🏵️जय श्री कृष्णा🏵️
आपसी सहयोग और एक-दूसरे पर निर्भरता प्रकृति का एक महत्वपूर्ण नियम है। प्रकृति में हर जीव और वस्तु एक-दूसरे से जुड़ी होती है।यह नियम विनम्रता और संबंधों के महत्व को सिखाता है। एक-दूसरे का साथ देकर ही हम जीवन की यात्रा को सुंदर और सफल बना पाते हैं।
Use both👇👇
गीता अध्याय-7,श्लोक-06
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय ।
अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥
भावार्थ : सारे प्राणियों का उद्गम इन दोनों शक्तियों में है। इस जगत् में जो कुछ भी भौतिक तथा आध्यात्मिक है, उसकी उत्पत्ति तथा प्रलय मुझे ही जानो।
तात्पर्य : जितनी वस्तुएँ विद्यमान हैं, वे पदार्थ तथा आत्मा के प्रतिफल हैं। आत्मा सृष्टि का मूल क्षेत्र है और पदार्थ आत्मा द्वारा उत्पन्न किया जाता है। भौतिक विकास की किसी भी अवस्था में आत्मा की उत्पत्ति नहीं होती, अपितु यह भौतिक जगत् आध्यात्मिक शक्ति के आधार पर ही प्रकट होता है। इस भौतिक शरीर का इसलिए विकास हुआ क्योंकि इसके भीतर आत्मा उपस्थित है। एक बालक धीरे-धीरे बढ़कर कुमार तथा अन्त में युवा बन जाता है, क्योंकि उसके भीतर आत्मा उपस्थित है। इसी प्रकार इस विराट ब्रह्माण्ड की समग्र सृष्टि का विकास परमात्मा विष्णु की उपस्थिति के कारण होता है। अतः आत्मा तथा पदार्थ मूलतः भगवान् की दो शक्तियाँ हैं, जिनके संयोग से विराट ब्रह्माण्ड प्रकट होता है। अतः भगवान् ही सभी वस्तुओं के आदि कारण हैं। भगवान् का अंश रूप जीवात्मा भले ही किसी गगनचुम्बी प्रासाद या किसी महान कारखाने या किसी महानगर का निर्माता हो सकता है, किन्तु वह विराट ब्रह्माण्ड का कारण नहीं हो सकता। इस विराट ब्रह्माण्ड का स्रष्टा भी विराट आत्मा या परमात्मा है। और परमेश्वर कृष्ण विराट तथा लघु दोनों ही आत्माओं के कारण हैं। अतः वे समस्त कारणों के कारण हैं।
जब क्षीरसागर मथा जा रहा था…
सबने अमृत माँगा, कोई स्वर्ग माँगा, कोई शक्ति…
पर जब कमल पर माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं,
तो तीनों लोकों ने एक साथ सिर झुका दिया
और मौन में बस एक ही स्वर गूँजा…
"माँ… आप ही तो सबकुछ हो" 🥹🙏
उस पल भगवान विष्णु ने बिना कुछ कहे
अपनी छाती खोल दी…
और माँ ने कदम बढ़ाकर
उनके हृदय में सदा के लिए स्थान ले लिया।
तब से विष्णु का वक्षस्थल खाली नहीं रहा
क्योंकि माँ लक्ष्मी ने कहा था,
"जहाँ नारायण, वहाँ लक्ष्मी" 💛
और जब बलि ने सब कुछ दान कर दिया,
तब भी माँ ने उसे राखी बाँधकर
अपना भाई बना लिया…
क्योंकि माँ का प्यार कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाता।
वो दानवीर को भी गले लगाती हैं
जो सच्चे मन से एक बार "माँ" कह दे 🥀
आज भी माँ कमल पर नहीं,
सच्चे हृदय में विराजती हैं…
बस एक बार पुकार लो,
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी नमः
माँ दौड़ी चली आएँगी 🌸🙏
आज के दिन, सिर्फ़ धन नहीं,
माँ का वो आँचल माँगो जो कभी छूटे नहीं।
जय माँ लक्ष्मी…
जय श्री विष्णुप्रिया…
जय आदि शक्ति 🙏
Like, Retweet, Share and Bookmark !
माँ की कृपा आपके घर जरूर आएगी 🌺✨
डमरू की नाद (आवाज) में अद्भूत क्षमतायें.....!!
सनातन धर्म संस्कृति मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है! आत्मा इस जगत का कारण है!
🏵️जय श्री कृष्णा🏵️
आपसी सहयोग और एक-दूसरे पर निर्भरता प्रकृति का एक महत्वपूर्ण नियम है। प्रकृति में हर जीव और वस्तु एक-दूसरे से जुड़ी होती है।यह नियम विनम्रता और संबंधों के महत्व को सिखाता है। एक-दूसरे का साथ देकर ही हम जीवन की यात्रा को सुंदर और सफल बना पाते हैं।
Use both👇👇