ब्राह्मण सिर्फ एक जाति नहीं, एक फिनॉमिना है.. एक विचारधारा है..एक संस्कृति है।
सदियों से मुगलों ,अंग्रेजों और leftist यूरोपीय शक्तियों ने ब्राह्मण के प्रति घृणा को जन्मा और बढ़ाया क्योंकि ब्राह्मण ही सनातन धर्म संस्कृति और सभ्यता के गुरु रहे हैं।
इन ��ुष्ट शक्तियों का उद्देश्य ब्राह्मण के शस्त्र शास्त्र- ज्ञान और मार्गदर्शन को , क्षत्रिय के तेज और वीरता को, वैश्य के धन और business acumen को और शूद्र की कर्मशीलता सेवाभाव और दृढ़ जीवट को तोड़कर सनातन को खंड खंड करना रहा है।
ये चारों ही सनातन में भगवान के ही चार अंग कहे गए हैं।
अपने खुद के शरीर का एक भी अंग दूसरे अंग से घृणा नहीं करता,सब अंगों में वही रक्त वही DNA वहीं white red blood cells रहते हैं। खुद का खाया भोजन स���ी अंगों को पोषण देता है। एक अंग में चोट लगे तो पूरा शरीर व्यथित होता है।
नफरत करने और बांटने वालों से बचें।
सनातन को बचाएं। भारत को बचाएं।
वंदे मातरम् !!!
"आरक्षण की बात मत करो, आंदोलन बिगड़ जाएगा।"
यह वो सबसे बड़ा झूठ है, जो सालों से सामान्य वर्ग के छात्रों को चुप कराने और असल मुद्दे से भटकाने के लिए बोला जा रहा है!🧵
यह कोई अलग मुद्दा नहीं है: आरक्षण ही आज के छात्रों की सबसे बड़ी और मूल त्रासदी है।
जो व्यवस्था मात्र 10 साल के लिए लाई गई थी, वह आज एक विकृत वोट-बैंक का दानव बन चुकी है, जो हर साल लाखों योग्य छात्रों का भविष्य निगल रही है।
छात्रों का अल्टीमेटम: इन्होंने बहुत सटीक कहा है, "जिस दिन असली छात्र अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आए, उस दिन वे ना सरकार को बख्शेंगे और ना ही विपक्ष को।"
अब 'आंदोलन भटकने' का डर दिखाना बंद करो। जब बीमारी की जड़ ही जातिगत आरक्षण है, तो इलाज भी सीधा उसी का होगा। अब कोई गोलमोल बातें नहीं होंगी।
अब बात केवल आरक्षण की होगी, बाकी सारी बातें जाएं भाड़ में!
आखिर इसे चलते हुए भी 124 साल हो गए है अब। 🛑🔥
#UGCRollback
#EndReservation #ReformReservation #Meritocracy
आरक्षण हटे या न हटे, इसपर चर्चा से क्यों भाग रहे?
कोई कह रहा कि लिखकर रख लो नहीं हटेगा, कोई गृहयुद्ध की धमकी दे रहा, कोई वही घिसी-पिटी 5000 साल पानी न पीने देने वाली कहानी लेकर आ रहा, कोई ललकार रहा कि सड़क पर उतरकर दिखाओ, कोई रीच के लिए लिख रहा कि कुछ नहीं होगा तो कोई सचमुच निराश है कि किसी राजनीतिक दल का समर्थन इस आंदोलन को नहीं मिलेगा।
लेकिन, मेरा प्रश्न केवल इतना है कि आओ चर्चा तो करो। बहस करो। साबित करो कि क्या जायज है या क्या नहीं। चर्चा से क्यों भागना, अगर तथ्य व तर्क हैं तुम्हारे तरकस में तो? चर्चा हो जाए, भारत शास्त्रार्थ की भूमि रही है।
सीधा फ़ैसला मत सुनाओ न, इसके पीछे तर्क दो। 4 फैक्ट्स बताओ। फ़िलहाल तो एटीट्यूड ऐसा है कि ग़लत है फिर भी जारी रहेगा, हटाकर दिखा दो दम है तो।
Why is RSS silent on reservation? If it doesn’t follow a caste-based system within its own organization, why remain silent when it comes to the country? This hypocrisy must end.
Make reservation history. Save the future of deserving and talented students. Support equal opportunity and merit for all.
#MeritFirst
ऐसे लोगों की सरेआम ऐसी फजीहत होनी चाहिए कि भारतीय सेना की तरफ उंगली उठाने से पहले इनकी रूह कांप जाए। भारत के लोग इतने भी 'सहिष्णु' नहीं हुए हैं कि कोई हमारे जवानों को सरेआम गाली दे और हम खामोशी से सुन लें।
यह देश सेना का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। ��स पर जल्द से जल्द कार्रवाई की उम्मीद है।
जब हर ज्वलंत विषय पर बात हो ही रही है और सरकार सुन रही है, तो अब आरक्षण पर बात करने का भी समय आ ही गया है।
आरक्षण को ये कहकर जायज ठहराया जाता है कि जिनपर सदियों तक अत्याचार हुए उन्हें आगे बढ़ाना है। फिर उनके लिए अलग से स्कूल-कॉलेज-कंपनियाँ क्यों नहीं खड़े किए? जो सबके लिए हैं, ��नमें सामान्य वर्ग के मौजूदा युवाओं के साथ पक्षपात करना तो अपराध है। अत्याचार हुआ या नहीं हुआ, इनकी क्या ग़लती? सबूत दिखाओ कि जिनके साथ पक्षपात हो रहा उन्होंने क्या अत्याचार किया। है कोई सबूत?
दूसरी बात, अक्सर कहा जाता है कि आरक्षण ग़रीबी हटाने की योजना नहीं है, सम्मान दिलाने की है। फिर इसका पैमाना क्या है? कौन सा थर्मामीटर ये तय करना है कि किसका कितना सम्मान हो रहा है और किसका कितना अपमान? ग़रीब होने के कारण किसी के साथ अपमान हुआ, फिर उसे आर्थिक आ���ार पर आरक्षण क्यों नहीं? भेदभाव क्यों? कोई जाति किसी राज्य में आरक्षण और किसी में अनारक्षित कैसे?
सवालों पर बहस हो। सिर्फ़ इस तर्क के साथ जवाब न दिया जाए कि इस चर्चा से गृहयुद्ध छिड़ जाएगा। अब ये तर्क पीछे जा चुका है। किसानों और कॉकरोचों ने मनवाई हैं अपनी माँगें। अब आरक्षण पर बात हो।
>हर जाति वर्ग के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस बराबर रखी जाये,
>या तो सबके लिए शून्य की जाये या फिर सबसे बराबर पैसे लिए जाएँ,
>जब आरक्षण जाति के आधार पर होता है तो फीस जाति देखकर क्यूँ ली ��ाती है?
>अब आंदोलन ट्विटर तक सीमित नहीं रहेगा ,अब हर छात्र की आवाजें स��़कों से गूंजेगी
"Reservation Hatao Andolan" on Instagram!!!
Got 923K followers, in 24 hrs.
This is what is called "organic growth"!
& Shows how much dissent is in today's youth against reservation!!
मेरे साथ ही, नेहा दास @neha_laldas को सवर्णों के अधिकारों पर लिखने-बोलने के लिए जिस स्तर की नीचता कुछ बड़े हैंडलों ने की थी, वह भूला नह��ं जा सकता। जिहादी और पाकिस्तानी से ले कर घटिया स्तर की बातें…
फिर याद है मुझे ‘मीसो के अजय सान्याल’ द्वारा ‘UC व्हाट्सएप’ एवम् प्रदर्��न में घुसपैठ करने का दावा करने की। तत्पश्चात, ‘पाकिस्तान से मदद लेंगे’ वाला नैरेटिव चला कर इस स्वस्थ चर्चा को डीलेजिटिमाइज करने की।
आज वो सारे लोग सरकार का हगा समेट रहे हैं। ‘दो कदम पीछे’, ‘कॉन्ग्रेस का शिक्षा मंत्री त्यागपत्र क्यों नहीं दे रहा’, ‘जेन जी के संस्कार दिख गए हमें, बच्चों को ठीक से पालो’ जैसे दर्शन पढ़ा रहे हैं।
अब बताओ न चूतियों, कौन सा मास्टरस्ट्रोक था ये?
भाजपा नेता के ‘वराहे’ से संबद्ध हरामी सूअरों ने मेरी माँ के निधन के समय सबसे अधिक नीचता भरे आक्रमण कराए थे। अब निकालो न तीन फॉलोवर वाले वैरिफाइड हैंडल और AI के पोस्टर, बताओ न मुझे प्रधान की महान उपलब्धियाँ?
अब तुम लोग यूपी पर ध्या�� दो, वहाँ का रायता समेटना, फैला तो बहुत दिए हो।
NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने मीडिया डिबेट और साक्षात्कारों में आरक्षण व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाते हुए सवर्णों का दर्द बयां किया है। हर्ष द्वारा उठाए गए प्रमुख प्रश्न इस प्रकार है:
आरक्षण के मुद्दे पर कभी कोई बात क्यों नहीं करता? न कोई न्यूज़ चैनल, न विपक्ष और न ही सत्ता पक्ष इस पर कुछ बोलता है। मेरे साथ पढ़ने वाले छात्र, जिन्होंने मुझसे लगभग आधे अंक प्राप्त किए थे, वे आज अस्पताल चला रहे हैं। आखिर आरक्षण पर बात कब की जाएगी?
यह एक 'ऑल इंडिया' परीक्षा है, फिर इसमें जाति, कॉलेज और राज्य स्तर पर अलग-अलग आरक्षण क्यों दिया जा रहा है? स्टेट लेवल पर ���ी यूपी में 560, एमपी में 540 और छत्तीसगढ़ में 530 अंकों पर ही बच्चों को कॉलेज मिल जाता है, ऐसा क्यों?
जब हर स्तर पर इतना आरक्षण दिया जा रहा है, तो आखिर सवर्णों के बच्चे कहाँ जाएँगे?
In 1950:
SC list had 607 castes, today it has ~1200
ST list had 241 tribes, today it has 744
So where these castes are coming from?
If even after 70+ yrs, not a single caste has been uplifted via reservation, that itself shows "Reservation is a failed policy".
#EndReservation
जंतर मंतर पर एकत्रित “छात्र” असल में ये व्यवस्था चाहते हैं
मुलायम सिंह यादव ने नक़ल का बाक़ायदा वादा करके चुनाव जीता था
और कल्याण/ राजनाथ सिंह ने नक़ल रोक कर सत्ता भी गँवाई थी