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सत्य और धर्म का मार्ग कैसा होता है। विष्णु का यह अवतार, सिर्फ एक योद्धा या राजा नहीं था, बल्कि एक ऐसा जीवन था, जो हर मनुष्य को यह सिखाने के लिए था कि कैसे धर्म के पथ पर अडिग रहते हुए भी त्याग, समर्पण और करुणा को अपनाया जा सकता है।
प्रभु श्री राम जी का जन्म...
धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए, भगवान विष्णु ने धरती पर श्रीराम के रूप में अवतार लिया। इस अवतार के पीछे कई रहस्यमयी कारण और कर्तव्य जुड़े थे, जो राक्षसराज रावण, देवी सीता और स्वयं विष्णु के पूर्व जन्म से जुड़े हैं ।
भगवान विष्णु का श्रीराम के रूप में अवतार
भगवान विष्णु ने यह जानकर कि रावण को केवल एक मनुष्य ही पराजित कर सकता है, मानव रूप में श्रीराम का अवतार लिया। वह चाहते थे कि एक साधारण मानव के रूप में धरती पर जन्म लेकर धर्म की स्थापना करें और लोगों को यह सिखाएं
कहा जाता है कि माता सीता का पूर्व जन्म वेदवती के रूप में हुआ था, जिनके साथ रावण ने अनादर का व्यवहार किया था। उस समय वेदवती ने प्रतिज्ञा की थी कि वह अगली बार जन्म लेकर रावण के विनाश का कारण बनेंगी। इस प्रकार, देवी सीता का जन्म इसी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए हुआ।
माता सीता का पूर्व जन्म
माता सीता, जो श्रीराम की धर्मपत्नी थीं, वह भी भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी का अवतार थीं। एक अन्य कथा के अनुसार, माता सीता को धरती पर अवतरित होने का कारण यह था कि उनका रावण से एक गहरा आध्यात्मिक सम्बन्ध था।
राक्षस जन्म लिया, और उन्हें तीन जन्मों तक भगवान विष्णु के हाथों पराजित होने का वरदान मिला। रावण के रूप में यह उनका दूसरा जन्म था, जो कि उन्हें विष्णु के अवतार से पराजित होकर मोक्ष प्राप्त करने का भाग्य लेकर आया था।
यह माना जाता है कि रावण केवल एक क्रूर राजा ही नहीं था, बल्कि उसका भगवान विष्णु से एक आध्यात्मिक संबंध भी था। पौराणिक कथा के अनुसार, रावण और उसका भाई कुंभकर्ण पहले भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय थे। दोनों ने कुछ कारणों से ब्रह्मा जी के शाप से