उनके लिए सपने देखना गुनाह है
क्योंकि वो अच्छी लड़कियाँ हैं
अच्छी लड़कियाँ जिनको पढ़ना पसंद है
क्योंकि किताबों के अलावा उनके पास और कोई
मनोरंजन नहीं होता।
वैसे उनको पढ़ना भी इसलिए था
क्योंकि शादी के रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म पर
अच्छी लड़कियों का ग्रेजुएट होना ज़रू���ी है…!!
अच्छी लड़कियाँ अक्सर सिर्फ़
लड़कियों वाले स्कूल कॉलेजों में ही पढ़ती रहीं
क्योंकि लड़कों के साथ पढ़ने में अच्छी लड़कियों का
बुरी बन जाने का डर था।
अच्छी लड़कियों के लिए लिखे गए प्रेमपत्र
कभी भी उन तक पहुँच नहीं पाए
क्योंकि अच्छी लड़कियाँ कभी प्रेम नहीं कर सकतीं
वो किसी को पसंद नहीं कर सकतीं
वो तो करतीं हैं समर्पण,
करती हैं त्याग….
क्योंकि अच्छी लड़कियाँ हुक्म उदूली नहीं करतीं…!!
अच्छी लड़कियों के दुपट्टे उनका चरित्र प्रमाण पत्र होते हैं
जितना सलीक़ेदार दुपट्टा,
उतनी ही ज़्यादा अच्छी लड़कियाँ….
बिना दुपट्टे वालियाँ तो… ख़ैर चरित्रहीन ही होती हैं।
अच्छी लड़कियाँ स्वयंसिद्धा नहीं होतीं,
स्वरचिता तो क़तई नहीं हो सकतीं
अच्छी लड़कियाँ कैसी होती हैं….इसकी परिभाषा भी समाज ही तय करता है
अच्छी लड़कियाँ मायापुरी नहीं पढ़तीं
अच्छी लड़कियाँ कीट्स, शैली और
वर्डस���र्थ की प्रेम कविताएँ नहीं पढ़तीं…
हाँ! उनको अमृता प्रीतम को पढ़ने की आज़ादी है पर
वो कभी अमृता जैसा बनने का सोच भी नहीं सकतीं
क्योंकि अमृता ने साहिर को जी भर कर चाहा
और इमरोज़ ने अमृता को उम्र भर चाहा
प्रेम का ये त्रिकोण तो … पाप है न
और अच्छी लड़कियाँ पाप नहीं करतीं…!!
रिश्तेदारों के बेटे उनको बुरी नज़र से ताड़ते हैं
मोहल्ले के लड़के नज़रों से तोलते हैं
लेकिन…. वो घर में ये बात किसी से कह नहीं सकतीं
क्योंकि जवाब तो वो जानतीं हैं…
“अरे! अच्छी लड़कियों को तो कोई
उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ नज़र उठाकर देख भी नहीं सकता
तो ख़राबी ज़रूर तुममें ही होगी।”
किसी और की ग़लती होने पर भी पाबंदी उन पर ही लगेगी
बेक़सूर होने पर भी पढ़ाई उनकी बंद कर दी जाएगी
घर से निकलना बंद हो जाएगा।
इस कर्फ़्यू से बचने के लिए
वो सह लेतीं हैं हर ना-क़ाबिल-ए-बर्दाश्त हरक़तें…!!
अच्छी लड़कियाँ गौरैया ���ो पसन्द कर सकती हैं
उसकी कहानियाँ पढ़ सकती हैं
उससे प्रेम भी कर सकतीं हैं
लेकिन गौरैया के जैसे पंख फैलाकर उड़ान नहीं भर सकतीं
क्योंकि उड़ान तो सुंदर है,
सजीव है
उड़ान तो उन्मुक्त है,
उड़ान तो क्रांति है,
उड़ान विद्रोह है
और अच्छी लड़कियाँ विद्रोहिणी नहीं, तितिक्षु होती हैं
और इसलिए वो क्रांति नहीं करतीं…!!
और बस इसी धोखे की आड़ में वो उम्र भर ठगी जातीं हैं बनकर स�� कॉल्ड “अच्छी लड़कियाँ”
अच्छी लड़कियाँ स्वयंसिद्धा नहीं होतीं,
स्वरचिता तो क़तई नहीं हो सकतीं
अच्छी लड़कियाँ कैसी होती हैं….इसकी परिभाषा भी समाज ही तय करता है
मीनाक्षी सौरभ @saurakshi10550
क्या आपने कभी शहतूत देखा है,
जहां गिरता है, उतनी ज़मीन पर
उसके लाल रस का धब्बा पड़ जाता है
गिरने से ज़्यादा पीड़ादायी कुछ नहीं
मैंने कितने मज़दूरों को देखा है
इमारतों से गिरते हुए,
गिरकर शहतूत बन जाते हुए
(सबीर हका)
कुछ लोग तुम्हें समझाएँगे
वो तुम को ख़ौफ़ दिलाएँगे
जो है वो भी खो सकता है
इस राह में रहज़न हैं इतने
कुछ और यहाँ हो सकता है
कुछ और तो अक्सर होता है
पर तुम जिस लम्हे में ज़िंदा हो
ये लम्हा तुम से ज़िंदा है
ये वक़्त नहीं फिर आएगा
तुम अपनी करनी कर गुज़रो
जो होगा देखा जाएगा
- फ़हमीदा रियाज़
🔥 Praggnanandhaa goes to the final of the #FIDEWorldCup!
The Indian prodigy managed to beat world #3 Fabiano Caruana 3.5-2.5 after tiebreaks and will battle it out against Magnus Carlsen for the title.
📷 Maria Emelianova