देश को चलाने वाले इंसान होने चाहिए, जो इंसानियत का मतलब समझे, गुंगे बहरे तो जानवर भी होते हैं, जो फटी में वो भी बोलने लगते हैं!
News/Media !! Social Activist
एक वायरल वीडियो में मुंबई की एक मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया है कि वैध दस्तावेज़ होने के बावजूद उसका घर तोड़ दिया गया। उसका दावा है कि एक पड़ोसी ने बार-बार शिकायत की थी, जबकि आस-पास की इमारतों को नहीं छुआ गया। महिला ने मारपीट और पुलिस की निष्क्रियता का भी आरोप लगाया है।
पत्रकार: नेता जी, आपको अयोध्या से बहुत लगाव है. अब वहां दानपात्र चोरी हो रहा है. कितना गंभीर प्रकरण है?
बृजभूषण सिंह: अ��र मैं सत्य बोल दूंगा तो बहुत परेशानी में आ जाऊंगा, क्योंकि वो बहुत बड़े लोग हैं. इसलिए सत्य बोलने की हमारी हिम्मत नहीं है.
Location: Kanpur, Uttar Pradesh
A Muslim woman who went to Ursula Government Hospital to collect medication has alleged that she was asked to remove her hijab in order to receive the medicine; she further claimed that only Muslim women were being targeted.
Here is one more hate speech and call for boycotting Indian Muslims BJP leader Nazia Elahi Khan, Says "Hindus should stay vigilant and should boycott Muslims from Govt sector and Private sectors. Urges to boycott Muslims atleast for 2-3 years.
कुरावली, मैनपुरी उत्तर प्रदेश में वारिश अली की हत्��ा को वक्त बीत रहा है, लेकिन आरोपी अभिषेक भदौरिया और बिल्ला अब भी फरार हैं। न बुल्डोजर चला, न कोई सख्त कार्रवाई दिखी। ऊपर से आरोपी पक्ष का अमन प्रधान खुलेआम धमकियां दे रहा है।
क्या कानून का डर सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है?
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ये उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर में नगीना फाटक है,यहां पर कितनी बार एम्बुलेंस तक फंसी रह जाती है,जिसके कारण किसी परिवार का सदस्य जिला अस्पताल या अन्य अस्पता��� वक़्त पर नहीं पहुंच पाते और अपने परिजनों से बिछड़ जाते है.....
@RailwaySeva@drm_mb सिर्फ इतना अनुरोध है कि जिस समस्या के लिए हमने ये पोस्ट X के माध्यम से आप तक पहुंच���ने का कार्य किया है,उस पर जल्द से जल्द विचार हो? ताकि किसी भी परिवार के लिए दुख का विषय न बने। 🙏
यहां पर जल्द से जल्द फ्लाईओवर/अंडरपास का कार्य हो। रेलवे की ये सौगात क्षेत्रवासी हमेशा याद रख सके
दिल्ली, जहांगीरपुरी
बकरीद के दिन 26 वर्षीय मुस्लिम युवक मोहम्मद अरबाज़ की चाकू मारकर हत्या कर दी गई!
मृतक अरबाज़ के भाई को सुने-
"ईद के दिन, मेरे भाई ने या फिर उसके दोस्त सलमान ने, एक लड़के को दुकान से सिगरेट लाने को कहा!
इस पर लड़के ने कहा, ‘मैं तेरे बाप का नौकर हूं क्या’
इसके बाद अरबाज़ ने बच्चे को कहा, ‘कोई बात नहीं बेटे, तुम बच्चे हो, हम तुमसे कुछ नहीं कह रहे, तुम जाओ’
फिर उस लड़के ने अपने भाइयों ‘चीमा, सौरभ और अन्य को ले आया’
मेरे भाई अरबाज़ ने मामले को शांत करने की कोशिश की और माफी मांगी!
पर उनका इरादा मेरे भाई को जान से मारने का था और वे सभी हाथों में चाकू लिए आए थे!
और उन लोगों ने मेरे अरबाज़ की चाकू मारकर हत्या कर दी!
सौरभ उनमें मुख्य आरोपी था, लेकिन पुलिस ने उसे छोड़ दिया है!
मेरे अस्पताल पहुंचने के 10-15 मिनट बाद मेरे भाई की मौत हो गई"
नफरत ही तो है ये!
मुस्लिम के प्रति नफरत इस सरकार ने बढ़ाई है!
देश को बर्बाद कर दिया है इस नफरती सरकार ने!
कोई मीडिया इसपर छाती नहीं पीट रही!
मुस्लिम युवक की हत्या पर कोई आक्रोश नहीं!
उत्तर प्रदेश में न्याय का पैमाना आखि�� तय कौन कर रहा है?
गाज़ियाबाद में सूर्या हत्याकांड का आरोपी असद पुलिस एनकाउंटर में मार दिया जाता है, मीडिया में वाह-वाही सोशल मीडिया पर जश्न।
फिरोजाबाद में जितेंद्र पर आरोप है कि उसने एक मासूम बच्चे को ज़मीन पर पटक-पटक कर मार डाला, यहाँ न कोई प्राइम टाइम बहस हुई।
न कोई राष्ट���रव्यापी गुस्सा दिखा, न कोई "एनकाउंटर" की मांग, आरोपी को पैरों में गोली मारकर ज़िंदा गिरफ्तार कर लिया जाता है।
उत्तर प्रदेश में कानून का व्यवहार भी नाम देखकर बदल जाता है? क्या एनकाउंटर का रास्ता सिर्फ़ उर्दू नाम वालों के लिए सुरक्षित है?
गिद्ध मीडिया का आक्रोश भी पहचान देखकर तय होता है? क्या एक मासूम की जान की कीमत उसके हत्यारे के नाम से तय होगी?
हम हर अपराधी के लिए एक ही कानून चाहते हैं, या त�� सबको अदालत में पेश करो, या फिर मान लो कि इस देश में न्याय नहीं, पहचान के आधार पर अलग-अलग नियम-कानून रहे हैं। #UttarPradesh
अभी मैं जब यह वीड���यो देखा मेरे रोंगटे खड़े हो गए? ऐसी घटनाएं महिला सुरक्षा एवं सम्मान पर सवाल खड़े करतीं हैं, बगल में ही छोटा सा बच्चा बैठा है और उसके सामने ही पुरुष पुलिस द्वारा उसकी मां के लात मारी जा रही है? क्या ऐसे लोग पुलिस की नौकरी लायक हैं?
@KarishmaAziz_@bokaropolice वो देख चुके है कि ये कौम नंपुसक हो चुकी है,अंदर से कुछ नहीं है इनमें ,कम से कम बचाव कुछ तो हाथ पैर चलाते ये भी तीन थे,और एक और सामने दिख रहा है टोपी में।