किसी ट्रेनी IPS पर ₹1 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप सिर्फ एक अधिकारी के पतन की कहानी नहीं है। यह हमारे समाज के खोखले होते value system का भी आईना है।
हमने एक ऐसा माहौल बना दिया है जहाँ ईमानदार व्यक्ति को अक्सर अपनी ईमानदारी की कीमत प्रताड़ना, अपमान, तबादले, अकेलेपन और संघर्ष के रूप में चुकानी पड़ती है; जबकि भ्रष्ट और बेईमान व्यक्ति धन, प्रभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण हर जगह सम्मान पाता है।
फिर हम हैरान होते हैं कि भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है?
जिस समाज और व्यवस्था में ईमानदारी को punish किया जाएगा और बेईमानी को reward तथा social acceptance मिलेगी, वहाँ बेईमानी का flourish करना कोई आश्चर्य नहीं है।
भ्रष्टाचार केवल कानून की कमजोरी से नहीं पनपता,
वह तब पनपता है जब चरित्र से ज्यादा सफलता, ईमानदारी से ज्यादा पैसा और सिद्धांतों से ज्यादा प्रभाव को महत्व मिलने लगे।
व्यवस्था बदलने से पहले हमें यह तय करना होगा कि हम वास्तव में किसे सम्मान देना चाहते हैं—
ईमानदार व्यक्ति को या सफल बेईमान को।
क्योंकि कई लोग इसी काम के लिये इस सेवा में आते हैं। संविधानिक मूल्यों की हत्या करने, फ़र्ज़ी केस में फँसाने और सैंकड़ों करोड़ वसूलने। तभी तो सरकारें इन्हें ग़ुलाम समझने लग जाती हैं। वाक़ई पढ़ कर अफ़सोस हुआ।
जब ये IPS बने होंगे तो इनके माता पिता ने गांव में मिठाई बांटा होगा , आस पड़ोस के युवा इनसे प्रेरणा लिए होंगे,
लेकिन अब ट्रेनिंग में ही घुस लेकर मां बाप का सीना चौड़ा कर दिया।
इनका नाम राहुल बंसल हैं और ये 2022 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के ट्रेनी IPS अधिकारी हैं,
ट्रेनिंग के दौरान ही साइबर फ्रॉड के मैटर में 1 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगा हैं।
राजस्थान के रहने वाले राहुल बंसल ने IIT BHU से इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग के बाद SSC पास करके Income Tax में सर्विस किया और इसके बाद IPS बनें,
लेकिन अब रिश्वत के चक्कर में फंस गए हैं।
देश में अब IAS IPS जैसे बड़े पदों पर डायरेक्ट भर्ती बंद कर देनी चाहिए , क्योंकि इससे देश को फायदा कम नुकसान ज्यादा हो रहा हैं।
एथिक्स बस किताबी चीज हैं इनके लिए , जीवन में कभी अप्लाई नहीं करते हैं।
क्या किसी ट्रेनी IPS का घूस माँगते पकड़ा जाना अपवाद है? या असली अपवाद यह है कि वह पकड़ा गया?
अगर आप सोचते हैं कि देश में ज्यादातर IAS IPS ईमानदार हैं और बस कुछ लोग भ्रष्टाचार करते हैं, तो आप भ्रम में हैं। असली अपवाद भ्रष्टाचार नहीं, पकड़ा जाना है। असल अपवाद भ्रष्टाचार ना करना है ।
ज्यादातर लोग इन सेवाओं में अकूत पावर, पैसा और रुतबा पाने के लिए आते हैं। अकादमी और ट्रेनिंग से ही पोस्टिंग, पैसे और जुगाड़ की चर्चा शुरू हो जाती है। कौन सी पोस्टिंग “कमाई” वाली है, कहाँ कितना पैसा है और वहाँ पहुँचने का जुगाड़ क्या है। और यही हाल लगभग हर कमाई वाली सरकारी नौकरी का है।
जब पकड़ा जाना ही अपवाद है, तो भ्रष्टाचार करने का डर भी कहाँ रहेगा?
यही कारण है कि इस लॉबी को भ्रष्टाचार करने, टैक्सपेयर के पैसे और सरकारी संसाधनों की मनमानी लूट से राजाओं जैसी जिंदगी जीने और सैकड़ों करोड़ की संपत्ति खड़ी करने में कोई डर नहीं लगता। आखिर इनकी विजिलेंस भी इनकी अपनी ही लॉबी का अधिकारी देखता है। जिस व्यवस्था में आपकी जाँच करने वाला, आपके खिलाफ कार्रवाई करने वाला और आपको बचाने वाला तंत्र भी आपकी ही लॉबी के हाथ में हो, वहाँ भ्रष्टाचार का डर नहीं, भ्रष्टाचार के लिए सुरक्षित माहौल होता है।
अगर भ्रष्टाचार वास्तव में अपवाद होता, तो SP से लेकर DG तक मनमानी प्रशासनिक ताकत, पूरी गैंगिंग, पूरे पुलिस तंत्र और संसाधनों पर नियंत्रण होने के बाद भी पुलिस भारत की सबसे भ्रष्ट और क्रूर संस्थाओं में क्यों होती?
इसलिए जो पकड़ा गया, बस उसकी किस्मत खराब थी। नया था, इसलिए पकड़ा गया।
कुछ साल सिस्टम में रह जाता तो भ्रष्टाचार की रकम कैसे लेनी है, कैसे पहुँचानी है, कहाँ ठिकाने लगानी है, कौन किसको बचाएगा और खुलासा होने के बाद भी निर्लज्जता से आँखें दिखाते हुए कैसे बच निकलना है, यह सब सीख जाता।
और इनके इंटरव्यू?
मुझे तो लगता है वहाँ सबसे पहले यही देखा जाता है कि “देश सेवा”, “जनसेवा”, “समाज बदलने” जैसे झूठ कितने आत्मविश्वास से बोल सकते हैं।
@khurpenchh@VivekGa54515036@narendramodi@RahulGandhi
#IPS #IAS #Corruption #PoliceCorruption #PoliceReform #BureaucraticReform #भ्रष्टाचार #नौकरशाही #पुलिससुधार #Accountability #EmpoweredCitizens #StrongDemocracy
ब्रो इंटरव्यू में कह रहा है
और कुछ करप्ट लोगों की वजह से लोग पूरे सिविल सर्वेंट्स को बदनामी झेलनी पड़ती है💀💀
एक बार अपने भाई का बर्थ सर्टिफ़िकेट बनवाने के लिए पंचायत सचिव ने घूस ली थी जिससे ब्रो बहुत निराश हुई 💀💀
भाई अपने ही बारे में बता रहा था लेकिन सामने वाला
समझ नहीं पा रहा था💀💀
उत्तर प्रदेश में भी चुनाव से पहले “रेवड़ी”!
जिस पार्टी और सरकार ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के बिजली सब्सिडी का मजाक बनाया,उस पर बहस शुरू की,वही पार्टी इस मामले में अलग लेवल पर चली गई।
लेकिन इसका पॉजिटिव पहलू यह है कि अब हिंदू मुस्लिम राजनीति कर चुनाव जीतने का टाइम नहीं रहा!
This is a mock interview of Rahul Bansal, IPS trainee. Look at how he was concerned about corruption in the bureaucracy, how he himself had been a victim of it, and how he expressed anguish at it.
He is now under scanner for allegedly demanding and receiving ₹1 crore to settle a cyber-fraud case, as reported in the media. The complaint alleges the money was transferred in two ₹50-lakh instalments through hawala channels in May 2026. The complainant submitted alleged WhatsApp chats and call recordings as evidence. A Special CBI Court in Delhi has issued notices and sought an Action Taken Report from the Chhattisgarh DGP and CBI Director on what action has been taken regarding the allegations.
Meet Rahul Bansal,
A 2022-batch trainee IPS officer of the Chhattisgarh cadre who allegedly wanted ₹1 cr in bribes to settle a cyber fraud case.
The money was transferred to him through hawala channels in two instalments of Rs 50 lakh each in May 2026.
He has previously worked as an Income Tax inspector, so he has plenty of practice in bribery. Unfortunately, not enough to keep it quiet.
Millions of Indians spend years preparing for competitive exams, believing these services are for people with integrity.
Cases like this raise a disturbing question: if the enforcers of the law are themselves corrupt, who will protect ordinary citizens if they choose to abuse their power?
क्या तीसरे लिफ़ाफ़े को खोलने का वक़्त आ गया है?
तीन लिफाफों की कहानी:
मैनेजमेंट स्कूल्स में एक Three Envlopes Story काफी प्रचलित है.
एक सीईओ जब कंपनी छोड़ रहा था तो उसने नये सीईओ को तीन लिफाफे दिये और कहा जब संकट आए तो इन्हें बारी बारी से खोलना.
तीन महीने में सेल्स गिर गई, सीईओ की आलोचना होने लगी तब उसे पिछले सीईओ के लिफाफों की याद आई. उसने दराज से पहला लिफाफा निकाल कर खोला. अंदर एक लाइन लिखी थी "सारा दोष मुझ पर डाल दो".
उसने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और कहा सेल्स गिरने की वजह पिछला सीईओ था. सब बिगाड़ कर गया है – हम उसे ठीक कर रहे हैं.
सब मान गये और आलोचना बंद हो गई.
लेकिन घाटा कम नहीं हुआ और कुछ महीने में फिर आलोचना होने लगी. उसने फिर दराज खोली और दूसरा लिफ़ाफ़ा खोला. उस पर लिखा था Reorganise यानी बदलाव करो. उसने कुछ को हटाया, योजनाओं के नाम बदले. कुछ समय के लिए फिर लोग शांत हो गए और कंपनी के घाटे के बारे में सवाल पूछना बंद कर दिया.
लेकिन अगले क्वार्टर तक घाटा और बढ़ गया, चारों तरफ आलोचना बढ़ गई, इस्तीफे की बाते होने लगीं.
पिछले दो बार के तजुर्बों को देखकर उसने तीसरा लिफाफा खोला.
इस बार उसमें लिखा था अब आप तीन लिफाफे बनाइए.
गाजीपुर में वसूली करते पकड़े गए 3 नए सिपाही निलंबित!
◆ 2025 में लगी थी नौकरी, 2026 में सस्पेंड!
◆ आरोप है की पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के मरदह टोल प्लाजा पर ड्यूटी छोड़कर वाहनों से कथित अवैध वसूली कर रहे थे तीनों सिपाही
#Ghazipur | Ghazipur | Purvanchal Expressway
School slab collapses in Solapur, Maharashtra, injuring 13 students.
This is the state of schools where underprivileged kids study. You won’t see this happening in schools where politicians’ children study.
Are the lives of these kids any less valuable than those of politicians’ kids?
पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश ने गंभीर बिजली संकट देखी है। करे सालों बाद इतनी बिजली गई।
और प्रदेश के बिजली मंत्री की प्राथमिकता-राहुल गांधी हिंदी में विश्वविद्यालय लिख पाएंगे या नहीं!
"विपक्ष हंगामा कर रहा है तो संसद जाने का क्या मतलब है..."
ये गृह मंत्री का संसद को लेकर गंभीरता है?
अमित शाह जी इतने डरे और सहमे से क्यों नजर आ रहे है?
ये है उप्र में अपराध का सच्चा चेहरा। जब मुख्य नगरी गोरखपुर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं तो समझ सकते हैं किसके प्रश्रय में ऐसे दुर्दांत अपराधी पल-पनप रहे हैं।
नेता विपक्ष राहुल गांधी (अंग्रेज़ी में)
“पैलेट गन चलाने की इजाज़त क्या अमित शाह ने दी? अगर हाँ तो वे इस्तीफ़ा दें क्योंकि वे इसके दोषी हैं। अगर उन्होंने नहीं दी तो वे इस्तीफ़ा दें क्योंकि वे अक्षम हैं” (कि उनकी इजाज़त के बिना कैसे इस्तेमाल हो गया ये?)
The entire government - from Kiren Rijiju to Amit Shah - is parroting the same line: “We are ready to discuss the matter.”
But what “matter” have they agreed to discuss?
Are they willing to answer who authorised the shooting of our students?
Are they willing to discuss the looting of the Ram Mandir?
Is Modi willing to apologise for both?
The government does not get to be selective about which questions it will answer.
अमित शाह में संसद आने की हिम्मत ही नहीं है।
वो 20 दिनों से गायब हैं। अपने चैंबर में बैठे रहते हैं, लेकिन सदन में नहीं आते।
उनके काफिले में करीब 30 गाड़ियां चलती हैं, घर के आगे हजारों पुलिस वाले खड़े रहते हैं कि कोई बच्चा न आ जाए।
अमित शाह की इमेज का गुब्बारा फट चुका है, उससे हवा निकल चुकी है। अब जबरन उसमें हवा भरने की कोशिश की जा रही है।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi