@Asharamjibapu__ मृत्यु के बाद जीव की सूक्ष्म अवस्था से लेकर तीजा, बारहवां और वार्षिक श्राद्ध तक की परंपराएं बनाई गई हैं, यह दर्शाता है कि हमारे संस्कार आत्मा की शांति और उसकी आगे की यात्रा को कितनी सुगमता प्रदान करते हैं। #AsharamjiBapu
आदमी मर जाने के बाद सवा मुहूर्त, सवा दो घंटा, मरा हुआ जीव मूर्छा में रहता है, सूक्ष्म शरीर में। फिर वो जागता है। फिर सोचता है कि क्या हुआ ? कैसे हुआ ? फिर वो मरा हुआ, ये शरीर मरा है और खुद सूक्ष्म शरीर से अपने शरीर को देखता है। घर वाले रोते हैं तो देखता है ,कि कौन आया ? कौन गया ? तीसरा होता है तो कुटुंबी आ जाते हैं, दूर दूर के आ जाते हैं, फलाना कैसे मरा ? ऐसा हो गया सिर में दर्द था, ऐसा हुआ, फलाना हुआ, जो भी निमित हुआ, हार्ट अटैक हो गया, ये हो गया, वो भाई आदमी तो अच्छ��� थे, भले थे, चलो भगवान उसकी सद्गति करें। वो सब अपने संबंध की जो तातें हैं, वो तोड़ के चले जाते हैं , ताकि ये कहीं भटके नहीं, आगे जाए! उसमें भी रह जाए तो फिर बारहवां किया जाता है। उसमें भी कहीं उसका रह जाए तो बारह महीने में एक दिन उसका श्राद्ध कर देते । ये हिंदू धर्म की बहुत सुंदर व्यवस्था।
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गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना और विसर्जन की परंपरा श्रद्धा से जुड़ी है। महाभारत में गणेशजी द्वारा व्यासजी की रचना लिखने की कथा मिलती है, जबकि दस दिवसीय लेखन और विसर्जन की कथा लोकमान्यता है। #ShreeGanesh
जिस विद्या से तुम्हारे चित्त में विश्रांति नहीं, जिस विद्या से तुम्हें भीतर का रस नहीं आ रहा वह विद्या नहीं, सूचनाएँ हैं । दुःख में डूबना, विरोध में डूबना या भगवान की स्मृति करके निर्लेप रहना यह अपने हाथ की बात है ।
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@Asharamjibapu__ नाम-स्मरण मन को विकारों से दूर कर प्रभु के प्रति भक्ति और शांति का मार्ग दिखाता है। यह सरल साधना जीवन में सकारात्मकता और आत्मिक शक्ति का संचार करती है।#AsharamjiBapuQuotes
सदियों से इस जीव के साथ जुडें हुए लुटेरे विकार इसक��� उठते-उठते गिरा देते हैं तो उस गिरने से बचने के लिए भगवान के नाम का उच्चारण है । भगवद् नाम उच्चारण कर्म नहीं अपितु पुकार मानी जाती है ।
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@AzaadBharatOrg रामायण का यह तात्विक दृष्टिकोण वाकई बहुत ही सुंदर और विचारणीय है। साधारण आँखों से दिखने वाले पात्रों के पीछे छिपा यह गहरा आध्यात्मिक और सांकेतिक अर्थ हमारे धर्म शास्त्र की सूक्ष्मता को दर्शाता है। #Ramayan#Hanuman#SanatanDharma
@Asharamjibapu__ संसार के मोह-माया को छोड़कर प्रभु-भक्ति में मन लगाने से व्यक्ति सभी ��ष्टों और दुखों से मुक्त होकर परम शांति प्राप्त कर सकता है। #AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ गजानंद (श्री गणेश) के निमित्त किया गया उत्सव मन को शांति, सकारात्मकता और दैवी कार्��ों में योगदान देने की प्रेरणा देता है। #AsharamjiBapuQuotes
गणेश की मूर्ति तो बनी। नाचते गाते विसर्जित की। निराकार प्रभु को साकार रूप में मानकर फिर साकार आकृति विस��्जित हुई। लेकिन उनका नाचना, कूदना, झूमना तुम्हारे दिल में कुछ दे गया। Rock और Pop Music से जो नाचते कूदते हैं उनको भी कुछ दे जाता है। Sexual आकर्षण, चिड़चिड़ा स्वभाव, जीवीनी शक्ति का ह्रास। लेकिन गजानंद के निमित्त जो नाचे, गाए, झूमे होंगे वो भी उत्सव तुम्हें दे जाता है, कि सुनो सब छान छान के रखो। दूर की सुगन्ध तुम्हारे पास होनी चाहिए। छोटे से छोटे आदमी का भी उपयोग करके अपना दैवी कार्य करो। #AsharamjiBapuQuotes
स्वधा देवी पितरों को तृप्त करने में समर्थ है, तो उसका मैं मंत्र बताऊंगा। उस मंत्र का उच्चारण आज करोगे और कोई श्राद्ध के निमित्त सूर्य को जल दे देगा और ये प्रार्थना ��रेगा, तब भी उनके पितर तर जाएंगे। कर्मकांडी शुद्ध ब्राह्मणों को खोजने का जमाना आज कम है, जो व्यसन ना करता हो, पान मसाला ना खाता हो। मैं मंत्र बोलता हूँ, लिखना चाहो तो लिख लेना।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा।
स्वधा नाम की देवी है, जो पितरों को तृप्त करने में सक्षम है।
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@Asharamjibapu__ कठिन परिस्थितियों और दुखों के समय में धैर्य, आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है बापूजी के सत्संग से।#AsharamjiBapu
कैसी भी दुखद अवस्था आए, कितना भी घना अंधेरा हो, सवेरा आता है। कितनी भी कष्टदायी अवस्था हो, घबराओ मत। ज्ञान के प्रकाश में जियो। आत्मा का कतई कुछ नहीं बिगड़ता, तुम हमेशा आत्मा परमात्मा के निकट हो।#AsharamjiBapu
बाली, सुग्रीव और हनुमान जैसे पात्रों में पशु-सदृश, मानवीय और दिव्य तत्व मिलते हैं। अंजना का अप्सरा से वानरी रूप पाना और कामरूपिणी होना बताता है कि यहां रूप स्थायी नहीं, कथा का तत्व महत्वपूर्ण है। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻
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भगवान स्वयं तो कभी-कभी प्रकट होते हैं और किसी किसी का, अहिल्या का, शबरी का, किसी किसी का उद्धार करते हैं लेकिन भगवन्नाम तो सदा गुरुओं के द्वा���ा प्रकट होता रहता है और कईयों का असंख्य लोगों का भला करता रहता है। तो भगवन्नाम भगवान से भी बड़ा माना गया है। 'राम न सकहिं नाम गुन गाई', भगवान भी भगवन्नाम की महिमा नहीं गा सकते, भगवन्नाम की महिमा इतनी सारी भगवान ने भर रखी है!
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बड़े आश्चर्य की बात है कि कुछ चीजें तो भारत में ही मिल सकती हैं दूसरे देशों में नहीं, गंगाजल भारत में, गंगा नदी ���ारत में, उपनिषद और भगवदगीता भारत में और आत्मा - परमात्मा का अनुभव किए हुए पुरुष धरती पर अगर खोजना है तो भारत में ही मिलेंगे।
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