#लोकतंत्र_का_महापर्व
लोकतंत्र का महापर्व है तो महकेगा ही,
पंचायती हो, विधान सभा हो या हो लोकसभा।
छिप न सकेगा रंग लोकतंत्र का,
मतदाता तो अधिकारों का प्रयोग करेगा ही।
सरकारें तो आनी और जानी है,
फिर भी मतदाता का अधिकार तो ब्रह्मवाणी है।
पानी है तो बरसेगा ही,
आंख में हो या बादल में