सम्बन्ध, संगठन या समाज में किसी को तभी तक दुःख या दर्द दिया जा सकता हैं, जबतक वह निःस्वार्थ प्रेम करता है। इसलिए आपाधापी के जीवन में जो निःस्वार्थ भाव से जीवन या संगठन में जुड़ गए हैं। उन्हें संभालने और सहेजने की जिम्मेवारी खुद की भी होती है।
डॉ.अवनीश कुमार {प्रिंस}
श्री हरि विष्णु के दिव्य अवतार
और सनातन काल-चक्र
सत्य युग से कलियुग तक…
भगवान विष्णु का अवतरण मानवता की
रक्षा, धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश
करने के लिए होता है।
यह चित्र पूरी कथा को एक नजर में दिखाता
है — मत्स्य, कूर्म, नरसिंह, वामन, परशुराम,
राम, कृष्ण, बुद्ध… और अंत में कल्कि।
मुख्य अवतार और युग:
• सत्य युग: मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह
• त्रेता युग: वामन, परशुराम, श्रीराम
• द्वापर युग: श्रीकृष्ण, बलराम
• कलियुग: गौतम बुद्ध
• भविष्य: कल्कि अवतार (अधर्म का अंत)
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…
धर्म की रक्षाके लिए हर युग में भगवान आते हैं
इस चक्र को समझना ही
सनातन दर्शन की गहराई समझना है.
11 मई, 2026 से प्रारम्भ हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग - द्वितीय का समापन समारोह 4 जून को सायं 6:30 बजे होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध उद्योगपति पद्मभूषण श्री कुमार मंगलम बिरला होंगे तथा पू. सरसंघचालक डा. मोहन भागवत जी का उद्बोधन होगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण
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पर होगा।
अपनी आदतों में सकारात्मक परिवर्तन ही जागरूक नागरिक होने का पहला कदम है।
जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होता है, तभी सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता है।
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एक समाचार पत्र ने लिखा था “ संघ परिवार " संघ से प्रेरणा लेकर किसी भी क्षेत्र में कार्य करना, वास्तव में 'परिवार भाव' का ही प्रतीक है। संघ से जुड़े हुए सभी संगठनों में परिवार भाव है।
-मा. दत्तात्रेय होसबाले जी
सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
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