श्रद्धेय विश्वनाथ प्रताप सिंह जी जब देश के वित्तमंत्री बने,तब देश के अनेक बड़े पूंजीपति टेक्स चोरी कर रहे थे | वीपी सिंह जी, धीरूभाई अंबानी और अमिताभ बच्चन व अन्य बड़े पूंजीपतियों के टैक्स चोरी के खिलाफ कार्रवाई शुरु करवा दिए जिसके कारण कांग्रेस ने वीपी सिंह जी को वित्त मंत्री से हटाकर रक्षा मंत्री बनाया |
रक्षा मंत्री बनने पर, देश की रक्षा के लिए हथियारों की खरीदफरोस्त मे चल रहे घोटाले के खिलाफ वीपी सिंह जी ने विरोध किया, अंततः बोफोर्स और एचडीडब्ल्यू पनडुब्बी रक्षा सौदों में हुए घोटाले के कारण श्रध्देय वीपी सिंह ने केंद्र की कांग्रेस सरकार के वित्तमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, उन्होने कहाँ कि एक राजनैतिक कुर्सी के लिए देश के साथ द'लाली को मै समर्थन नही दूंगा |
भारत देश के सबसे इमानदार राजनेता, यूं कहें कि इमानदारी की प्रतिमुर्ति स्व. विश्वनाथ प्रताप सिंह गहड़वाल जी 💐
#VPSingh #PrimeMinister
मोहन यादव - ख़ुद भी खाऊँगा और परिवार और रिश्तेदारों को ठूस-ठूसकर खिलाऊँगा
मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनते ही उनकी पत्नी,बहू,भाई,लड़का और तमाम रिश्तेदारों ने उज्जैन में ताबड़तोड़ ज़मीने ख़रीदी
टोटल 168 एकड़ के 137 प्लॉट ख़रीदे गए
और मुख्य बात ये सारी ज़मीन सरकारी प्रोजेक्ट के आस-पास ख़रीदी गई ताकि प्रोजेक्ट शुरू होने पर उसको करोड़ो में बेचकर तगड़ा मुनाफ़ा कमाया जा सके
मोहन यादव के परिवार के पास हर उस जगह ज़मीन है जहाँ उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के अंतर्गत Land use को बदला गया
परिवार को Land use बदलने का खूब फ़ायदा मिला
दिन दहाड़े खुला परिवारवाद किया जा रहा है बीजेपी के मुख्यमंत्रियों द्वारा
लेकिन आज भी मोदी जी यही कहते हैं कि
“ना खाऊँगा ना खाने दूँगा”
भरत तिवारी “एनकांउटर” पर आज पुरे बिहार में कोहराम मचा हुआ है, सभी पत्रकार, न्यूज एजेंसीयां व नेता इस प्रकरण को लगातार उठा रहे, लाखों क्षत्रिय भाई भी भरत तिवारी को न्याय दिलाने के लिए कमर कसकर कूद पड़े हैं...
भरत तिवारी के साथ जो हुआ वह देखकर मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी सोचा न्याय के लिए आवाज बुलंद करु, लेकिन मैं देखा कि आलरेडी चौतरफा कोहराम मचा हुआ है...
फिर मैं विचार करने लगा कि, एक मनबढ़ व्यक्ति जो सरेआम प्रशासन को ग’न प्वाइंट पर रख दें, ऐसे सिरफिरे व्यक्ति के साथ प्रशासन ने जो कार्यवाही किया उसे इतना हाइलाइट किया जा रहा है...
लेकिन 2021 में होली के पावन पर्व पर जब ‘मधुबनी’ में क्षत्रियों का पुरा परिवार खत्म कर दिया गया था, पंडित संजय ओझा ने अपने टीम के साथ क्षत्रियों का न’रसंहार किया था, तब यह पत्रकार, न्यूज एजेंसीयां व अन्य क्यु इतना कोहराम नहीं मचाएं....??
ज्यादा पुराने प्रकरण को छोड़िए....अभी एक भी वर्ष नहीं हुआ जब सारण के मलमलिया में “शत्रुध्न भूमिहार” ने 25-30 लोगों के साथ फ’रशा व त’लवार से 4-5 क्षत्रिय युवाओं का ह’त्या किया था तब भी बिहार में इतना हाहाकार नहीं मचा था , आखिर क्यु ....?
अगर प्रशासनिक कार्रवाई से आहत होकर आप सभी एकजुट है तो फिर बताएं, जब 1857 क्रांति के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह जी के प्रपौत्र बबलू सिंह जी के साथ अपराध हुआ तब कहां थे यह सभी शुरवीर ...?
जाइए शुरवीरो आप न्याय मांगिए भगत तिवारी के लिए,
मेरे ज़हन मे मधुबनी के अबोध अनाथ बच्चों का दर्द है..
मेरे ज़हन में मलमलिया में हुए संहार का दर्द है...
मैं संवैधानिक दायरे में, प्रशासनिक कार्रवाई का पुरजोर समर्थश करता हूं, मनबढो का इलाज आवश्यक है...वरना कल को यही मनबढ़ मधुबनी जैसा काण्ड करते हैं...
हमारे मित्र एवं बड़े भाई श्याम मीरा सिंह जी @shyammeerasingh द्वारा Strike नामक नए मीडिया प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई है।
हम सभी से अनुरोध करेंगे की सभी लोग फॉलो कर लें।
https://t.co/Uua3DjHyBY
11 गेंद — 50* रन (दुनिया का सबसे तेज अर्धशतक)
29 गेंद — 94 रन...
स्ट्राइक रेट — 324.13
10 चौंके और 8 छक्के = 88 रन
अर्थात 94 रन कि पारी में मात्र 06 रन दौड़कर बनाएं वैभव सुर्यवंशी ने ❤️
अगर वैभव सुर्यवंशी 29 गेंद पर आऊट न हुए होते तो, दुनिया का सबसे तेज शतक भी आज लग ही गया है....😭
आज नहीं तो कल सबसे तेज शतक में भी वैभव सुर्यवंशी का ही नाम आएगा ||
वैभव सुर्यवंशी का प्रतिभा व खेल देखकर यह यह प्रमाणित होता है कि, भारत के क्रिकेट इतिहास में नया किर्तिमान रचेगा यह बल्लेबाज ❤️🇮🇳
कुछ लोग जो वैभव सुर्यवंशी को जो ट्रोल कर रहे....
उन्हें इतना ही कहुंगा — “ जलो मत बराबरी करो”
योगी आदित्यनाथ इस बार जब अयोध्या में रामलला के मंदिर गए तो सब बदला बदला सा था
न चंपत राय साथ में थे, न अनिल मिश्रा न गोपाल राव, न आशीष और न ही टुन्नू यादव.. सभी विवादित चेहरों को दूर रखा गया.
श्री राम जन्मभूमि मंदिर को अपमानित करने वाले लोगों के बहकावे में कतई न आएं...
SIT जांच दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी...
अगर कोई अपराधी है, वह बचेगा नहीं, यह सुनिश्चित है...
राम मंदिर ट्रस्ट के 15 सदस्यों में 9 स्थाई और 6 पदेन सदस्य है, सभी स्थाई सदस्य #ब्राम्हण हैं एक भी क्षत्रिय, OBC या दलित नहीं है, आखिर क्यों....?
राममंदिर ट्रस्ट के 9 स्थाई सदस्य :—
1. के परासरण — ब्राह्मण
2. जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज —ब्राह्मण, बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ शंकराचार्य
3. जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज — ब्राह्मण, कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं.
4. युगपुरुष परमानंद जी महाराज — ब्राह्मण, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख |
5. स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज — ब्राह्मण, महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में जन्म हुआ |
6. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा — ब्राह्मण, अयोध्या राजपरिवार के वंशज हैं |
7. महंत दिनेंद्र दास — ब्राह्मण, अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के प्रमुख हैं ...
8. अनिल मिश्र — ब्राह्मण, मूलरूप से अंबेडकरनगर निवासी अनिल अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथी डॉक्टर हैं. वो होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार हैं |
9. श्री कामेश्वर चौपाल — दलित, अयोध्या आंदोलन से जुड़े रहे हैं. कारसेवक ....
9 स्थाई सदस्य में 8 ब्राम्हण व 1 दलित (कामेश्वर चौपाल) थे, जिनका 68 वर्ष कि आयु में 07/02/25 को स्वर्गवास हो गया.. अब सिर्फ 8 स्थाई सदस्य बचे हैं और सभी 100% ब्राम्हण है |
#question — क्षत्रिय, OBC और दलित सिर्फ राममंदिर में चढ़ावा चढ़ाने के हकदार हैं, राममंदिर ट्रस्ट में सहभागिता के हकदार नहीं हैं ..?
ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र, स्थाई सदस्यों के अधिकार क्षेत्र कि जानकारी :—
ट्रस्ट के डीड में ही साफ कर दिया गया है कि इसके गठन के बाद सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी यानी यह सरकारी दखल से पूरी तरह मुक्त होगा।
#notes - अर्थात, राममंदिर ट्रस्ट में सरकार कि कोई भी दखल नहीं है, सर्वेसर्वा स्थायी सदस्य ही सब कुछ है |
साथ ही, ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण और उसके रखरखाव के लिए धन जुटाने और उसके प्रबंधन की पूरी छूट होगी। इसमें भी सरकार का कोई दखल नहीं होगा...
• पदेन सदस्य (Ex-officio member) कि जानकारी:—
पदेन दो सदस्यों का चयन ट्रस्ट करेगा, ट्रस्ट के दो सदस्यों के चयन का अधिकार ट्रस्ट के स्थाई सदस्यों को दिया गया है । जो मतदान के बाद बहुमत के आधार पर इनका चयन करेंगे।
लेकिन ध्यान योग्य बात यह है कि 🤔 इन दोनों सदस्यों के चुनाव में सरकार की ओर से मनोनीत आइएएस अधिकारी व अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में पदेन सदस्य भाग नहीं ले सकेंगे। सिर्फ स्थाई सदस्य ही लेंगे ...
(स्थाई सदस्य कौन है आपको पता ही है, वह किनका चयन करेंगे यह भी आप समझ ही सकते हैं )😭
इसका 15वां सदस्य भी पदेन होगा, जो ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर कांप्लेक्स के विकास और प्रशासनिक देखरेख के लिए बनने वाली कमेटी का अध्यक्ष होगा। इसका चयन भी ट्रस्ट के सदस्य ही करेंगे।
खैर, अब आप लोग समझ ही गये होंगे कि राममंदिर ट्रस्ट कि कार्यप्रणाली किसके हाथों में है, और किसे श्रेय या किसे दोष देना है | इसमें सरकार कि कोई भूमिका नहीं है ।
सरकार से मांग है कि राममंदिर ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट का निर्माण करें, उस ट्रस्ट में क्षत्रिय, ब्राम्हण, अहीर, कुर्मी, जाट, दलित, कुम्हार, लोधी व अन्य वर्ग को भी शामिल करें..
इससे सभी वर्गों में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति विश्वास भी बना रहेगा और ट्रस्ट के कार्यों में ईमानदारी और सहभागिता भी रहेगा,
और चढ़ावा चोरी जैसा कृत्य भी नहीं होगा 😐
मुंबई में महाराणा साहब श्री विश्वराज सिंह मेवाड़, हाड़ा-चौहान राजवंश बूंदी के ब्रिगेडियर श्री भूपेश सिंह जी एवं शिक्षक श्री राजवीर सिंह जी की तस्वीरों को पैरों तले रौंदकर उसे “उग्र विरोध” का नाम देना लोकतांत्रिक असहमति नहीं, बल्कि अपनी गलत सोच मानसिकता और संस्कारों का सार्वजनिक प्रदर्शन है।
तस्वीरों को कुचलना न तो साहस है और न ही वैचारिक मजबूती का प्रतीक, बल्कि यह असहिष्णुता और बौद्धिक दिवालियापन को दर्शाता है।
राजपूत राजघरानों ने सदियों तक अपनी संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। उनके प्रति इस प्रकार का व्यवहार केवल दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी हानिकारक है।
@RajveerChalkoi@VishvarajSMewar@Bhupesh
आरएसएस का अंग्रेजों वाला खेल देखिए।
आरएसएस में मराठा साम्राज्य का फर्जी नक्शा जानबूझकर छपवाया । क्योंकि आरएसएस को पता था कि इस फर्जी नक्शे का विरोध होगा।
इस फर्जी नक्शे की आड में,मराठों और क्षत्रियों को आपस में लड़ा दिया जाएगा।
महाराष्ट्र में आरएसएस का मुख्यमंत्री बैठा दिया जाएगा और मराठों को ठेंगा 👍 दिखा दिया जाएगा।
यही हो रहा है। फर्जी नक्शे के नाम पर ,मराठा और क्षत्रिय आपस में लड़ रहे हैं। आरएसएस महाराष्ट्र में शासन कर रहा है।
नोट:- अंग्रेजों की "फूट डालो और राज करो की राजनीति" अंग्रेजों के जाने के बाद भी, भारतीय राजनीतिक दलों ने अपना रखी है। भारत की राजनीति में यह सफल होती भी दिखाई दे रही है। अब इस वीडियो में वहीं हो रहा है। जो मैने ऊपर आपको बताया है। आरएसएस हर किसी के समझ मे नहीं आने वाला है। आरएसएस को सिर्फ क्षत्रिय समुदाय के कुछ ही लोग समझ पाये है। आरएसएस आज देश मे जो चाहे वो कर सकता है। क्योंकि की आरएसएस देश को मूर्ख बनाकर रखा हुआ है।
✍️ राजन्य क्रॉनिकल्स टीम
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने हाल ही में राम मंदिर के लिए एक पूर्णकालिक और अनुभवी CEO की नियुक्ति की मांग की है। यह मांग मंदिर में दान निधि से जुड़े विवाद और अनियमितताओं के आरोपों के चलते की गयी है।
पहली बात तो ये कि जब मिश्रा से दानपात्र चोटरी के बारे में पूछा गया था तब मिश्रा ने कहा था कि मैं तो निर्माण समिति का अध्यक्ष हूँ, इस विषय पर कुछ नहीं बोल सकता। तो फिर अब ये मिश्रा कौन है सीईओ की नियुक्ति का सलाह देने वाले ।
दूसरी बात, ये मंदिर है या कंपनी जो यहाँ सीईओ नियुक्त किया जायेगा। इस मंदिर में पारदर्शिता और चोरी रोकने का एक ही तरीका है। ट्रस्ट भंग करके इस मंदिर को सरकार को सौंप दिया जाये।
येड़ा बनकर पेड़ा खाने की मिश्रा की पुरानी आदत है। रामभक्तो पर गोली मिश्रा ने ही चलवाई थी लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी मुलायम सिंह यादव पर डाल देते हैं।
डॉक्टर यादु सिंह @dryadusingh जी द्वारा लिखित इस महत्वपूर्ण लेख को अधिक से अधिक पढ़ें और साझा करें।
इस लेख में ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर उन विभिन्न जातियों और समुदायों का उल्लेख किया गया है जिनका किसी न किसी रूप में मुगल शासन से संबंध रहा है। https://t.co/wRgga9vNgk
राम मंदिर से चढ़ावा चोरी की परत दर परत खुल रही है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा के अलावा संघ के एक पदाधिकारी है जिनका नाम दबी जुबान से अयोध्या, कारसेवकपुरम और साकेत निलयम की आबो हवा में तैर रहा है। वह भाई साहब कोई और नहीं क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश) मनोज जी है । मनोज जी भाई साहब ने अपने संपर्क वाले दायित्व का एकदम सही और सटीक इस्तेमाल किया। चढ़ावा चोरी में कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है और 50 की संख्या में कर्मचारी संदेह के दायरे में है । मनोज जी भाई साहब ने पहले अपने संपर्को का इस्तेमाल कर चंदा राशि की गणना करने वालो में अपने जान पहचान वालों की नियुक्त करवाई । मनोज जी भाई साहब की सिफारिश पर नियुक्त कर्मचारियों का नाम कुछ इस तरह है ।
1.लवकुश मिश्रा
2.अनुकल्प मिश्रा
3.शिवम् पांडेय
4.आशीष दुबे
इनके साथ एक बैंक का कर्मचारी भी इस कुकर्म में सम्मिलित था जिसका नाम रत्नेश चतुर्वेदी (SBI) था।
ये सभी लोग अभी चढ़ावा चोरी मामले में संदेह के घेरे में है तो SIT को ये भी जाँच करनी चाहिए की ये जो कर्मचारी चोरी में संलिप्त पाए गए है उनकी नियुक्ति किसने किया था और किसकी सिफारिश पर इनको नौकरी पर रखा गया था।
सबसे मजे की बात है ये संपर्क प्रमुख मनोज जी भाई साहब राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य नहीं है लेकिन इनका संपर्क केन्द्र अयोध्या है और उन्होंने अयोध्या में भारी मात्रा में संपर्क कर दिया। भाई साहब इतना भी संपर्क नहीं करना था कि भगवान राम का चढ़ावा ही गायब करवा दिए। आपने प्रभु श्रीराम के करोडों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।
राम मंदिर से चढ़ावा चोरी परत दर परत खुल रहा है ..
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा के अलावा संघ के एक पदाधिकारी है जिनका का नाम दबी बुजान से अयोध्या, कारसेवकपुरम और साकेत निलयम की आबो हवा में तैर रहा.. और वह भाई साहब कोई और नहीं क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश) मनोज जी है ।
मनोज जी भाई साहब ने अपने संपर्क वाले दायित्व का एकदम सही और सटीक इस्तेमाल किया… चढ़ावा चोरी में कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है और 50 के संख्या में कर्मचारी संदेह के दायरे है ।
मनोज जी भाई साहब ने पहले अपने संपर्को का इस्तेमाल कर चंदा राशि की गड़ना करने वालो में अपने जान पहचान वालो की नियुक्त करवाई ।
मनोज जी भाई साहब की सिफारिश पर नियुक्त कर्मचारियों का नाम कुछ इस तरह है 👇
1.लवकुश मिश्रा
2.अनुकल्प मिश्रा
3. शिवम् पांडेय
4.आशीष दूबे
और एक बैंक का कर्मचारी भी इन लोगों के साथ इस इस कुकर्म में सम्मिलित था
5.रत्नेश चतुर्वेदी (SBI)
ये सभी लोग अभी चढ़ावा चोरी मामले में संदेह के घेरे में है, तो SIT को ये भी जाँच करनी चाहिए की ये जो कर्मचारी चोरी में संलिप्त पाए गए है,
• उनकी नियुक्ति किसने किया था.. ?
• और किसके रिकमेण्डेशन पर इनको नौकरी पर रखा गया था..?
•सबसे मजे की बात है ये संपर्क प्रमुख मनोज जी भाई साहब राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य नहीं है लेकिन इनका संपर्क केन्द्र अयोध्या है और उन्होंने अयोध्या में भारी मात्रा में संपर्क कर दिया , इतना संपर्क नहीं करना था भाई साहब...😐
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के लिए कुल 50 कर्मचारियों की मौजूदगी उस गुप्त कमरे में रहती थी जहां गिनती होती थी। ये कर्मचारी 3 तरह के हैं-
1. 24 कर्मचारी: नोट गिनकर उनके बंडल बनाते हैं। ये कर्मचारी प्राइवेट एजेंसी के जरिए ट्रस्ट ने रखे हैं।
2. 12 कर्मचारी: ये ट्रस्ट के हैं, जो इन 24 कर्मचारियों पर नजर रखते हैं। यानी 1 कर्मचारी के हिस्से में निगरानी के लिए 2 कर्मचारी थे।
3. 14 कर्मचारी : इनमें SBI के कर्मचारी और TCS की ऑडिट टीमों के सदस्य होते हैं।
अब ये सभी 50 कर्मचारी और इनको नियुक्त करने वाले जांच के दायरे में हैं। चोरी की रकम अब 200 करोड़ तक बताई जा रही।
सुना है, चोरी बड़ी है और चोर भी।
अतः निष्पक्ष जाँच की संभावना क्षीण है।
फिर भी अगर जाँच हो, तो भूमि घोटालों से लेकर चंदे की कथित हेराफेरी तक हर मामले की परतें खुलनी चाहिए- राम जी के नाम पर बड़ा माल काटा है।
कोढ़ी होंगे, पापी कहीं के।