मैं तुम्हें नहीं समझा सकता। मैं किसी को नहीं समझा सकता कि मेरे अंदर क्या चल रहा है। हर लम्हा मेरे अंदर एक अजीब सी ख़लिश रहती है। पहले मैं ऐसा बिल्कुल नहीं था। मैं बदल गया हूं। मैं मोह से मुक्त होना चाहता हूं। मैं अपनी सारी इच्छाओं का गला घोट चुका हूं। मैं मृत सा महसूस करता हूं।
क्या ऐ सूरज तेरी औक़ात है इस दुनिया में
रात के बाद भी इक रात है इस दुनिया में
शाख से तोड़े गए फूल ने हँसकर ये कहा
अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में
~कुँअर बेचैन साहब