I pay 40% Tax in this country, I am here because I want to help fix India's education system.
A powerful voice from a young woman at the CJP protest. 👇
प्रदर्शन स्थल(जंतर मंतर) पर देर रात एक ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंट खाना लेकर पहुंचा.
ऑर्डर देने वाले व्यक्ति ने निर्देश दिया था कि यह खाना वहां मौजूद किसी भी भूखे व्यक्ति को दे दिया जाए.
20 जुलाई, 2026 | रात 1:30 बजे | जंतर-मंतर, नई दिल्ली
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इतने दिनों तक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और शिक्षा व्यवस्था व पेपर लीक को लेकर, खासकर सोशल मीडिया पर बने माहौल के कारण अधिकांश नौजवान छात्र प्रदर्शन में पहुंचे थे। वे ऑर्गेनिक तरीके से आए थे।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही चंद्रशेखर रावण की पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी संगठनों द्वारा मोबिलाइज़ किया गया था। आंदोलन मूलतः स्वतःस्फूर्त था।
CJP के दो-तीन कथित नेतृत्वकर्ता जे.पी. नड्डा को ज्ञापन देने के नाम पर प्रोटेस्ट और मार्च छोड़कर चले गए।
प्रोटेस्ट लगभग नेतृत्वविहीन हो गया था, लेकिन उसके बाद भी युवाओं में खूब जोश था।
बड़ी संख्या में Gen Z युवा पहली बार किसी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। वे रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे।
"बांग्लादेश बना देंगे ,नेपाल बना देंगे" जैसे नारे लगाने वाले दो-चार लोग रहे होंगे। उसके आधार पर पूरे आंदोलन को उसी नज़र से देखना या वैसा ठप्पा लगा देना उचित नहीं है।
भीड़ द्वारा पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं आंदोलन के बिल्कुल अंत में हुईं। उससे पहले पुलिस लगातार लाठीचार्ज करती रही और आंसू गैस के गोले छोड़ती रही।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।