छात्र की समस्या का समाधान करना सरकार का कर्तव्य है, केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार को संज्ञान लेकर छात्र को छात्रवृत्ति देनी चाहिए और यह जांच करनी चाहिए !
विषयः छात्रवृत्ति के आधार पर "जीरो फीस" पर हुए प्रवेश के बावजूद संस्थान द्वारा जबरन फीस जमा कराने के दबाव से मुक्ति/माफ करने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि में सुधीर कुमार, पुत्र श्री राकेश कुमार, अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से संबंध रखता हूँ। मैं वर्तमान में फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), फुर्सतगंज, अमेठी-रायबरेली में एमबीए द्वितीय वर्ष का छात्र हूँ। मेरे माता-पिता गुड़गांव (हरियाणा) में दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जिसके कारण मैंने अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा हरियाणा बोर्ड से उत्तीर्ण की है।
प्रवेश के समय संस्थान द्वारा मुझे छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत "जीरो फीस" (जीरो फि) आधार पर प्रवेश दिया गया था। परंतु, हरियाणा बोर्ड से उत्तीर्ण होने के कारण मेरा आवेदन यूपी छात्रवृत्ति पोर्टल पर स्वीकृत नहीं हो सका तथा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (एनएसपी) पर संस्थान द्वारा नहीं कराया गया।
जब छात्रवृत्ति का आवेदन नहीं हो सका, तो मैंने संस्थान प्रशासन को इसकी जानकारी दी। उस समय संस्थान द्वारा मुझे यह पूर्ण
आश्वासन दिया गया कि "आप अपनी पढ़ाई जारी रखें, आगे हम फीस/स्कॉलरशिप की समस्या को देख लेंगे।" परंतु अब दो सेमेस्टर बीत जाने (लगभग आधे से ज्यादा कोर्स पूरा होने के बाद) तीसरे सेमेस्टर में संस्थान द्वारा मेरे साथ धोखा और छल-कपट किया जा रहा है। जबकि मैंने समस्त शैक्षणिक प्रपत्र संस्थान में जमा कर दिए थे, तो संस्थान द्वारा शुरुआती (3/4) माह / प्रथम सेमेस्टर में ही जांच करके मुझे बता दिया जाता कि आपकी स्कॉलरशिप नहीं आएगी तथा आपको खुद से फीस देनी होगी, तो मैं स्वयं संस्थान में प्रवेश नहीं लेता। मुझे अंधेरे में रखा गया।
संस्थान के पूर्ण आश्वासन के आधार पर मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और प्रथम वर्ष के दोनों सेमेस्टर (प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर) सफलतापूर्वक पूरे कर लिए और तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई जारी है। परंतु अब तीसरे सेमेस्टर में संस्थान प्रशासन द्वारा मुझ पर पूर्ण फीस जमा करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है तथा स्पष्ट रूप से धमकी दी जा रही है कि "फीस दो, वरना कॉलेज मत आओ" और मुझे कॉलेज से निकालने की धमकी दी जा रही है।
एक अत्यंत निर्धन श्रमिक परिवार से होने के कारण एमबीए (2 वर्ष कोर्स) की फीस लगभग 5 लाख से ज्यादा है, जो कि इतनी बड़ी राशि चुकाना मेरे व मेरे परिवार के लिए पूर्णतः असंभव है।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मेरी अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति, अनुसूचित जाति वर्ग से होने तथा संस्थान द्वारा दिए गए आश्वासन को ध्यान में रखते हुए, फीस माफ/समायोजित कराने हेतु संबंधित संस्थान एफडी के शिक्षा निदेशक/अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की कृपा करें, जिससे मेरी आगे की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके और मेरा भविष्य आपकी दया से सुरक्षित हो सके। मैं सदा आपका आभारी रहूंगा।
छात्र की समस्या का समाधान करना सरकार का कर्तव्य है, केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार को संज्ञान लेकर छात्र को छात्रवृत्ति देनी चाहिए और यह जांच करनी चाहिए !
विषयः छात्रवृत्ति के आधार पर "जीरो फीस" पर हुए प्रवेश के बावजूद संस्थान द्वारा जबरन फीस जमा कराने के दबाव से मुक्ति/माफ करने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि में सुधीर कुमार, पुत्र श्री राकेश कुमार, अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से संबंध रखता हूँ। मैं वर्तमान में फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), फुर्सतगंज, अमेठी-रायबरेली में एमबीए द्वितीय वर्ष का छात्र हूँ। मेरे माता-पिता गुड़गांव (हरियाणा) में दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जिसके कारण मैंने अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा हरियाणा बोर्ड से उत्तीर्ण की है।
प्रवेश के समय संस्थान द्वारा मुझे छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत "जीरो फीस" (जीरो फि) आधार पर प्रवेश दिया गया था। परंतु, हरियाणा बोर्ड से उत्तीर्ण होने के कारण मेरा आवेदन यूपी छात्रवृत्ति पोर्टल पर स्वीकृत नहीं हो सका तथा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (एनएसपी) पर संस्थान द्वारा नहीं कराया गया।
जब छात्रवृत्ति का आवेदन नहीं हो सका, तो मैंने संस्थान प्रशासन को इसकी जानकारी दी। उस समय संस्थान द्वारा मुझे यह पूर्ण
आश्वासन दिया गया कि "आप अपनी पढ़ाई जारी रखें, आगे हम फीस/स्कॉलरशिप की समस्या को देख लेंगे।" परंतु अब दो सेमेस्टर बीत जाने (लगभग आधे से ज्यादा कोर्स पूरा होने के बाद) तीसरे सेमेस्टर में संस्थान द्वारा मेरे साथ धोखा और छल-कपट किया जा रहा है। जबकि मैंने समस्त शैक्षणिक प्रपत्र संस्थान में जमा कर दिए थे, तो संस्थान द्वारा शुरुआती (3/4) माह / प्रथम सेमेस्टर में ही जांच करके मुझे बता दिया जाता कि आपकी स्कॉलरशिप नहीं आएगी तथा आपको खुद से फीस देनी होगी, तो मैं स्वयं संस्थान में प्रवेश नहीं लेता। मुझे अंधेरे में रखा गया।
संस्थान के पूर्ण आश्वासन के आधार पर मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और प्रथम वर्ष के दोनों सेमेस्टर (प्रथम एवं द्वितीय सेमेस्टर) सफलतापूर्वक पूरे कर लिए और तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई जारी है। परंतु अब तीसरे सेमेस्टर में संस्थान प्रशासन द्वारा मुझ पर पूर्ण फीस जमा करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है तथा स्पष्ट रूप से धमकी दी जा रही है कि "फीस दो, वरना कॉलेज मत आओ" और मुझे कॉलेज से निकालने की धमकी दी जा रही है।
एक अत्यंत निर्धन श्रमिक परिवार से होने के कारण एमबीए (2 वर्ष कोर्स) की फीस लगभग 5 लाख से ज्यादा है, जो कि इतनी बड़ी राशि चुकाना मेरे व मेरे परिवार के लिए पूर्णतः असंभव है।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मेरी अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति, अनुसूचित जाति वर्ग से होने तथा संस्थान द्वारा दिए गए आश्वासन को ध्यान में रखते हुए, फीस माफ/समायोजित कराने हेतु संबंधित संस्थान एफडी के शिक्षा निदेशक/अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की कृपा करें, जिससे मेरी आगे की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके और मेरा भविष्य आपकी दया से सुरक्षित हो सके। मैं सदा आपका आभारी रहूंगा।
कर्मठ शिक्षक,कठोर डयूटी और ये आग बरसता हुआ आसमान।
El के स्थान पर शिक्षकों को देय ग्रीष्म अवकाश में भी गांव गांव घूम धूप में कार्य करेंगे शिक्षक।
आदरणीय @myogiadityanath
जी @thisissanjubjp जी
जनगणना में कार्यरत शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश देने की कृपा करें।
#EarnedLeave_For_Census
ये बजरंग दल और करणी सेना वाले तब क्यों नहीं बाहर आते जब हिन्दू लड़कियों के बल@त्कार होते हैँ.,
कट्टर सनातनी लड़की ने बजरंग दल और करणी सेना वालों की हेकड़ी निकाल दी..!!👏👏
मैं चाहता हूं देश की हर बेटी प्रियंका भारती जी जैसी बहादुर बने !✊
लाइव टीवी पर मनुस्मृति को फाड़ कर रख दी फ़ायर ब्रांड प्रवक्ता प्रियंका भारती जी।
बहुत खूब @priyanka2bharti जी 🔥🔥
जय भीम
जय संविधान
जय बिरसा
“UGC लाकर गधों को घोड़ा बनाओगे।
तुम्हारी नस्लों की नस्लें टूटकर बिखर जाएँगी,
फिर भी तुम सवर्णों का रोआँ नहीं उखाड़ पाओगे।”
UGC के नए प्रावधान का विरोध कर रहे सवर्णों को बस आप सुन लीजिए।
बाक़ी, समझदार के लिए इशारा काफ़ी होता है।
UGC लागू होना अब बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है..!!
UGC में जाति, लिंग, धर्म के आधार पर भेदभाव के साथ साथ महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
UGC का विरोध करने वाले न केवल जातिवादी हैं बल्कि महिला विरोधी भी हैं।
#बिहार
👉🏾 गाड़ी में लिखा है शंकराचार्य फलाना ठिमका, भारत जोड़ो यात्रा, सनातन धर्म सर्वोपरि, और गाड़ी के अंदर 450 लीटर देशी शराब।
👉🏾 यह मामला गया जिले फतेहपुर थाना क्षेत्र का है समर भाई ने ग्राउण्ड रिपोर्ट करके वीडियो सोशल मीडिया में शेयर किया।
सैल्यूट हैं ऐसे पुलिस अधिकारी को,
देश में 50 ऐसे अधिकारी हो जाएं तो 50% अपराधी अपराध के नाम से कांप जाएंगे।
“मजाक चल रहा है यहाँ पर”, झांसी रेंज IG ने निरीक्षण के दौरान देखा कि 6 महीने पुराने रेप मामले में कुछ हुआ नहीं।
फिर क्या हुआ सुनिए।
पहली बार कोई IAS अधिकारी कॉलेजियम खिलाफ बोला है...
बहुजन समाज SC ST OBC को खुलकर साथ देना चाहिए !
जाति के कारण संतोष वर्मा को दबाया जा रहा है उनके खिलाफ कार्यवाही की गई क्योंकि उन्होंने अंतर्जातीय विवाह के समर्थन में बोला था !
जय भीम, जय संविधान
#santoshverma
हम लोग जन्म से सर्वश्रेष्ठ है 😂😂
कोई भी आविष्कार खोज नही किया फिर भी तुम कैसे सर्वश्रेष्ठ उच्च हो सकते हो 😂😂😂
तो फिर BSD वालों जन्म से तुम लोग सर्वश्रेष्ठ पूजनीय कैसे हो गये बे 😂😂😂😂
भारत के लोगों को कब तक मूर्ख बेवफुक बनाया जाएगा अब 😡😡
🚨 चुनाव आयोग आख़िर चाहता क्या है?
पहले सरकार हमें और हम सरकार को साबित कर सकते थे हम उसी देश के वासी है जिसमें गंगा बहती है।
चुनाव आयोग ने वोट की लुटिया में गंगा भी डुबो दी है नागरिकों का अस्तित्व भी।
सुप्रीम कोर्ट और सरकार दोनों बंदरों की तरह चुप बैठे है और गधा ज्ञान को चुनाव आयोग किसी कथा की तरह सुना कर चला गया।
अब सरकार जब टैक्स मांगे तो उसी से पूछना पड़ेगा वह पहले साबित करे उसने टैक्स किस देश के नागरिक से मांगा है।
चुनाव आयोग के इस कुकर्म जैसे व्यवहार पर समाज ने चुप्पी साध ली है ऐसी गाली पर जो सबके बाप दादाओं को दी है चुनाव आयोग ने।
#Democracy #TaxPayersRights #ElectionCommissionOfIndia #IndianPolitics #SupremeCourt
माननीय @sonker_ragini जी द्वारा,
उत्तर प्रदेश के 15-20 लाख टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण प्रशिक्षु शिक्षकों की पीड़ा सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने के लिए आपका हृदय तल से आभार व्यक्त करते है..🙏
#प्राथमिक_शिक्षक_भर्ती
28 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ा है यह आंकड़ा नहीं है बल्कि सरकार की नाकामी का आईना है
सरकार सिर्फ स्कूल बंद नहीं कर रही है बल्कि बच्चों भविष्य खराब कर रही है
बड़े दुख की बात है देश की जनता ने ऐसी सरकार को चुना है
उत्तरप्रदेश के बड़बोले नेता केशव प्रसाद मौर्या को सिराथू से हरा कर लखनऊ में कुर्सी से उतार कर स्टूल पर बैठने वाली,
पल्लवी पटेल ने स्कूल मर्जर पर जो सवाल उठाया है बिल्कुल सही है।