D Litt PhD M Phil Gold Medal ➖
Former Syndicate Member Rajasthan University Jaipur, Kota University Kota, Adviser GGTU Banswada RT≠VP @AravalliTrust #SaveTax
गुमनामी में #बहुजन_नायक
खटीक समाज में जन्में डॉ संतु जी राम राम जी लाड जिन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले जी के साथ मिलकर सत्य शोधक समाज की स्थापना की और बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ाया!
#DrSantuJiRamJiLaad#खटीकसमाज
पेपर लीक का भस्मासुर!
45 लाख में पेपर खरीदा,
45 लाख रु��ए भी गए,
बाप भी गया, बेटा भी गया…
और अंत में नौकरी भी नहीं मिली।
#RajasthanSI #PSI #पेपरलीक #Paperleak
भारत में राष्ट्रपति शासन व्यवस्था की तैयारी के लिए सारी #राजनीतिक_उठापटक और कवायद के पीछे #डेलिमिटेशन तो बहाना है, वन नेशन वन इलेक्शन के लिए दो तिहाई बहुमत जुटाना है।
डेलिमिटेशन तो बस बहाना है...
असली मकसद 100 साल पुराना है!
👁️ भीतर का सच पहचानो! 👁️
🇮🇳 कवायद: भारत में राष्ट्रपति शासन व्यवस्था (Presidential System) लागू करने की तैयारी?
🇮🇳 हथियार: 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का आकर्षक नारा।
🇮🇳 रणनीति: संसद में दो-तिहाई (2/3) बहुमत जुटाने का असली खेल।
सबसे बड़ा सवाल!
"लोकतंत्र बचेगा या सिर्�� एक चेहरा?"
संघीय ढांचे पर चोट, राज्यों के अधिकारों का क्या होगा? डेलिमिटेशन (परिसीमन) के पीछे छिपे इस बड़े राजनीतिक दांव को समझें।
@ashutosh83B @BBCHindi
@BBCBreaking @HansrajMeena @TribalArmy @DeepakSEditor @dblive15 @SatyaHindi @4pmnews_network
चर्चा का हिस्सा बनें। आवाज़ उठाएं।
#OneNationOneElection #Delimitation #SaveDemocracy #IndianPolitics #Federalism
प्रिय महोदय
असुविधा की बात नहीं है। बात अत्यंत विचारणीय है! खेद प्रकट करने से समस्या निवारण नहीं होते हैं।
@RajCMO@JVVNLCCare
दुःख इस बात का है कि 8.28 PM पर शिकायत की उसका कोई संज्ञान नहीं लिया गया। यहां तक कि शिकायत नंबर तक जनरेट नहीं किया। उपभोक्ता को नहीं भी भेजा।
वैसे भी आप जानते हैं कि बिज़ली की शिकायत करना अपने आप में महाभारत है। घंटों लाइन में कॉल पर कॉल करने के बाद भी हर कोई किस्मत वाला नहीं होता कि उसकी शिकायत दर्ज हो जाए!
फिर हवा की वजह से वायर हिला डुला तो लाइट आ गई। और रात 1.00 के करीब फिर लाइट बंद हो गई। 1.20AM पर फिर शिकायत की और रात भर किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया। फिर 3.00 AM par ख़ुद मैं निर्माण नगर पाॅवर हाउस गया वहां सब अभय निंद्रा में सो रहे थे। 24X7 शिकायत निवारण का दावा करने वाला @JVVNLCCare तंद्रा में था।
क्या दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी?
@ProfRLMeena@RajCMO@RajGovOfficial प्रिय उपभोक्ता,
आपको हुई असुविधा के लिए हम खेद व्यक्त करते हैं।
आपकी समस्या संबंधित टीम को भेज दी गई है। शीघ्र ही आपको अपडेट दिया जाएगा।
– टीम जेवीवीएनएल
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजन लाल जी @RajCMO राजधानी जयपुर में निर्माण नगर श्याम नगर में
K Number 2114260033980 उपभोक्ता की सारी रात से लाइट नहीं है। 46 डिग्री टेम्प्रेचर में सारी रात से परेशान है, चार बार शिकायत की गई जिसका विवरण निम्न है पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
@RajGovOfficial@JVVNLCCare मैं निर्माण नगर के सब स्टेशन पर रात को 3.00 बजे व्यक्तिगत रूप से आया हु यहां सब आराम से सो रहे हैं। संवेदनहीनता देखिए उपभोक्ता परेशान हो प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
@DCPNORTH_JAIPUR@PoliceRajasthan
���पने बात बात आपके की मुँह पर किसी को आपके बारे में कई तीखी बात कहते सुना होगा!
और फिर ऐसे लोग तपाक से यह भी कहते हैं कि वह #मज़ाक कर रहा था। तो सुनिए मज़ाक चतुराई से किया गया अपमान है, सतर्क रहो।
@ProfRLMeena @aalokanacademy @ProfessorLakhan @AravalliTrust
Gemini का यह कहना है आपके क्या विचार हैं?
सवाल
दृष्टि के म���लिक @drishtiias @drishtiiaseng @DrishtiPCS
#विकास_दिव्यकृति ने यूपीएससी परीक्षा कब कब दी और उनकी पॉजिशन क्या थी?
✅ डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपने इंटरव्यूज़ में खुद अपने यूपीएससी (UPSC) के प्रयासों (Attempts) और रैंक्स के बारे में पूरी सच्चाई साझा की है। उन्होंने कुल 4 बार यूपीएससी की परीक्षा दी थी, जिसकी जानकारी इस प्रकार है:
✅ पहला प्रयास (साल 1996): यह उनका सबसे सफल प्रयास था। महज 22 साल की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर ली थी। इस परीक्षा में उनकी 384वीं रैंक (Position) आई थी। इसके तहत उन्हें सेंट्रल सेक्रेटेरियल सर्विस (CSS) अलॉट हुई थी, जहाँ उन्होंने गृह मंत्रालय के तहत कुछ महीने 'डेस्क ऑफिसर' के रूप में काम किया और फिर इस्तीफा दे दिया।
✅ दूसरा प्रयास: उन्होंने सर्विस में रहते हुए अपना ऑप्शनल (वैकल्पिक) सब्जेक्ट बदलकर दोबारा परीक्षा दी थी, लेकिन इस बार वे मुख्य परीक्षा (Mains) क्लियर नहीं कर पाए थे।
✅ तीसरा प्रयास: इस प्रयास में उन्होंने मेहनत की और इंटरव्यू राउंड (साक्षात्कार) तक पहुँचे, लेकिन फाइनल मेरिट लिस्ट में उनका चयन नहीं हो सका।
✅ चौथा और आखिरी प्रयास (साल 2003): 'दृष्टि आईएएस' की स्थापना (1999) करने के कुछ सालों बाद, उन्होंने 2003 में अपना आखिरी प्रयास दिया था, लेकिन इसमें भी उनका फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ।
संक्षेप में कहें तो, उनका चयन केवल उनके पहले प्रयास (1996) में 384वीं रैंक के साथ हुआ था।
@hemlatajk पर वेरिफाई ��काउंट्स अपने आपको तुर्रमखान समझते हैं और स्याणे बनते हैं। पहले फॉलो करते हैं और फिर अनफॉलो कर देते हैं। पर मैं ऐसे लोगों को सीधा ब्लॉक करता हूं जिससे उनका इंप्रेशन ��सातल में जाता है। ऐसे स्याने लोगों के साथ ऐसा ही करना भी चाहिए।
@ProfRLMeena
वेरिफाईड इम्प्रेशन्स #Verified_Impressions मतलब ज़्यादा पैसा!
इसीलिए आओ #verify अकाउंट्स से जुड़े और ज़्यादा पैसा कमाएं। #VI पोस्ट को केवल उन लोगों द्वारा देखा जाना जिनके पास ब्लू टिक है। क्रिएटर्स को पैसे केवल इसी के आधार पर मिलते हैं ताकि बॉट्स (नकली अकाउंट्स) के ज़रिए होने वाले फ्रॉड को रोका जा सके।
@ProfRLMeena
पिछला जो दो सप्ताह का पेआऊट आया था मेरा 58.17$ वो सिर्फ 37.8K वेरिफाईड इम्प्रेशन और 5.8K वेरिफाईड इंगेजमेंट पर आया था ।
अगर आप अच्छे वेरिफाईड ईम्परेशन ला सकते है अपनी पोस्ट पर मतलब वेरिफाईड फॉलोअर्स को ध्यान में रखते हुए पोस्ट कर सकते है तो 𝕏 से अच्छा कोई भी सोशल मिडिया प्लेटफ़ॉर्म नही अर्निंग के मामलें में , अब धीरे ~ धीरे 𝕏 सबकुछ क्लीयर कर रहा हैं।
सोना बरसाते हैं ट्विटर पर वेरिफाईड इम्प्रेशन! @X@XCorpIndia
जी हाँ, जितने ज्यादा #वेरिफाईड_इम्प्रेशन#Verified_Impression आपके पोस्ट पर #like#shares#comments करेंगे उतना ज़्यादा पैसा कमाएंगे आप। इसका सीधा सा तात्पर्य है;
यदि आपके किसी इमेज, वीडियो या ऑडियो पोस्ट पर #VI अकाउंट्स से जितने ज्यादा कमेंट्स होंगे उतना ज़्यादा पैसा आपको मिलेगा। इसलिए वेरिफाई अकाउंट्स को संभाल कर रखिए।
वेरिफाईड इम्प्रेशन ऑन ट्विटर
ट्विटर (अब X) पर "वेरिफाईड इम्प्रेशन" (Verified Impressions) का सीधा संबंध प्लेटफॉर्म के मोनेटाइजेशन (कमाई) प्रोग्राम और विज्ञापनों से है। आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं:
1. वेरिफाईड इम्प्रेशन क्या हैं?
जब कोई ऐसा यूजर जिसके पास #X_Premium #ब्लू_टिक है, वह आपकी पोस्ट (ट्वीट) को देखता है, तो उसे एक #वेरिफाईड_इम्प्रेशन को ही गिना जाता है। साधारण शब्दों में, ब्लू टिक वाले अकाउंट्स द्वारा आपकी पोस्ट को जितनी बार देखा जाएगा, वे वेरिफाईड इम्प्रेशन्स कहलाएंगे।
2. यह क्यों महत्वपूर्ण है? #X_से_कमाई
अगर आप X के #Ad_Revenue_Sharing #विज्ञापन_राजस्व_साझाकरण प्रोग्राम से पैसा कमाना चाहते हैं, तो इसके लिए #वेरिफाई_इम्प्रेशन्स सबसे ज़रूरी शर्त हैं। X अपने क्रिएटर्स को पैसे देने के लिए केवल #वेरिफाईड_यूजर्स द्वारा देखे गए विज्ञापनों और इम्प्रेशन्स को ही गिनता है।
"मैंने उनको (सचिन पायलट) को केंद्रीय मंत्री ��नाया, मंत्री बनाने में मदद की, उन्होंंने अपनी ज़ुबान से कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है...दुख होता है" : राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत का बड़ा बयान!
#AshokGehlot #SachinPilot #Rajasthan #Congress #ABPNews
अशोक गहलोत @ashokgehlot51 जी के ताज़ा बयान से क्या आपको नहीं लगता कि कांग्रेस में उन���ी पॉजिशन हाशिए पर पहुंच गयीं है?
सचिन पायलट जी उन्हें फूटी आंख भी नहीं सुहाते है।
@INCIndia
@IYC @nsui
भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया:
ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब ��ों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे।
सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ ���ें और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान ��े किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है।
25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्���ी बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या ब��द में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए।
और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, श���थ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है।
क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिय��� खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब व�� भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है।
एक तो जो मीडिया जो है, वो स��्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उ��्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो।
सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं।
एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या ��नकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट ए��ड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है?
हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को ���्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं ��ाहता इशू बना रहे।
हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे।
लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उ���को मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी।
भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री ��नाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं।
दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ��े कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट ���ी और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?
@DrRamSinghSamot@BhajanlalBjp इसकी शुरुआत अशोक गहलोत @ashokgehlot51 जी ने की थी तब कोई नहीं बोला। अब क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत।
हिम्मत है तो बोलो कांग्रेस ने हो एससी एसटी ओबीसी एमबीसी का बैकलॉग खत्म किया।
अशोक गहलोत @ashokgehlot51 जी आप ना गांधी वादी, ना अंबेडकरवादी और ना ही ज्योतिबा फुले के अनुयायी। आप सिर्फ और सिर्फ सत्त��वादी ह, आप दोगले हैं; एक मुँह कांग्रेस में है और दूसरा बीजेपी में। सचिन पायलट @SachinPilot जी को बदनाम करने में लगे हैं बस।
2008, 2018 और 2023 में कांग्रेस सिर्फ आपके भ्रष्टाचार और युवाओं के साथ किये गये धोखे से हारी, बल्कि यूं कहे तीनाें ही बार आपने खुद हराया। अब आप चाहते हैं कांग्रेस का राजस्थान में वही हश्र हो जो मध्य प्रदेश में हुआ या आप जैसो द्वारा किया गया।
आप अब गांधी परिवार की आँखों में धूल झोंकना चाहते हैं बस। आपके भ्रष्टाचार के कारनामे किसी से छुपे नहीं ��ै।