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इससे अच्छा तो टूट जाता वो मन्नत का धागा,
जो मैंने हमारे प्रेम के लिए बांधा था ..
दुखद है ये देखना ..हर बारिश से उसका रंग
उड़ रहा हैं ..मानो तुम्हारा प्रेम कम हो रहा हो..!!
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सुनो !!
तुम्हारे होंठों का शीतल स्पर्श,
मेरे भीतर निर्मित करता है
एक झील सा धैर्य,
तुम्हारे सीने की गर्माहट देती है मुझे
एक ठोस चट्टानी भरोसा .. !!
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हाँ ...वैसे तो हुँ मैं गणित में कच्ची ..
पर एक बात बता दूँ ...उससे बात किए हुए
मुझे चार दिन .. सोलह घंटे ..बारह मिनट ..
और ये ही कुछ ..बीस सेकंड हो गए हैं !!
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