राजनीति,मानवता और सहायता में विश्वास, गलत के लिए विद्रोह मेरा स्वभाव है,संघपरिवार की बेटी, भावुकता और प्रेम से ही मानवता जीवित है,सनातन धर्म एक ही है।।
2.65 लाख डॉक्टरों में से आधे न्यूनतम अंक (36%) नहीं ला सके। GC/EWS का कटऑफ 262 रहा। 256 को शून्य, अंतिम रैंक में इम्प्रूवमेंट रही। अब अंतिम रैंक पाने वाला -40 की जगह -19 पर आ चुका है। @narendramodi को नमन कीजिए क्योंकि उन्हीं की कृपा से यह सब संभव हो पा रहा है। दलीत-पीड़ीत डॉक्टर बन रहा है।
2.65 लाख डॉक्टरों में से आधे न्यूनतम अंक (36%) नहीं ला सके। GC/EWS का कटऑफ 262 रहा। 256 को शून्य, अंतिम रैंक में इम्प्रूवमेंट रही। अब अंतिम रैंक पाने वाला -40 की जगह -19 पर आ चुका है। @narendramodi को नमन कीजिए क्योंकि उन्हीं की कृपा से यह सब संभव हो पा रहा है। दलीत-पीड़ीत डॉक्टर बन रहा है।
मातंग, भंगी, भुइयाँ, मुसहर, डोम, बाल्मीकि जैसी जातियाँ अपने ही जाति समूह में आरक्षण से वंचित हैं क्योंकि इन समूहों के डोमिनेंट कास्ट उनका आरक्षण खा जाते हैं।
‘जितनी आबादी उतना हक’ सबसे पहले तो SC/ST/OBC में होना चाहिए। सवर्ण तो 30-32% हैं, मुसलमान 15%, अन्य अल्पसंख्यक 3% हैं।
And, in exactly opposite way as well, chatua giroh is pumping money to unleash rabid dogs (with verified handles and 1-10 followers) to target those who are rightfully raising their voices against shitty policies of BJP and Modi.
मादरणीय चटुआ सेल,
सिर्फ़ इसलिए की @ajeetbharti , @neha_laldas , @talk2anuradha इनलोगों की बातें फैक्चुअल और लॉजिकल है जिनका तुमलोगों के पास कोई उचित डिफेंस या उत्तर नहीं है तुम लोग इनपे पर्सनल अटैक कर रहे हो,इनकी फ़ोटोज़ मॉर्फ़ करके उल्टा सीधा कमेंट सेक्शन में लिख कर इनको बदनाम करने की कोशिश कर रहे हो तो तुमको बता दूँ की ये लोग तुम्हारी तरह फंडेड या प्रायोजित नहीं है,तो इनको घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता तुम्हारी घटिया हरकतों से।
बस सनद रहे की हम GCs इनको ऑर्गेनिकली सपोर्ट करते है इनलोगो को और हम देख रहे की तुम लोग भद्दी भद्दी गालियां और बे बुनियाद बातें लिख रहे हो इनको बदनाम करने के लिए,ये टुच्ची हरकतों से तुम्हारे बाप महामानव गोभी जी की जातिवादी राजनीति,जाति आधारित आरक्षण और गोभी एक्ट के माध्यम से किया जा पाप छुपने वाला नहीं है।
महामारी की तरह फैलने वाला गोभी एक्ट निर्दोष सामान्य वर्ग और ओबीसी पर लगाया जा रहा है वो पोस्ट और वीडियो के माध्यम से सबके सामने लाया जाता रहेगा तब तक जब तक ये एक्ट पूरी तरह से समाप्त नहीं कर दिया जाता,जिससे तुम्हारे बाप गोभी जी का फ़र्ज़ी हिंदुत्व वाला चेहरा सामने आ जाएगा।
Did you know?
National Education Policy (NEP) 2020, identifies SCs, STs & OBCs as groups that require focused attention because of historical & educational disadvantages.
It proposes measures such as:
-Targeted scholarships
-Conditional cash transfers -Transport assistance
-Improved educational infrastructure
-Focused educational interventions
Means caste is also a factor in education!!
Not only this, NEP 2020 also identifies religious and linguistic minorities as groups that may face educational disadvantages. & Proposes targeted interventions for them as well.
Ab iske liye kisko blame karna hai??
पूरे NCERT से लग रहा है कि हिंदू शब्द को push out किया जा रहा है। अगर कोई decision लिया भी जा रहा है तो वो बस ब्राह्मणों और ब्राह्मणवाद को निशाना बनाया जा गया है। हर चीज में एक जाति को push किया गया है।
अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और ऐसे लोगों का, उनके विचारों का सबसे बड़ा शत्रु था, ब्राह्मण था। उसी संदर्भ में मोदी सरकार और पुस्तकें लिखने और अपडेट करने वाली समिति का vision NCERT पुस्तकों में आसानी से दिख जाएगा।
इसलिए जब मैं कहता हूँ कि भाजपा ने केवल ध्यान नहीं "नहीं" दिया, समझ रहे हैं? बल्कि इन्होंने purposefully शिक्षा व्यवस्था की डैश मार ली है। कायदे से मारी है, मार के चबूतरा बना दिया है।
IIT Bombay का ब्राह्मणवादी camera, AI से calculator को smartphone में बदल देता है!
Camera का AI engine पहले चेहरा आधार database से match करके जाति जानता है, फिर दलित का calculator mobile phone बना देता है और सवर्ण का phone calculator!
IIT Bombay में Professors बनने में Reservation नहीं है, इसलिए Dalit अधिक हैं, ये तर्क ही गलत आंकड़ों पर खड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट के Indira Sawhney Judgment में भी Professor, Defence, Scientist, Pilot जैसे महत्वपूर्ण पदों को Reservation से बाहर रखने की बात स्पष्ट है। फिर मोदी सरकार ने IIT और IIM में Reservation Roster लागू करने को कहा।
कुछ प्रो-बुद्ध या प्रबुद्ध लोगों ने कहा है कि IIT बॉम्बे में प्रोफ़ेसर्स बनने में रिजर्वेशन नहीं है, इसलिए दलित ही अधिक मर रहे हैं। पहले तो यह आँकड़ा ही किसी आरक्षणधारी से रिसर्च करके निकलवाया गया है, या हम लोगों ने रामदास अठावले को सीरियसली लेना आरम्भ कर दिया है।
सत्य यह है कि चाहे आत्महत्या की दर हो या ड्रॉप आउट की, सवर्णों की संख्या सर्वाधिक है। वैसे, जिस इंदिरा साहनी जजमेंट को ये लोग माथे पर लेकर घूमते हैं, उसी में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि चाहे प्रोफ़ेसर्स हों, डिफेंस हो, गंभीर शोध हो, सुपरस्पेशियलिटी डॉक्टर हों, वैज्ञानिक हों, पायलट हों या इसी तरह के अन्य तकनीकी पद, इनमें आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
यानी सुप्रीम कोर्ट भी मानता है कि आरक्षण से गुणवत्ता घटती है और उन्हें टाइमपास जगहों पर रख सकते हैं, जिससे जो भी डैमेज हो, वह नियंत्रित करने योग्य हो। पर हाँ, माननीय यशस्वी मोदी जी ने IIT और IIM को कहा कि चाहे जो भी हो, आप लोग आरक्षण रोस्टर लागू करो।
दोनों संस्थानों ने कहा कि उन्हें सुपरस्पेशियलिटी मानकर छूट दी जाए। मोदी जी ने कहा, नहीं, दलित भी, OBC भी प्रोफेसर बनेंगे, योग्यता की कौन सी बात है? योग्यता वैसे भी अपर कास्ट की नोशन ऑफ़ प्यूरिटी से आती है। इससे जो डैमेज हो रहा है, या होगा, उसका पता जब तक चलेगा, तब तक देश बर्बाद हो चुका होगा। उसको देखने के लिए झुनझुना बाँटने वाला बचता नहीं।
मोदी जी के हिंदुत्व पर प्रश्न उठने लगे तो त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू के बाद अब भगवा जैकेट भी निकल आया।
परफॉर्मेटिव हिंदुत्व की पूरी तैयारी है, ताकि लोगों के बीच हिंदू हृदय सम्राट वाला भाव बना रहे।