न्यूजीलैंड में एक पत्रकार ने पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जवाब दिया कि भारत की ज्यादातर जनसंख्या देहाती है, उन्हें पसंद नहीं है कि उनका नेता पत्रकारों से बात करे।
हर बार एक नया बहाना 🤣🤣
आपको क्या लगता है कि तेल में गन्ने का जूस मिलाने का फैसला इस गैंडे ने खुद लिया है?
आपको नहीं लगता कि अंतिम फैसला तो वो दाढ़ी वाले उड़नखोर बूढ़े का ही रहा होगा?
तो फिर जवाब देने को अकेला गैंडा क्यों फंसे, बूढ़े को भी पकड़ो जब सैर सपाटे से वापिस आए 2-4 दिन के लिए।
मैं एक अज्ञात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन जी को 49 साल से जानता हूं, उनकी सादगी और भोलेपन की कहानी दुनिया कम जानती है। खुद उन्हें कुछ महीने पहले ही पता चला कि उनके पिताजी विधायक रहे हैं।
मुझे आज भी याद है कि 1986 में पहाड़गंज के पास Garstin Bastion रोड़ के एक 4x6 कमरे में हमारे 16 दोस्त एक ही चारपाई पर सोते थे। नितिन सबसे नीचे बिना करवट लिए पूरी रात दबा पड़ा रहता था, उसके हाथ में एक लंबा बाँस दे दिया जाता था, जिससे वो पूरी रात छत पे लगे दो पंखड़ियों वाले पंखे को घुमाता था।
जब अमीर घरों के लड़के महंगे जिम में व्यायाम कर रहे होते थे, हमारा नीतिनवा सड़क पर लोगों के पर्स छीनकर भागता था ताकि कार्डियो कर सके।
साउथ दिल्ली की एक संभ्रांत कन्या हमारे नीतिनवा की सादगी पर फिदा हो गई। उसने एक बार गिफ्ट में फेरेरो रोचर चॉकलेट गिफ्ट में दी तो हमारे नितिन भाई उन्हें सोने का सिक्का समझकर सुनार की दुकान पर बेचने चले गए ताकि दोस्तों के लिए दलिया और सत्तू खरीद सकें।
हमारे दोस्तों का कोई भी झगड़ा होता था, उसको नितिन ही निपटवाता था। झगड़ने वाले दोनों पक्ष अंत में मिलकर नितिन को ही कूट देते थे और अपना गुस्सा शांत कर लेते थे।
नितिन की ये सब यादें आज भी हमारे दिल में हैं, यूँही कोई नितिन नहीं बन जाता। छोटी सी खटिया से उठकर देश की राजनीति में खलबली मचा दी है हमारे नितिन ने।
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2021 में चंपत मंडली ने 'राम मंदिर निधि समर्पण' अभियान चलाया था, जिसके तहत भारत के आस्थावान हिंदुओं से मात्र 44 दिन में 2100 करोड़ का दान जुटा लिया था। फिर उसके बाद और उससे पहले का चंदा मिलाकर कुल 3500 करोड़ का अनुमानित चंदा ट्रस्ट के पास आया था।
अब तक मंदिर निर्माण का कुल खर्च 2000 करोड़ बताया गया है। मंदिर परिसर 107 एकड़ में फैला है, जिसमें से 70 एकड़ के करीब जमीन अनुदान में मिली है, मुख्य मंदिर परिसर लगभग 5 एकड़ में है। ज्यादा निर्माण कार्य इसी 5 एकड़ में हुआ है, बाकी कुछ और इमारतें भी बनी हैं, लेकिन कुल परिसर का 70% हिस्सा खाली है।
एक तुलना के लिए आप समझ लीजिए कि 2000 करोड़ की लागत से 50 किलोमीटर का 6 लेन का शानदार हाइवे बन जाता है, किसानों की जमीन अधिग्रहण का खर्च मिलाकर। मैं सिर्फ तुलना के लिए ये लिख रहा हूं, ये नहीं कह रहा कि मंदिर की जगह हाइवे बनना चाहिए। बल्कि मैं तो मानता हूं कि हर हाईवे पर 5 किलोमीटर बाद गडकरी का मंदिर बनना चाहिए।
मंदिर के लिए जो कुछ एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई थी, उसकी लूट मार का बहुत चर्चा हुआ था, 8-15 गुणा दाम पर जमीन खरीदी गई थी। क्योंकि मोदी की भाषा में कहें तो चंपत को कौनसा नानी के घर से पैसा लाना था, हिंदुओं की नेक कमाई का फंड पड़ा था, लूटा डाला अपने खास खास लोगों पर। उसके बाद मंदिर निर्माण के ठेकों में क्या कुछ हुआ, ये सिर्फ अनुमान है और जाँच का विषय है।
बस कॉमन नोलेज ये कहती है कि अनुदान में मिली जमीन पर इतने से निर्माण का 2000 करोड़ खर्च होना थोड़ा अटपटा है। जो लोग चढ़ावे में इतनी लूटमार मचा सकते हैं, चंदे में उन्होंने क्या किया होगा, ये तो बस सोचा जा सकता है।
लेकिन अगर आपको संघ की चंपत मंडली पर दृढ़ विश्वास है तो दोनों हाथ ऊपर उठाइए और आंख बंद करके जोर से बोलिए....जय श्री राम 🙏🏼
मैं चंपत राय जी को 86 साल से जानता हूँ, उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।
बिना गद्दी की साइकिल से चलते हैं, अपनी चटाई बगल में दबाकर रखते हैं, जहाँ रात हो जाती है वहीं बिछा लेते हैं। सरसों का तेल पसंद करते हैं, खाने में भी वही प्रयोग करते हैं। दो जोड़ी कपड़ा रखते हैं, कई बार तो उसकी भी जरूरत नहीं होती।
उनकी इसी सादगी और भोलेपन का फायदा उठाया है चढ़ावा चोरों ने। चंपत जी के विरुद्ध हो रहा दुष्प्रचार बंद होना चाहिए।
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lसे घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है।
मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते।
नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा।
सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। 😎
आज तक एक बार भी अमित शाह जी श्री राम मंदिर नहीं गए। श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुए ढाई साल हो गए। इन ढाई साल में एक बार भी वे भगवान राम के दर्शन करने नहीं गए। इन ढाई सालों में उन्होंने 42 से ज़्यादा बार अपने भाषणों और इंटरव्यू में भगवान राम और मंदिर का ज़िक्र किया जिसमे कई बार राम और मंदिर के नाम पर वोट मांगा। लेकिन दर्शन करने नहीं गए।
इनके लिए राम केवल सत्ता हासिल करने और पैसे कमाने का ज़रिया है। इनकी राम में कोई आस्था नहीं है।
देश के अमित शाह जी से पाँच सवाल -
1. आप अभी तक राम मंदिर क्यों नहीं गए?
2. क्या भगवान राम के दर्शन करने का आपका मन नहीं करता?
3. क्या राम मंदिर जाने का आपका मन नहीं करता?
4. क्या आपको भगवान राम का आशीर्वाद नहीं चाहिए?
5. क्या आप राम को भगवान मानते हो?
किसी दूसरे आदमी के कहने भर से अगर कोई व्यक्ति अपनी गर्भवती पत्नी को घर से बाहर निकाल दे और जंगल में छुड़वा दे। ऐसा पति कौन सी लड़की को चाहिए ? ये कौन से रोलमोडल है? इसमें क्या मर्यादा है , स्त्री की कोई अपनी आवाज़ तक नहीं। ऐसी ही कहानियो को आदर्श बनाकर सदियों तक महिलाओं का उनकी पवित्रता के नाम पर उनको प्रताड़ित किया गया, उनके घर से बाहर जाने को एक अपराध की तरह देखा गया।
चंगेज खान ने अपनी जिंदगी में क़रीब 4.5 करोड़ कत्ल किए थे जैसा कि किताब में लिखा है जब वो मरने वाला था तो उसने अपने वज़ीर से पूछा कि कहीं कोई ऐसी जगह है जहां मुझे मेरे गुनाहों की सजा न मिले..?
वजीर ने जो जवाब दिया वो आज भी चंगेज खान की कब्र पर लिखा हुआ है...
वो कहता है दूर दराज दक्षिण दिशा में एक देश है हिंदुस्तान वहां जाकर यदि आप भाजपा में शामिल हो जाते हैं तो आपको आपके किए गए जुल्मों की सजा नहीं मिलेगी बल्कि उसे न्याय का ही दर्जा दिया जायेगा और आपके किए गए जुल्मों के उन कत्लों के फायदे भी गिनाएं जायेंगे.!
बूढ़े से उसके कट्टर समर्थक भी पक चुके हैं। अब वो छोटे किन्नू की तरफ आस भरी नजर से देख रहे हैं।
लेकिन बेचारों को अंदाजा नहीं है कि बूढ़ा कम से कम सुनने की एक्टिंग तो करता है, किन्नू तो सीधा कहेगा कि नौटंकी मत करो, घर जाओ, नहीं तो टांग में गोली मार दूंगा।
रामनाथ का पोता अनंत संघ में गहरी आस्था रखता है, दादा जी के दिखाए रास्ते पर चल रहा है। मोहन भागवत और नरेंद्र मोदी की साल में 2-3 बार व्यक्तिगत आवभगत करता है।
अगर इसके अखबार ने भाजपा के मुख्यमंत्री के खिलाफ कुछ छापा है तो सिर्फ दो ही कारण हो सकते हैं:
A) मोहन ने अपनी माखन चोरी से संघ परिवार के किसी बड़े का हिस्सा मार लिया या फिर शाखा के लिए 5-7 प्लॉट मांगे हों, वो भी ना दिए हों । धर्म के धंधे का खेल बड़ा है, शायद कोई और 200-400 करोड़ की कुंडली फंस गई हो।
B) मोहन को चैन की बंसी बजाते देख किसी कंस मामा को बहुत पीड़ा हो रही हो। कोई कैलाशी परेशान हो, किसी की ज्योति बुझ रही हो। उसने अनंत के कारोबार में थोड़ा छींटा लगा दिया हो। सबूत तो पक्के हैं ही।
ये विशुद्ध रूप से संघियों की आपसी बंदरबांट का नतीजा है। आम जनता का इससे कोई सरोकार नहीं है, 500-700 एकड़ की जनता वैसे भी परवाह नहीं करती, देश में मीलों तक जंगल और खाली जमीन पड़ी हुई है।
जय महाकाल 🙏🏼
स्टाइल देख रहे हो फोटो में...जैसे कि डॉन विट्टो कोरलियॉन न्यूयॉर्क फाइव फैमिलीज की मीटिंग ले रहा है।
लेकिन अगर मीटिंग का ऑडियो आता तो पता चलता कि ट्रंप को गठिया बाई से बचने के लिए दाल चीनी वाला पानी उबाल कर पीने की सलाह दी जा रही है।