❤️ बचपन में लगता था… पापा हर चीज़ ठीक कर देते हैं। बड़े होकर समझ आया… वे सिर्फ़ पंखा, फ़्रेम या घर की छोटी समस्याएँ नहीं… हमें यह यक़ीन दिलाते थे कि, “कुछ भी हो जाए… सब ठीक हो जाएगा।” शायद इसीलिए आज भी… चाहे ज़िंदगी की सबसे बड़ी समस्या हो या घर का सबसे छोटा काम, हमारी ज़ुबान पर सबसे पहला नाम सिर्फ़ एक ही आता है— “पापा।”
सच कहूँ
तो उम्र बड़ी डराती हैं।
अपने ही घर में परिवार के वो सदस्य जिनको बचपन में देखकर उनके जैसे जीने का जुनून आता, उम्र ने उन्हें बाँध लिया।
ये सभी एक्टर्स जिनको स्क्रीन पर ज़िंदादिल देखते हैं,यूँ लड़खड़ाते देख वक़्त पर एक ज़रा सा गुस्सा आता है।
तुमको चिट्ठी लिखते ये अंतर्देशीय भी छोटी लगती। लिफ़ाफ़ा ही सही रहता था।
फिर भी इसमें बहुत बारीकी से छोटा छोटा लिखती।
मेरी माँ!
से शुरू होकर
तुम्हारी बेटी।
पर खत्म होती चिट्ठी को टेढ़ा करके इतनी सी बची जगह में छोटे छोटे अक्षर में लिख देती "माँ! तुम्हारी बहुत याद आती है।"
Brave concept is
"Do or Die"
Practical concept is
"Do before you Die "
And
Winner's concept is
"Don't Die until you do it "
Good afternoon x family have a great day🌞
कलकत्ता की इस धरती पर रवींद्रनाथ टैगोर जी की पंक्तियाँ मन में गूंज रही हैं।
हाल के संघर्षों और अनुभवों के बीच यही गीत मुझे आगे बढ़ने की शक्ति देता है। जब रास्ता कठिन हो, तब आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा सहारा होता है।
इंतज़ार और निभाना
दो अलग दिशाएँ नहीं,
एक ही प्रेम की
दो गंभीर भाषाएँ हैं...
जहाँ स्त्री
समय को थामे रखती है,
और पुरुष
उसे टूटने से बचाता है...!! 🎭
#डॉ_अमित_सिंह