मिलार्ड, माई लॉर्ड, योर हॉनर जैसे शब्दों पर रोक लगनी चाहिए, सही शब्द है "My Judicial Servant" 🔥🔥
न्यायपालिका जनता के सेवा के लिए है, इस शख़्स ने जो शब्द CJI सूर्यकांत शर्मा के प्रति उपयोग किए हैं वह निंदनीय है,
लेकिन "My Judicial Servant में आपको ऑर्डर देता हूं कि ACP पर FIR दर्ज़ करे" यह शब्द बोलकर इस शख़्स ने पूरे देश का दिल जीत लिया है,
My Lord ❌
My Judicial Servant ✅
भारत में जजों को जज बोलना कब शुरू होगा? ये किस बात के मी लॉर्ड हैं. लॉर्ड सब आजादी के बाद इंग्लैंड चले गए. अब ये उनकी पूंछ रह गए यहां. इज्जत से बात करें तो इज्जत दीजिए. लॉर्ड-फॉर्ड क्या होता है?
मिलार्ड, की जगह अब जजो को "My Judicial Servant" बोला जाना चाहिए इस शख़्स ने देश को बताया है, बाकी आप जज भी बोल सकते हैं कोई समस्या नहीं है,
अमेरिका में जज को जज या योर ऑनर ही बोलते हैं. इज्जत घटती नहीं है इस बात से.
CJI को गाली नहीं देनी चाहिए थी हम निंदा करते हैं।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में रिज़र्वेशन नहीं है। वहाँ 24 कैरेट का शुद्ध मेरिट और टैलेंट उबल रहा है और ये देश की सबसे निठल्ली संस्थाएँ हैं।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 60 लाख केस पेंडिंग हैं। 20-20 सुनवाई के बाद इनसे जजमेंट नहीं लिखा जाता। इन्हें खुद को भंग कर लेना चाहिए।
यह भाई इसी कोलेजियम सिस्टम से परेशान लग रहा है। इसलिए अपना आपा खो बैठा। और ब्राह्मण सूर्यकांत शर्मा को गाली दे डाली।
इस भाई ने कागजों को फैंकते हुए कहा, यह काग़ज़ दे देना चादरमोद CJI (सूर्यकांत शर्मा) को,
न्यायपालिका से विश्वास उठ चुका है लोगों का, न्याय नहीं मिल रहा है, कॉलेजियम व्यवस्था ने एक जाति वर्ग का दबदबा बना दिया है,
घटना निंदनीय है 🔥🔥
११ जुलै १९९७ - आंबेडकरी चळवळीतील एक काळा दिवस
माता रमाबाई आंबेडकर नगर येथे महामानव भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या पुतळ्याच्या विटंबनेचा शांततामय मार्गाने निषेध करण्यासाठी रस्त्यावर उतरलेल्या निष्पाप निदर्शकांवर अमानुषपणे गोळीबार करण्यात आला होता.
आपल्या अस्मितेसाठी, स्वाभिमानासाठी आणि महामानवाच्या सन्मानासाठी छातीवर गोळ्या झेलणाऱ्या त्या सर्व शहीद भीम सैनिकांना आणि माता-भगिनींना आजच्या स्मृतिदिनी विनम्र अभिवादन आणि भावपूर्ण श्रद्धांजली!
21 तोपों की सलामी और नमन रहेगा भाई तुमको, 150 करोड़ जनता की आवाज़ को आपने न्यायपालिका में उठाया है 🔥
इस भाई का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाना चाहिए, मिलार्ड, योर हॉनर की जगह अब जजो को "My Judicial Servant" बोला जाना चाहिए इस शख़्स ने देश को बताया है,
हालांकि CJI को गाली नहीं देना चाहिए थी ।
बाबासाहेब एवं मान्यवर कांशीराम ने हमें सड़कों पर बवाल करना नहीं सिखाया था। उन्होंने समाज को शिक्षा, धम्म दीक्षा एवं शासन-प्रशासन को अपने हाथ में लेना सिखाया था।
आज कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए युवाओं को भड़काकर उनका करिअर खराब कर रहे हैं। उनसे सावधान रहें।
आंध्र प्रदेश के पुरातत्व विभाग ने चट्टान पर बने धम्मचक्र का पता लगाया है। यह धम्मचक्र पूर्वी गोदावरी जिला के कोठापल्ली गाँव से मिला है। गोदावरी का गोदा नदी का और कोठापल्ली का पल्ली गाँव का बोधक है।
खोजे गए धम्मचक्र में 32 तीलियाँ हैं। 32 तीलियों का प्रयोग सारनाथ के सिंह स्तंभ तथा साँची के स्तूप पर भी हुआ है।
इधर के बर्षों में 32 तीलियों वाला यह भारत का तीसरा धर्मचक्र मिला है। इसके पहले 32 तीलियों वाला एक धम्मचक्र पत्थर का बना हुआ कनगनहल्ली - सन्नति ( कर्नाटक) से और दूसरा टेराकोटा का बना हुआ लुंबिनी ( नेपाल ) से मिल चुका है।
कोठापल्ली का धम्मचक्र एक बड़ी चट्टान पर बना है। बगल में ब्राह्मी लिपि में लिखा अभिलेख है। यह धम्मचक्र स्वतंत्र नहीं बल्कि एक बौद्ध चित्रण पट्टिका का चट्टानी हिस्सा है।
कोठापल्ली से अनेक बौद्ध अवशेष मिले हैं। पत्थर के बने 4 विभिन्न प्रकार के स्तूप भी मिले हैं।
कोठापल्ली के बौद्ध अवशेषों को पुरातात्त्विकों ने पूर्व सातवाहन काल से लेकर सातवाहन काल के बीच का माना है।
Remembering renowned writer & former Vice Chancellor of Dr Babasaheb Ambedkar Marathwada University, Dr #ShankarraoKharat on his birth anniversary. During the late 1940s, Shankarrao Kharat was working with Dr BR Ambedkar, editing journals on the one hand and fighting legal battles on the other, for Dalits. His books, both fiction and non-fiction, occupied a unique space in the domain of literature in Marath.
Tributes.
युवाओं के नाम बहन जी का संदेश!
मेरठ की घटना का संज्ञान लेते हुए माननीया बहन जी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहाँ उन्होंने दलित समुदाय के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि हमें बाबासाहेब डॉ. आम्बेडकर के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। अपने ऊपर होने वाले किसी भी जुल्म-ज्यादती के विरुद्ध लड़ाई, कानून को हाथ में लेकर नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर लड़नी चाहिए।
न्याय के नाम पर हिंसा, हंगामा या सड़क जाम जैसा बवाल करने से पीड़ितों को न्याय मिलने वाला नहीं है; बल्कि इससे समाज के लोगों की मुसीबतें और परेशानियां और अधिक बढ़ जाती हैं। बहन जी ने स्पष्ट कहा कि न्याय के लिए समाज को बाबासाहेब के लिखित संविधान के अनुसार चलना चाहिए और जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय सहित अन्य कानूनी तरीकों का सहारा लेना चाहिए।
अब इस पर चंद्रशेखर आज़ाद का कहना है कि कोर्ट-कचहरी से न्याय पाने में तो 10-10 साल लग जाएंगे, तब तक क्या हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लुटती रहे और हम चुप बैठे रहें? दुनिया को छोड़िए, चंद्रशेखर आजाद पर खुद 36 मुकदमे दर्ज हैं। क्या उन्होंने अपने मामले में तत्काल इंसाफ दिलवा दिया? नहीं, क्योंकि कानून की प्रक्रिया के तहत सबको चलना ही पड़ता है।
चंद्रशेखर के इस बयान के बाद बहुत से लोग बहन जी को टारगेट कर रहे हैं। दरअसल, डायलॉगबाजी करने और नए लड़कों को खुश करने के लिए चंद्रशेखर का कहना सही लग सकता है, लेकिन आप ज़रा अपने विवेक का इस्तेमाल करके बताइए कि जिस भी घटना पर चंद्रशेखर जाते हैं, क्या वे उन परिवारों को तत्काल न्याय दिला पाते हैं? क्या वे कोई जज हैं जो ऑन-द-स्पॉट फैसला सुना देंगे? सहारनपुर, आजमगढ़, प्रयागराज, हरदोई, हाथरस... चंद्रशेखर आज़ाद ने इनमें से किस जगह पर तत्काल न्याय दिला दिया?
बहन जी ने चार-चार बार सरकार चलाई है, उन्हें अच्छी तरह पता है कि शासन और प्रशासन कैसे काम करता है। इसे छोड़िए, कोई भी व्यक्ति जो कानून की थोड़ी भी समझ रखता है, उसे पता होगा कि FIR होने के बाद पुलिस का इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) विवेचना करता है, चार्जशीट दाखिल होती है, फिर सालों तक कोर्ट में तारीख पर तारीख चलती है और तब जाकर कोई फैसला आता है। अब वहाँ चाहे चंद्रशेखर जाएं या राहुल गांधी, कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया में सालों-साल तो लगते ही हैं।
हाँ, यह अलग बात है कि यदि आप सत्ता में हैं, तो फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करके एक तय समय-सीमा के भीतर न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है। पर इसके लिए तो सत्ता चाहिए! इसीलिए बहन जी ने समाज के युवाओं को संदेश दिया कि अगर अपने ऊपर हो रहे जुल्म-ज्यादती को हमेशा के लिए रोकना है, तो उन्हें केंद्र व राज्यों की राजनीतिक सत्ता की 'मास्टर चाबी' खुद अपने हाथों में लेनी होगी।
अब कुछ साथियों की यह भी नाराजगी है कि बहन जी ने मेरठ के SSP अविनाश पांडेय के खिलाफ सीधा कुछ क्यों नहीं बोला। देखो भाई, बहन जी चार बार देश के सबसे बड़े सूबे की मुख्यमंत्री रही हैं, उनका राजनीतिक कद बहुत बड़ा है। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अविनाश पांडेय जैसे किसी अदने और गालीबाज़ अफसर का नाम लेकर अपने स्तर को नीचे गिराना चाहिए। वैसे भी आप बहन जी का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, वह भाषणबाज़ी नहीं करतीं, सीधा एक्शन लेती हैं। उनकी सरकार के दौरान IG, DIG और DGP रैंक के बड़े-बड़े अफसरों में इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि वे कानून और संविधान को धता बता सकें, फिर अविनाश पांडेय की क्या बिसात! उसके लिए तो हम लोग ही काफी हैं।
बाकी, ऐसे जातिवादी अफसरों को बल सत्ता के संरक्षण से मिलता है। अतः अगर समाज सच में अविनाश पांडेय के कृत्य से आहत है, तो भाजपा सरकार को इसका जवाब अपने वोट से दीजिए। लोकतंत्र में असली और सबसे गहरी चोट 'वोट की चोट' ही होती है। कुल मिलाकर बात यह है कि बहन जी ने समाज के युवाओं को जो संदेश दिया है, उस पर गंभीरता से अमल करें। वह बहुजन समाज की असली संरक्षक और मार्गदर्शक हैं।
संविधान विरोधी ताकतें हमेशा बहुजन समाज को सड़कों पर उलझाकर उनके भविष्य को मुकदमों के दलदल में धकेलना चाहती हैं। भावुकता में आकर सड़कों पर हुड़दंग करने से केवल हमारे युवाओं का करियर बर्बाद होगा, न्याय नहीं मिलेगा। इसलिए, इस सामंती व्यवस्था को नेस्तनाबूद करने के लिए जोश के साथ होश रखिए और बहन जी के नेतृत्व में 'वोट की ताकत' से अपनी खुद की हुक्मरानी स्थापित कीजिए।
11th July #TheDayInHistory
71 years ago #OTD in 1954, Dr #BabaSahebAmbedkar Visited to #KGF (Kolar Gold Fields). He Visited only 2 places in Karnataka one was KGF & other is Bangalore. Even though Mysore Maharaj invited but due to National assignment he couldn’t go to Mysore..
Picture 2: Dr #BabaSahebAmbedkar along with his wife Savita Ambedkar, J.T. Gopalkrishnan ( with Cap ), Shri Swami Durai ( MLA, #KGF ), and Shri Jaychand Bapana ( Standing), During #DrAmbedkar's Visit to Kolar Gold Fields in Karnataka.
जुलाई में इतनी बरसात हो रही है, इतनी बरसात हो रही है कि जून की कसर पूरी हो चली है. किसानों के लिए बादल मेहरबान हैं. डैम भर रहे हैं. अल नीनो का तांडव शायद टल चुका है. सूखे की आंशका थी, अब बाढ़ का खतरा है. भारत एक अद्भुत देश है. यहां हर भविष्यवाणी सही और गलत दोनों हो जाती है.
THANK YOU MESSAGE
I would like to thank you all for your greetings on my 91st birthday. As I mentioned to those gathered here in Leh, Ladakh, India on 6 July, when I look back on my life, I see that the core of my practice has been to be of benefit to others. That is the altruistic motivation with which I wake up every day.
Spreading compassion and kindness continues to be my life's primary mission. Such an attitude is essential to making our world a better place for everyone. I therefore call on my brothers and sisters everywhere, both young and old, to practice warm-heartedness and compassion, with genuine concern for the well-being of others. To be able to do so is, I believe, what it means to lead a meaningful and purposeful life of service.
As you may be aware, following a successful medical procedure on my left knee in New Delhi last month, I have since been recuperating here in Ladakh. As in past years, I find the climate here at this time of year well suited to my health, and I therefore plan to remain in Ladakh for the next several weeks.
With my prayers and good wishes,
DALAI LAMA
8 July 2026
लोग चांद पर पहुंच गए. मंगल पर जाने की तैयारी है लेकिन 2026 में भी भारतीय मुसलमान यही केस लड़ रहा है कि छोटी बच्चियों से निकाह उनके लिए कानूनी तौर पर मान्य हो, क्योंकि शरियत एक्ट में उसे इसकी छूट मिली है.
कोर्ट ने कह दिया, नहीं, कतई नहीं. शरियत या मुस्लिम पर्सनल लॉ, भारतीय कानून और संविधान के ऊपर नहीं है.
दरअसल, बालिका व महिला विरोधी शरियत एक्ट को ताले में बंद करने का वक्त आ गया है. वैसे भी ये अल्लाह का बनाया हुआ एक्ट नहीं है. ब्रिटिश सरकार ने बनाया था और इसमें कई बार संशोधन हुए हैं.
शर्मनाक है कि संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत यूसीसी को लागू करने में 80 साल लग रहे हैं. बड़े बड़े सूरमा मुख्यमंत्री इसे अब तक नहीं कर पाए हैं.
हिंदू धर्म में भी समाज सुधार आप नहीं हुआ. बहुविवाह रोकना हो, सती प्रथा रोकनी हो या विधवा विवाह को मान्यता देनी हो, या छुआछूत का उन्मूलन हो या बाल विवाह रोकना हो, हर काम के लिए कानून बनाना पड़ा है.
बाबा साहब के हिसाब से सुधार के मामले में मुसलमान दुनिया में सबसे जिद्दी और ढीठ हैं. वे 1400 साल से वहीं अटके हुए हैं. भारत का शरियत एक्ट उन्हीं प्राचीन मान्यताओं पर टिका है, जबकि ज्यादातर मुस्लिम देश भी इसे नहीं मानते.
भारतीय मुसलमान भी 4 निकाह, बच्चियों से शादी, बेटी की हकमारी, हलाला-निकाह अपने आप बंद नहीं करेगा. यूसीसी इसलिए भी चाहिए.
ये सही है कि बाल विवाह पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, पर उनको कानूनी मान्यता भी चाहिए.
8th July #TheDayInHistory#OnThisDay in the year 1945, Dr #BabaSahebAmbedkar founded the People’s Education Society. The purpose of which he set out, is as follows: ‘ The People’s Education Society’s objective is not merely to give education but to give education in such a manner as to promote intellectual, moral and social democracy.
Under its well-spread umbrella, People’s Education Society runs 12 University affiliated colleges, 6 of which are affiliated to the University of Mumbai, 5 to the Dr. Babasaheb Ambedkar Marathwada University and one to University of Pune imparting University Education to as many as 30,000 students of whom over 15,000 belong to the under privileged classes.
Besides these, the society runs many High Schools, Diploma Institutes and Hostels. Started for imparting education to the poorer people in general and the weaker sections namely SC, ST and OBC of Indian population in particular, the society has spread like a mighty banyan tree, with a large variety of educational institution in its shade.
बौद्ध भिक्षु और जैन मुनि 5000 साल से पैदल यात्रा करने की परंपरा को बनाए रखा है.
आधुनिक विज्ञान युग में, गाड़ी मोटर की सुविधा के बावजूद आज भी जैन मुनि पैदल पद यात्रा करते हैं.
बौद्ध भिक्षु भी पैदल यात्रा करते हैं. लक्ज़री गाड़ी मोटर और सुख सुविधा का परहेज करते हैं.
थाईलैंड से 70 बौद्ध भिक्षु भारत आए. सभी बौद्ध भिक्षुओं ने कर्नाटक के सिद्धार्थ बौद्ध विहार से हैदराबाद तक 400 किलोमीटर की धम्मयात्रा निकाली.
आज कल कुछ धार्मिक गुरु धर्म का चोला ओढ़कर लक्ज़री गाड़ी और AC आश्रम में लक्ज़री लाइफ जीते हैं.
जैन मुनि और बौद्ध भिक्षुओं को कोटि कोटि नमन करता हूँ.
Warmest birthday wishes to His Holiness the 14th Dalai Lama. May you be blessed with good health, long life, and happiness. May your message of compassion, peace, and wisdom continue to inspire the world.
@DalaiLama