परबतसर विधायक श्री रामनिवास गावड़िया जी का आभार।
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के वेतन संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को राजस्थान विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उठाकर आपने हजारों शिक्षकों की आवाज़ को सदन तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है। @RamniwasGawriya
माननीय
@RajCMO@KumariDiya@madandilawar @FinanceDeptRaj @edudeptraj#पंचायती_राज_संस्थाओं से शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती द्वारा उच्च पदों पर चयनित कर्मचारियों के #pay_protection एवं प्रस्तावित वसूली के संबंध में
संगठन की मुख्य मांगें एवं तथ्य :
🔹 पंचायती राज संस्थाओं के शिक्षक व्यवहा��िक रूप से शिक्षा विभाग की सेवा संरचना का हिस्सा हैं।
🔹 पूर्व सेवा अनुभव एवं अर्जित वेतन की पूर्ण उपेक्षा सेवा न्याय एवं प्रशासनिक समरूपता के विपरीत है।
🔹 राज्य सरकार पूर्व में इन कर्मचारियों को वेतन एवं सेवा संबंधी लाभ प्रदान कर उनकी सेवाओं को मान्यता दे चुकी है।
🔹 सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत वेतन संरक्षण को वर्षों बाद निरस्त कर वसूली करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरु��्ध है।
🔹 माननीय सर्वोच्च न्यायालय के रफीक मसीह निर्णय के अनुसार कर्मचारी की गलती या मिथ्या प्रस्तुतीकरण के अभाव में वसूली न्यायसंगत नहीं मानी जाती।
🔹 वित्त विभाग के 01.09.2025 के परिपत्र की पुनर्समीक्षा कर स्पष्ट एवं न्यायसंगत दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
🔹 राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 एवं 26 में संशोधन कर पंचायती राज संस्थाओं आदि से उच्च पदों पर चयनित कर्मचारियों को वेतन संरक्षण का लाभ द��या जाए।
🔹 ��ंतिम निर्णय तक वेतन पुनर्निर्धारण एवं वसूली की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।
🔹 पूर्व में स्वीकृत वेतन संरक्षण के प्रकरणों को यथावत रखते हुए जारी वसूली आदेश निरस्त किए जाएं।
75 वर्ष पूर्व निर्मित राजस्थान सेवा नियम 1951 के प्रासंगिक प्रावधानों की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किया जाना समय की मांग है
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सत्य प्रकाश
प्रदेश सभा अध्यक्ष @K_Barupal
प्रदे��� अध्यक्ष
@sohanjoharm
प्रदेश महामंत्री
हरिराम बड़ीवाल
प्रदेश कोषाध्यक्ष
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एक सरकारी सर्कुलर से हड़कंप...
राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 2 जून को एक आदेश जारी किया गया है जिसमें कि तृतीय श्रेणी अध्यापकों को राज्य सरकार का कर्मचारी ना मानकर नहीं माना गया है और ऐसे जितने भी कर्मचारी अन्य उच्च पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्त हुए हैं और पे प्रोटेक्शन का लाभ लिया है उनके वेतन नियतन पुनः कर अधिक भुगतान वसूली के आदेश जारी करने की तैयारी की जा रही है।
इस परिपत्र के अनुसार राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों/ स्वायत्तशासी संस्थाओं/ स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं के कार्मिक राज्य ���रकार के कर्मचारी नहीं हैं, अतः ऐसे कार्मिक यदि सीधी भर्ती के माध्यम से राजकीय सेवा में नियुक्त होते हैं तो उन्हें राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 एवं 26 के अंतर्गत पूर्व पद का वेतन संरक्षण(Pay-protection) देय नहीं होगा।
जिसके आधार पर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों द्वारा कार्यालय स्तर पर कमेटियों का गठन करके सेवा-पुस्तिकाओं का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। जिनमें ऐसे कार्मिक जो पूर्व में अध्यापक तृ��ीय श्रेणी में थे अथवा अन्य विभाग से अध्यापक तृतीय श्रेणी पर नियुक्त हुए, की सेवा-पुस्तिकाओं में वेतन-संरक्षण(Pay-protection) को त्रुटिपूर्ण और नियम विरुद्ध बताया जा रहा है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के दिनांक 14/3/11 के परिपत्र के प्रारंभिक शिक्षा, स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन है एवं तृतीय श्रेणी अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के अतिरिक्त समस्त सेवा प्रकरण पैतृक विभाग अर्थात स्कूल शिक्षा विभ��ग द्वारा संपादित किए जाने हैं। अतः जिन अध्यापकों की नियुक्ति जिला परिषद/ पंचायत समिति के माध्यम से तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप में हुई थी तथा वर्तमान में उनका पैतृक विभाग शिक्षा विभाग ही है।
उल्लेखनीय है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक प्रकरण में निर्णय दिया है जिसमें पंचायती राज संस्थानों के सभी कार्मिकों को राज्य सरकार के कार्मिक माना गया है, ऐसी स्थिति में यदि किसी प्रकार की वसू��ी के आदेश होते हैं तो सारे शिक्षक आंदोलन की राह पर जाएंगे।
आग्रह है इस आदेश को वापस लिया जाए।
@BhajanlalBjp @KumariDiya @GovindDotasra @madandilawar @RajCMO @RajGovOfficial
@anjanaomkashyap टीचर को दो कौड़ी का बताकर आपने अपनी हल्की और तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया है। क्या तुम्हें किसी टीचर ने नहीं पढ़ाया?जो आज टीवी चैनल पर समाज के एक बड़े वर्ग जो आने वाली पीढ़ी को तैयार करते है उस पर ऐसी टिप्पणी की। आज से तुम्हारा शो और तुम्हारा चैनल देखना बंद।