@MuktiBodhbook#दुर्गाअर्धकुँवारी_है_तो_माता क्यों कहते हैं?
दुर्गा जी अर्धकुँवारी नहीं हैं क्योंकि शिवपुराण के रुद्रसंहिता खंड अध्याय 6-7 में लिखा है कि काल रूपी ब्रह्म और दुर्गा (शिवा/प्रकृति) के पति-पत्नी व्यवहार से ब्रह्मा और विष्णु की उत्पत्ति हुई।
#दुर्गाअर्धकुँवारी_है_तो_माता क्यों कहते हैं
दुर्गा अर्धकुँवारी है तो माता क्यों कहते हैं?
जरा सोचिए यदि कोई स्त्री अर्धकुँवारी है तो उसे माता कैसे कहा जा सकता है? सत्य तो यही है कि माता दुर्गा का पति ज्योति निरंजन काल ब्रह्म है।
#दुर्गाअर्धकुँवारी_है_तो_माता क्यों कहते हैं
ब्रह्मा जी के साथ सावित्री, विष्णु जी के साथ लक्ष्मी, और शंकर जी के साथ पार्वती हमेशा रहती हैं, तो फिर इन तीनों देवताओं की जननी माता दुर्गा को हमेशा अकेला क्यों देखा गया?
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दुर्गा (अष्टंगी) जी अर्धकुँवारी नहीं हैं बल्कि उनका पति ज्योति निरंजन (काल ब्रह्म) है।
इस बारे में कबीर परमेश्वर ने कबीर सागर के अध्याय ज्ञानबोध के पृष्ठ 21-22 में बताया है
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#दुर्गाअर्धकुँवारी_है_तो_माता क्यों कहते हैं?
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दुर्गा (अष्टंगी) जी अर्धकुंवारी नहीं हैं बल्कि उनका पति ज्योति निरंजन (काल ब्रह्म) है।
इस बारे में कबीर परमेश्वर ने कबीर सागर के अध्याय ज्ञानबोध के पृष्ठ 21-22 में बताया है कि:-
माँ अष्टंगी पिता निरंजन।वे जम दारुण वंशन अंजन।।
#दुर्गाअर्धकुँवारी_है_तो_माता क्यों कहते हैं
दुर्गा अर्धकुँवारी है तो माता क्यों कहते हैं?
जरा सोचिए यदि कोई स्त्री अर्धकुँवारी है तो उसे माता कैसे कहा जा सकता है? सत्य तो यही है कि माता दुर्गा का पति ज्योति निरंजन काल ब्रह्म है। जिसका प्रमाण शिवपुराण के रुद्रसंहिता खंड अध्याय 6
दुर्गा जी अर्धकुंवारी नहीं हैं बल्कि उनका पति भी है।
जानने के लिए पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा।
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श्रीमद्देवीभागवत के तीसरे स्कन्ध के अध्याय 4 श्लोक 42, अध्याय 5 श्लोक 8 व 12 से स्पष्ट है कि दुर्गा जी का पति काल ब्रह्म है और उनके तीन पुत्र ब्रह्मा, विष्णु व शिव जी हैं।
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संपूर्ण सृष्टि रचना में माता दुर्गा की क्या भूमिका है, और उन्हें किस उद्देश्य से यह कार्यभार दिया गया है? अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़ें अनमोल पुस्तक "ज्ञान गंगा"।
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दुर्गा जी अर्धकुँवारी नहीं हैं बल्कि उनका पति भी है। जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel
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#तारणहार_संतरामपालजी_महाराज
कुरान शरीफ़ सूरह फुरकान 25 की आयत 59 में जिस बाख़बर से इल्म प्राप्त करने के लिए कहा गया है वह बाख़बर संत रामपाल जी महाराज हैं जो कुरान शरीफ़, सूरह शूरा 42 आयत 2 में कादिर अल्लाह की इबादत के सांकेतिक कलमा (मंत्र) 'औन. सीन. काफ' का भेद बताते हैं
#तारणहार_संतरामपालजी_महाराज
संत रामपाल जी कौन हैं?
सम्पूर्ण विश्व को मानवता के सूत्र में बांधने का प्रयत्न करने वाले महापुरुष हैं संत रामपाल जी महाराज। जिनका नारा है:
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नही कोई न्यारा।।
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#तारणहार_संतरामपालजी_महाराज
धर्मगुरु व कथावाचकों का कहना है कि कर्मफल तो भोगना ही पड़ता है। जबकि संत रामपाल जी वे पूर्ण संत हैं जिन्होंने सामवेद मंत्र संख्या 822, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, 5, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 162 मंत्र 5 व ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 163 मंत्र (१/२)
#तारणहार_संतरामपालजी_महाराज
संत रामपाल जी कौन हैं?
सम्पूर्ण विश्व को मानवता के सूत्र में बांधने का प्रयत्न करने वाले महापुरुष हैं संत रामपाल जी महाराज। जिनका नारा है:
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नही कोई न्यारा।।
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पूर्ण परमात्मा कविर्देव चारों युगों में आए हैं। सृष्टी व वेदों की रचना से पूर्व भी अनामी लोक में मानव सदृश कविर्देव नाम से विद्यमान थे। कबीर परमात्मा ने फिर सतलोक की रचना की, बाद में परब्रह्म, ब्रह्म के लोकों व वेदों की रचना की इसलिए (1/2)
पूरे विश्व के #तारणहार_संतरामपालजी_महाराज
सम्पूर्ण विश्व को मानवता के सूत्र में बांधने का प्रयत्न करने वाले महापुरुष हैं संत रामपाल जी महाराज। जिनका नारा है
जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई व्यारा ।।
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