Nepalis we’ve met are hungry for change and have high expectations. Younger ones in particular are now keenly aware of their power and ability to hold those in power to account.
Balen and the RSP will be conscious of that too, as they usher in a new era, and forge an uncharted path for #Nepal.
Lots of lessons learned by our team as we’ve travelled the country @andrewclarance@premboominathan
Analysis here 👇
https://t.co/NXSwVHvJhX
Watch this incredible documentary by @divyaconnects and @premboominathan as they gain rare access into the world of ‘Godwoman’Radhe Maa: A look into faith, fear, and controversy... https://t.co/ygh23aBNuP via @YouTube
Why do hundreds believe in them? Watch our difficult and disturbing exploration into the world of so called #godmen#godwomen#RadheMaa
Superbly filmed and edited by @premboominathan
राधे माँ: बाबाओं के बीच उभरी 'देवी माँ' की अनकही कहानी
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राधे माँ के नाम से मशहूर सुखविंदर कौर, उन कुछ महिलाओं में से एक हैं जो भारत में फैलते बाबाओं के संसार में जगह बना पाई हैं.
भक्ति, भय, अंधविश्वास और रहस्य की इस दुनिया तक पहुँच हासिल करना मुश्किल है. बीबीसी राधे माँ की इसी दुनिया में दाख़िल हुआ और इसकी परत दर परत खोली.
रिपोर्ट: @divyaconnects
वीडियो: @premboominathan
दो जान, एक रेस: ब्लाइंड रनर और गाइड रनर
भारत की पैरालंपिक एथलीट की कहानी. जो देख नहीं सकतीं, वो मेडल तक कैसे पहुंचती हैं?
पेरिस 2024 से पहले किसी भी दृष्टि बाधित भारतीय महिला धावक ने पैरालंपिक खेलों में मेडल नहीं जीता था. वो बदला जब सिमरन शर्मा और रक्षिता राजू पेरिस पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई कर गईं. लेकिन जीतने के लिए उन्हें चाहिए थे ऐसे गाइड रनर, जो उनकी स्पीड और दौड़ने के तरीके से मेल खाते हों. जो धावक देख नहीं सकते या थोड़ा देख सकते हैं वो गाइड रनर के साथ दौड़ते हैं. लेकिन भारत में गाइड रनर मिलना आसान नहीं है. पैरा-एथलीट के जीतने पर उन्हें मेडल तो मिलता है. उसके अलावा मदद बहुत कम मिलती है. बीबीसी ने सिमरन और रक्षिता के साथ वक्त गुज़ारा और उन दोनों के साझे अनुभव से समझने की कोशिश की कि पुरुषों के वर्चस्व वाले खेल जगत में महिला और विकलांग होने की क्या-क्या चुनौतियां हैं?
वीडियो: @divyaconnects और @premboominathan
#BBCISWOTY #ChangeTheGame
“हम भारत के मुसलमान” की तीसरी कड़ी में सलीम की कहानी और सलीम जैसे कई दूसरे लोगों की कहानी जो ना हौसला खोते हैं ना ज़िद - नफ़रत की आँधी में प्यार पर भरोसा करने की ज़िद - आप भी देखें
When you lose family, home and employment on being targeted for your religious identity, how do you find hope and strength. Salim tells us in the third part of our series - We, the #Muslims of #India
- shot/edited by @premboominathan
फ़रवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़के. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई जिनमें से दो तिहाई मुसलमान थे.
धार्मिक ध्रुवीकरण के इस माहौल में जिनका सब कुछ खो गया वो आज कहां हैं?
हमारी विशेष सिरीज़ ‘हम – भारत के मुसलमान’ के इस तीसरे भाग में मुसलमान समुदाय में ख़ौफ, हौसले और उम्मीद की बात.
रिपोर्टर – दिव्या आर्य (@divyaconnects )
कैमरा-एडिटिंग – प्रेमानंद भूमीनाथन (@premboominathan )
A Suitable Boy author Vikram Seth says a sequel - A Suitable Girl - is very much on the way... he just cannot say when! Watch this interview for this and more on politics, poetry and his remarkable translation of the Hanuman Chalisa https://t.co/5w6I4edKSo
The two issues raised in the name of conservatism in Islam - #TripleTalaq and #Hijab ban - how did they change #Muslim women’s lives? Part2 of our series
मुसलमान औरतों की ज़िंदगी तीन तलाक़ और हिजाब विवाद के कारण कितनी बदल गई?
बीबीसी की ख़ास सिरीज़ ‘हम – भारत के मुसलमान’ के दूसरे भाग में बात औरतों की.
रिपोर्टर – दिव्या आर्य (@divyaconnects )
कैमरा-एडिटिंग – प्रेमानंद भूमीनाथन (@premboominathan )
कोई इस्लाम धर्म की हिदायत को मान कर अपनी पहचान बनाती, कोई इसी धर्म के क़ानून से पहचान खोती, धर्म को औरतों की नज़र से देखने की कोशिश - “हम भारत के मुसलमान” सीरीज की दूसरी कड़ी में तीन तलाक़ और हिजाब विवाद के चश्मे से मुसलमान औरतों की ज़िंदगी की परतों को खोलती @divyaconnects@premboominathan की रिपोर्ट (... https://t.co/KEkebvzehk via @YouTube
Jisu and Ayesha are two children from two different world - one is from one of the poorest district in Bihar- Araria and the other is from an affluent city near Delhi. They are born in Muslim families - how has been their experience of growing up in past few years - has their relationship changed with their non Muslim friends ? How do their parents deal with the growing ‘othering’ of the community ? An excellent report by @divyaconnects and @premboominathan . भारत में बड़े होते मुसलमान बच्चे !
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One #Muslim child was told they would have to leave the country, another made to chant Jai Shri Ram. What’s it like to raise a Muslim child in #india right now?
धर्म के आधार पर बढ़ते तनाव, हिंसक वारदातों और कमज़ोर होते सामाजिक ताने-बाने में भारत के अल्पसंख्यक मुसलमान खुद को कहां खड़ा पाते हैं?
हमारी विशेष सिरीज़ ‘हम – भारत के मुसलमान’ के पहले भाग में बात बच्चों की.
देश के इस माहौल का मुसलमान बच्चों पर क्या असर पड़ रहा है?
बच्चे उससे कैसे जूझ रहे हैं, मां-बाप उन्हें कैसे समझा रहे हैं?
बिहार के अररिया शहर और राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में दो बच्चों और उनकी मांओं के अनुभवों से जानिए क्या है अब भारत में मुसलमान बच्चे को बड़ा करने का मतलब?
रिपोर्ट: दिव्या आर्य (@divyaconnects )
शूट-एडिट: प्रेम भूमीनाथन (@premboominathan )
Thread: Can there be one way of being a #Hindu in today's #India ? Watch a thought-provoking 5 part series which brings the different journies of people we met across India. Here is @rasikaagashe - a Hindu who says not in my name.
Camera- @premboominathan
https://t.co/I53Y3wTGkD
एक ऐसी महिला जिन्हें जैसे-जैसे ज़िंदगी में नई जानकारी और अनुभव मिलते चले गए, वैसे-वैसे उन्होंने अपने हिंदू होने का तरीका और मतलब बदला.
बचपन में संघ की शाखा में जाने, कॉलेज में हिंदूवादी पोस्टर्स लगाने से लेकर एक मुसलमान से प्यार और शादी के बाद समानता और मानवता के मूल्यों पर नाटक बनाने तक. रसिका का जीवन सफर क्या बताता है?
देखिए 'हिंदू धर्मः मेरा मर्म' सिरीज़ की पांचवीं और आख़िरी कड़ी -
क्या एक तरीका हो सकता है हिंदू होने का?
रिपोर्टर – दिव्या आर्य
कैमरा-एडिटिंग – प्रेम बूमिनाथन
@divyaconnects@premboominathan
बिना पंडित और बिना सिंदूर की शादी...
पूरे देश में सिर्फ तमिलनाडू में होती है ऐसी शादी, जिसे सेल्फ रिस्पेक्ट मैरिज कहते हैं. और यहां इसे हिंदू मैरिज एक्ट में मान्यता भी प्राप्त है. क्यों करते हैं लोग ऐसी शादी?
वीडियो: @divyaconnects@premboominathan
ना मंगलसूत्र, ना फेरे, ना पंडित और ना ही कोई धार्मिक रीति-रिवाज़, पूरे देश में सिर्फ़ तमिलनाडु में होती है ऐसी शादी... यानी सेल्फ रिस्पेक्ट मैरिज और यहां इसे हिंदू मैरिज ऐक्ट में मान्यता भी प्राप्त है. क्यों करते हैं लोग ऐसी शादी? क्या कोई एक तरीका हो सकता है हिंदू होने का? बीबीसी की विशेष सिरीज़ हिंदू धर्म: मेरा मर्म, का ये चौथा भाग – शादी - ना सिंदूर, ना मंगलसूत्र और ना पंडित. जल्द https://t.co/9U67a8CLkE और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर
@divyaconnects@premboominathan
हिंदू धर्म में दलितों के अपनी जगह बनाने और ना बना पाने पर धर्म को छोड़ने का विरोधाभासी अनुभव है. धर्म की जातिगत सीढ़ी में सबसे निचले पायदान पर खड़ा आम दलित क्या तेज़ी से उभरती एक हिंदू पहचान का हिस्सा बन पा रहा है?
रिपोर्ट: @divyaconnects@premboominathan