मंत्री विधायकों के सहारे ना रहकर एक बार बूथ स्तर तक के कार्यकर्त��ओं की मीटिंग रखी जाए और उनका मनोबल बढ़ाया जाए माननीय जी द्वारा
क्योंकि बहुत सारे ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने अपने ही विधानसभा नेता से सवाल कर दिए जिससे अनबन चल रही है
ये बहुत जरूरी है भैया
मंत्री विधायकों के सहारे ना रहकर एक बार बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं की मीटिंग रखी जाए और उनका मनोबल बढ़ाया जाए माननीय जी द्वारा
क्योंकि बहुत सारे ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने अपने ही विधानसभा नेता से सवाल कर दिए जिससे अनबन चल रही है
ये बहुत जरूरी है भैया
आज पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी का जन्मदिन है इस मौके पर कोई एक सलाह जो आप उनको देना चाहते हैं वो लिखिए।
हम - चुनाव तक निजी मदद करना रोक दीजिए पैसे बचाकर रखिए चुनाव के अंतिम दिनों में काम आयेंगे।
खान सर और रौशन आनंद सर का जो विवाद हुआ था ,
उस विवाद को रौशन सर ने हिन्दू बनाम मुस्लिम का मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा ।
खुद को सनातनी हिंदू बनाने के बाद अब सुनने में आ रहा है कि रौशन सर हनुमान मंदिर बना रहे है ,
मंदिर बनाना अच्छी बात है आस्था का विषय है इसपे कोई सवाल नहीं ,
लेकिन खान सर जैसा इंसान कभी नहीं बन सकते क्यों कि खान सर सभी धर्मों से परे है उनके लिए हिंदू मुस्लिम कोई मुद्दा ही नहीं है ,
इसलिए खान सर मस्जिद न बना कर हॉस्पिटल बना रहे है ,क्यों कि खान सर धर्म इंसानियत है , जो सभी धर्मों से बड़ा है ।
खान सर जैसा आदमी बहुत कम ही पैदा होते है इस धरती पर , उनका सम्मान होना चाहिए ।
सपा सुप्रीमो और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव ने यदि अपने कार्यकाल में अपराध व अपराधियों को मामूली अल्पकालीन राजनीतिक फायदे के लिये संरक्षण न दिया होता तो अब तक अखिलेश यादव भी तीन बार और मुख्यमंत्री बन चुके होते ।
यह बात अगर अखिलेश को समझ में आ भी जाये मगर सजातीय वीरबहादुरों को कैसे समझ आये जो मौक़ा पाते ही लाठी में तेल लगा लेते हैं। ठीक यही बिहार में होता है । यानी यादव ही यादव नेताओं के दुश्मन साबित होते हैं। हरियाणा में भी भाजपा जाट बनाम ३६ जाति से समीकरण साध���ी है ।
छँटे हुये बेलगाम सजातीय यादव और चुनिंदा मुसलमान अपराधियों ने उप्र व बिहार राज्य में ऐसा नंगानाच किया था कि आज तक सपा व राजद सत्ता से बाहर इसीलिये रहती है कि गुंडाराज न लौट आये जबकि मौजूदा अहंकारी और देश तोड़क सत्ता के खिलाफ खूब वातावरण बनता तो है पर जैसे म��्र में दिग्गीराज का भ्रष्टाचार और बिजली पानी सड़क की दुर्दशा आज तक लोगों के मन में कौंधती रहती है वैसे ही लालू तेजस्वी अखिलेश के विरुद्ध विजयी सामाजिक समीकरण नहीं उठ पाता है ।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि इन विपक्षी नेताओं की सांस्कृतिक सामाजिक समझ के साथ साथ भाषायी योग्यता भी इतनी कमजोर है कि वे अपने वक्तव्यों से आकर्षित कम करते हैं , उल्टे कई सामाजिक समूहों को दूर भी कर देते हैं - जाने या अनजाने ।
-रमाशंकर सिंह जी
सभी समाजवादी कार्यकर्ताओं और माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से उनके जन्मदिवस पर एक विनम्र आग्रह है कि सरकार की आलोचना जितनी ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी जनता के सामने एक स्पष्ट और सकारात्मक विकल्प रखना भी है।
सभी समाजवादी कार्यकर्ताओं और माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से उनके जन्मदिवस पर एक विनम्र आग्रह है कि सरकार की आलोचना जितन�� ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी जनता के सामने एक स्पष्ट और सकारात्मक विकल्प रखना भी है।
जो कार्यकर्ता लगातार ईमानदारी और मेहनत से संगठन को मजबूत कर रहे हैं, उन्हें उनकी क्षमता और योगदान के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर और जिम्मेदारियाँ मिलनी चाहिए। इससे संगठन में न��� ऊर्जा आएगी, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और हर व्यक्ति खुद को पार्टी की ताकत महसूस करेगा
@riskyyadav41
माननीय अखिलेश यादव जी के बारे में हाल ही में कुछ लोग कह रहे थे कि वे केवल एसी रूम में बैठते हैं, सड़क पर नहीं उतरतें और कार��यकर्ताओं का मनोबल नहीं बढ़ाते। कहा जा रहा था कि वे जमीनी राजनीति से जुड़कर 2027 की शुरुआत क्यों नहीं करते।
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श्री क��ष्ण की कृपा और जनता के भरोसे से हमें 2027 में अवश्य सफलता मिलेगी। आइए, संयम और सकारात्मक सोच के साथ संघर्ष जारी रखें और अपने समाज में बदलाव लाएं।
#akhileshyadav #uttarpradesh #samajwadiparty
माननीय अखिलेश यादव जी के बारे में हाल ही में कुछ लोग कह रहे थे कि वे केवल एसी रूम में बैठते हैं, सड़क पर नहीं उतरतें और कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं बढ़ाते। कहा जा रहा था कि वे जमीनी राजनीति से जुड़कर 2027 की शुरुआत क्यों नहीं करते।
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इसलिए आगे से हमें यह सोच अपनानी चाहिए:
निजी आरोपों में उलझने के बजाय क्षेत्र, गाँव और समाज में जाकर लोगों का मनोबल बनाना।
सकारात्मक राजनीति के साथ वोट बनाना और विपक्ष की कमजोरी पर टिके रहना।
कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, जमीन पर जा कर लोगों से जुड़ना और आश्वासन देना।