zindagi
मैंने हताशा में,
किसी के कंधे पर सर नहीं टिकाया
कभी किसी के लगकर गले,
दुःख में रोया नहीं ज़ार-ज़ार
नहीं साझा कर पाया कभी
एक भी बात की पूरी आधी बात
ज़रूरत के वक़्त, नहीं मांग सका मदद
और मदद मांगते वक़्त
मोल ले बैठा एक अपराध-बोध।
कइयों को यक़ीन है
कि मैं उनका दोस्त हूँ
मेरा भी कोई दोस्त है
मैं इतने यक़ीन से नहीं कह सकता।
-शैल त्यागी बेज़ार
सुबह की सबसे पहली रौशनी जब खिड़की से उतरती है, ���ो लगता है जैसे वो तुम्हारा नाम लेती हुई आई हो। तुम जैसे नींद से नहीं, किसी रेशमी एहसास से जागती हो। तुम्हारे चेहरे पर वो हल्की-सी थकी मुस्कान, मानों रात भर चाँद ने तुम्हारी पलकों पर कोई गीत टाँका हो और अब वो गीत तुम्हारे होठों की कोरों पर ठहर गया है।
मैं चुपचाप तुम्हें देखता हूँ जैसे कोई तपस्वी किसी दुर्लभ दृश्य में लीन हो जाए बिना किसी शब्द, बिना किसी स्पर्श सिर्फ तुम्हारे होने की खूबसूरती को जीते हुए। तुम्हारी नींद में ढुलकती पलकों के नीचे कोई दुनिया पलती है, इतनी शांत, इतनी मधुर जैसे वहाँ वक़्त भी तुम्हारे स्पर्श का इंतज़ार करता हो।
तुम्हारा यूँ सुबह-सुबह मुस्कुरा देना ये कोई मामूली बात नहीं है, ये किसी कल्पना का यथार्थ ���न जाना है। जैसे बरसों से अधूरी पड़ी कोई कविता अचानक पूरी हो जाए, जैसे धूप पहली बार किसी पेड़ की सबसे ऊँची टहनी पर उतरे और वहीं से तुम्हारी हँसी गूंजने लगे।
हर सुबह जब तुम होती हो, तो लगता है जैसे दिन ने तुम्हें छूकर जन्म लिया हो। तुम्हारे होने से सुबह एक समय नहीं रहती, वो एक ख़ास एहसास बन जाती है, एक ऐसी छुअन जो दिल की गहराई से उठती है और आत्मा तक उतर जाती है।
इसलिए मैं हर सुबह तुम्हें वैसे ही मुस्कुराते देखना चाहता हूं जैसे जीवन ने एक बार फिर खुद को तुम्हारे नाम पर लिखा हो। तुम यूँ ही मुस्कुराती रहो कि हर सुबह तुम्हारे चेहरे से शुरू हो और मैं हर सुबह तुम्हें जीने का नया बहाना पा जाऊँ।
- @Raghvendra_101
तुम मेरे जीवन में उस शांत और सुकून भरे पल की तरह हो जो दिन भर की भाग-दौड़ के बाद मिलता है। तुम्हारी आवाज़, तुम्हारी हँसी, और तुम्हारा मेरे पास होना... सब कुछ मेरे लिए जादू से कम नहीं है।
- @chastemonk