आधुनिक एवं विकसित भारत के प्रणेता, विश्व पटल पर माँ भारती का गौरव पुनर्स्थापित करने वाले यशस्वी एवं कर्मठ प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं!
#HappyBdayPMModi
महान शिक्षाविद्, भारत रत्न से सम्मानित, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
Heartiest greetings and warm wishes on the joyous occasion of #Onam
May the colours and celebrations of Onam usher in a season of peace, prosperity and new beginnings for every family.
Let this auspicious festival strengthen the bonds of unity and fill our lives with joy and abundance.
#Onam2026
#HappyOnam
The devastating situation caused by the severe floods in Nepal is deeply distressing. Reports of casualties, including Indian nationals, are extremely heartbreaking and concerning.
My deepest condolences to the families who have lost their loved ones. I pray to Lord Pashupatinath for peace to the departed souls, strength to the grieving families, and the safe return of all those who are still missing.
May everyone affected by this tragedy find courage and hope in these difficult times.
विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष, आजीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित जीवनव्रती कार्यकर्ता माननीय श्री ए. बालाकृष्णन जी का देहावसान अत्यंत दुःखद है।
मा. बालाकृष्णन जी ने अपना संपूर्ण जीवन स्वामी विवेकानंद जी के विचारों, राष्ट्र निर्माण, सेवा, संस्कार और चरित्र निर्माण के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया था। उनका तपस्वी जीवन, सादगी और समाज के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा विवेकानंद केंद्र परिवार और उनके असंख्य अनुयायियों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति दें।
ॐ शांति।
शहरों का विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे और हर परिवार के जीवन में खुशहाली आए। इसी सोच को साकार करने के लिए नगर निकाय चुनाव-2026 के भाजपा के संकल्प पत्र में GYAN को विकास के केंद्र में रखा गया है।
आवास एवं मूलभूत सुविधाओं से लेकर रोजगार, कौशल, उद्यमिता, महिला सुरक्षा और सुविधाओं तक, हर क्षेत्र में शहरवासियों के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प लिए गए हैं। GYAN के सशक्तीकरण को आधार बनाकर हम ऐसे शहरों के निर्माण करेंगे,
Heartiest birthday wishes to Shri @prafulkpatelJi, Administrator of Dadra & Nagar Haveli, Daman & Diu and Lakshadweep.
May the year ahead bring you abundant happiness, good health and continued success.
संस्कृतं भारतस्य गौरवम्।
श्रावण मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले संस्कृत दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
संस्कृत ने भारत की ज्ञान-परंपरा को हजारों वर्षों से समृद्ध किया है। यह केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान, चिंतन, दर्शन और संस्कृति की जीवंत धरोहर है। वेदों से उपनिषदों तक, श्रीमद्भगवद्गीता से रामायण और महाभारत तक तथा आयुर्वेद, व्याकरण, गणित, खगोल और साहित्य से लेकर अध्यात्म तक; भारतीय मनीषा के असंख्य अमूल्य ग्रंथ संस्कृत में रचे गए हैं।
महर्षियों और आचार्यों की तपस्या से समृद्ध संस्कृत ने “वसुधैव कुटुम्बकम्”, “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे सार्वभौमिक विचारों के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को प्रेम, शांति, समरसता और कल्याण का संदेश दिया है।
यह भाषा हमारी जड़ों से जोड़ने वाली कड़ी होने के साथ-साथ तर्क, ज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय की परिचायक है। संस्कृत का संरक्षण और इसका नई पीढ़ी तक विस्तार हमारी समृद्ध सभ्यता, संस्कृति एवं ज्ञान-विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है।
पुनः आप सभी को विश्व संस्कृत दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#विश्व_संस्कृत_दिवस
भाई - बहन के आपसी स्नेह और भरोसे के पर्व #रक्षाबंधन पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह त्योहार हमारे देश की समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और अपनत्व के अटूट रिश्तों का प्रतीक है।
रक्षाबंधन केवल एक रक्षा-सूत्र बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, प्रेम और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प का उत्सव है।
हमारी संस्कृति में रक्षा का अर्थ केवल बहन की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान, उनकी गरिमा, उनके अधिकारों और उनके सपनों की रक्षा का भी संकल्प है।
जब समाज की हर बेटी, हर बहन सुरक्षित, सम्मानित और आत्मविश्वास से आगे बढ़ेगी, तभी हमारा राष्ट्र और अधिक सशक्त बनेगा।
इसी संदेश के साथ एक बार फिर सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#रक्षा_बंधन
#HappyRakshaBandhan
संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी की ‘लाड़ली बहनों’ के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया। इस अवसर पर बहन वीरांगना मधुबाला जी ने भी रक्षा-सूत्र बांधा।
कलाई पर बंधी यह राखी केवल स्नेह और विश्वास की डोर नहीं, बल्कि नारी सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षित भविष्य के प्रति संकल्प का पवित्र प्रतीक है। बहनों का स्नेह मेरे लिए आशीर्वाद है और उनके सुख-दुख में सदैव सहभागी बनना मेरा दायित्व।
हमारी बहनें परिवार की आत्मीय धुरी होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला भी हैं। ईश्वर से कामना है कि मेरी हर बहन का जीवन सम्मान, प्रसन्नता और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण हो तथा उनके सपनों को निरंतर नई ऊँचाइयाँ मिलें।
स्नेह, विश्वास और अटूट अपनत्व के इस पावन पर्व रक्षाबंधन की सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
#RakshaBandhan
राष्ट्रीय खेल दिवस पर सभी देशवासियों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज हम महान हॉकी खिलाड़ी और भारत के गौरव मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर उनका स्मरण करते हैं। ‘हॉकी के जादूगर’ के रूप में प्रसिद्ध मेजर ध्यानचंद जी की अद्भुत प्रतिभा, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के लिए खेलने की भावना ने भारतीय हॉकी को विश्व पटल पर गौरवपूर्ण पहचान दिलाई।
मेजर ध्यानचंद जी की विरासत आज भी देश के करोड़ों युवाओं को यह प्रेरणा देती है कि प्रतिभा को मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से निखारकर असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।
आज भारतीय खेल जगत उनकी इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए निरंतर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। हाल ही में Glasgow 2026 Commonwealth Games में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
इन वर्षों में Cricket, Chess, Athletics, Badminton, Shooting, Boxing, Weightlifting और Para-Sports सहित अनेक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन देश की बढ़ती sporting excellence को दर्शाता है। भारत की खेल प्रतिभा अब केवल कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अनेक स्पर्धाओं में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रही है।
आइए, इस National Sports Day पर हम संकल्प लें कि खेलों को केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि Discipline, Fitness, Team Spirit, Excellence और Nation Building का माध्यम बनाएंगे तथा देश के हर प्रतिभावान खिलाड़ी को आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे।
#NationalSportsDay
29 अगस्त 1947 - स्वतंत्र भारत के इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन, जब संविधान सभा ने देश के संविधान के प्रारूप को व्यवस्थित रूप देने के लिए सात सदस्यीय प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन किया।
यह समिति संविधान सभा द्वारा लिए गए निर्णयों के आधार पर संविधान के प्रारूप की समीक्षा करने, आवश्यक संशोधन सुझाने और उसे विधिक एवं व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए गठित की गई थी।
संविधान सभा में प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार प्रारूप समिति के मूल सात सदस्य थे -
Dr. B. R. Ambedkar, Alladi Krishnaswami Ayyar, N. Gopalaswami Ayyangar, Dr. K. M. Munshi, Saiyid Mohammad Saadulla, Sir B. L. Mitter, D. P. Khaitan
30 अगस्त 1947 को समिति की पहली बैठक हुई और Dr. B. R. Ambedkar को समिति का अध्यक्ष चुना गया। बाद में Sir B. L. Mitter के इस्तीफे के बाद N. Madhava Rau समिति के सदस्य बने। इसी तरह D. P. Khaitan के निधन के बाद T. T. Krishnamachari समिति के सदस्य के रूप में शामिल हुए।
प्रारूप समिति ने संविधान के विभिन्न प्रावधानों पर गहन विचार किया और उसके कार्य का परिणाम फरवरी 1948 में सामने आया, जब Draft Constitution of India, 1948 संविधान सभा के अध्यक्ष को प्रस्तुत किया गया। इस मसौदे में 315 Articles और 8 Schedules थे। इसके बाद इसे सार्वजनिक चर्चा के लिए उपलब्ध कराया गया और प्राप्त सुझावों एवं आलोचनाओं पर विचार किया गया।
इसके बाद संविधान सभा में मसौदे पर विस्तृत बहस और संशोधन हुए। 4 नवंबर 1948 को डॉ. अंबेडकर जी ने संविधान के मसौदे को संविधान सभा के समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया। अगले कई महीनों तक प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रावधान पर चर्चा हुई और अनेक संशोधनों पर विचार किया गया। अंततः 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए और 26 जनवरी 1950 को संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ।
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा के सदस्यों, विभिन्न समितियों, विशेषज्ञों, विधिवेत्ताओं और संविधान सभा में हुई लंबी एवं गंभीर बहसों के सामूहिक प्रयास का परिणाम था। फिर भी, इस पूरी प्रक्रिया में Dr. B. R. Ambedkar और Drafting Committee की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रही।
29 अगस्त हमें उस संवैधानिक यात्रा की याद दिलाता है, जिसमें स्वतंत्र भारत ने अपने लोकतांत्रिक भविष्य की नींव रखी। एक ऐसी व्यवस्था की, जिसका आधार न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे मूल्यों पर रखा गया। आज इस ऐतिहासिक दिवस पर संविधान सभा के सभी महान सदस्यों, संविधान निर्माताओं और उनके योगदान को नमन।
भारतीय लोकतंत्र के शुरुआती दौर में संसद की कार्यप्रणाली और संसदीय परंपराओं को आकार देने वाले जिन महान व्यक्तित्वों का योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा, उनमें सरदार हुकम सिंह जी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुशल राजनेता होने के साथ ही वे एक प्रखर विधिवेत्ता, उत्कृष्ट वक्ता और ऐसे पीठासीन अधिकारी थे, जिन्होंने निष्पक्षता, अनुशासन, सहमति और संसदीय मर्यादा को अपने आचरण से स्थापित किया।
सरदार हुकम सिंह जी भारत की संविधान सभा के सदस्य भी थे। बाद में प्रथम लोक सभा, द्वितीय लोक सभा और तृतीय लोक सभा के सदस्य भी रहे। तीसरी लोक सभा में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। वे ऐसे समय लोक सभा के अध्यक्ष बने, जब भारतीय संसद अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत कर रही थी और अध्यक्ष के निर्णय आने वाले दशकों की संसदीय कार्यप्रणाली के लिए उदाहरण बन रहे थे।
सरदार हुकम सिंह जी ने सदन के संचालन में कई स्वस्थ परंपराओं को स्थापित किया और संसदीय लोकतंत्र के प्रभावी संचालन के लिए सदन में अनुशासन तथा मर्यादा बनाए रखने को विशेष महत्व दिया। उनका मानना था कि संसद में सदस्यों को गरिमापूर्ण ढंग से अपने विचार रखने चाहिए और संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग भी उचित संसदीय तरीके से होना चाहिए।
हुकम सिंह जी संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के महत्व को गहराई से समझते थे। उनका प्रयास रहता था कि सदन की कार्यवाही केवल राजनीतिक टकराव का मंच न बने, बल्कि व्यवस्थित और सार्थक विधायी विमर्श का केंद्र रहे। तीसरी लोक सभा की शुरुआत के समय उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि जिस दिन लोक सभा अध्यक्ष का दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित करने का कार्यक्रम हो, उस दिन कोई स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) नहीं लिया जाए, ताकि दोनों सदनों के सदस्य केंद्रीय कक्ष में एकत्र होकर अध्यक्ष का संबोधन सुन सकें। सदन ने इस सुझाव को स्वीकार किया और यह संसदीय परंपरा आगे भी जारी रही।
यह छोटा-सा उदाहरण बताता है कि वे केवल तत्कालीन कार्यवाही को संचालित करने वाले अध्यक्ष नहीं थे, बल्कि दीर्घकालीन संसदीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए भी सोचते थे। लोक सभा अध्यक्ष के रूप में सरदार हुकम सिंह ने भारत की संसदीय परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न Commonwealth Parliamentary Conferences में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया तथा अमेरिका, तत्कालीन सोवियत संघ, मंगोलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के कई देशों का दौरा किया।
इस प्रकार उनकी भूमिका केवल भारतीय संसद तक सीमित नहीं थी; वे विश्व के सामने भारत की लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था के प्रतिनिधि भी बने। सरदार हुकम सिंह जी का जीवन हमें यह समझाता है कि संसदीय लोकतंत्र की मजबूती केवल कानूनों और संविधान के प्रावधानों से नहीं होती। उसे मजबूत बनाते हैं वे लोग जो नियमों का सम्मान करते हैं, विरोधी विचारों को सुनते हैं, निर्णयों में निष्पक्ष रहते हैं और पद की गरिमा को सर्वोच्च स्थान देते हैं।
लोक सभा के पूर्व अध्यक्ष और राजस्थान के राज्यपाल रहे सरदार हुकम सिंह जी की जयंती पर उन्हें स्मरण करना भारतीय संसदीय लोकतंत्र की उस परंपरा को नमन करना है, जिसमें निष्पक्षता, शालीनता, संवाद और संवैधानिक मर्यादा सर्वोपरि हैं। भारतीय संसद की संस्थागत परंपराओं को मजबूत करने वाले ऐसे महान संसदीय व्यक्तित्व का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
Heartiest congratulations to Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi ji on being honoured with the prestigious ‘Oliy Darajali Do’stlik’ Order, the highest state decoration of the Republic of Uzbekistan.
The honour is a testament to the deep trust, warmth and goodwill that define India-Uzbekistan relations, and to the Prime Minister’s steadfast efforts towards strengthening this enduring partnership.
@narendramodi
राजस्थान के उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा जी को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर से आपके स्वस्थ, समृद्ध और मंगलमय जीवन की कामना है।
@DrPremBairwa
भाद्रपद कृष्ण तृतीया 'कजरी तीज' पर सभी देशवासियों, विशेषकर माताओं-बहनों को हार्दिक मंगलकामनाएँ।
यह त्योहार माताएं बहिनें सुहाग की लंबी उम्र की कामना से रखती है। परिवार की खुशी,सुख-समृद्धि के मूल भाव और लोक-संस्कृति का सुंदर प्रतीक है। मेरे संसदीय क्षेत्र के बूंदी जिले में कजरी तीज का विशेष महत्व है। तीज के अवसर पर बूंदी में लगने वाला पारंपरिक मेला यहां की लोक-संस्कृति, कला, उत्सवधर्मिता और राजस्थान की जीवंत विरासत का अद्भुत दर्शन कराता है।
आज के दिन मेरी प्रार्थना है कि माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा सभी पर सदैव बनी रहे। सभी के लिए मंगल कामना।
#KajriTeej
#कजरी_तीज